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कृषि कानून वापसी के बाद ही लौटेंगे घर : किसान
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पुन्हाना। तीन कृषि कानूनों के विरोध में सुनहेड़ा बॉर्डर पर बैठे किसानों का धरना मंगलवार को 50वें दिन भी जारी रहा। किसानों ने कहा कि धरने को चाहे 50 साल हो जाए वे तब तक उठने वाले नहीं हैं जब तक कि सरकार किसानों की मांगों को नहीं मान लेती है। भले ही सरकार किसानों को कमजोर समझ रही है, लेकिन देशभर में किसान पहले से ज्यादा एक जुट हो रहे हैं। मेवात किसान मोर्चा धरना के संचालक मोलाना अरशद मीलखेडला, प्रवक्ता रशीद अहमद व अरशद एडवोकेट ने बताया कि दिल्ली के चारों ओर किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले 98 दिन से धरने पर बैठे है।
उनका कहना है कि सरकार पूंजीपतियों के सामने नतमस्तक हो रही हैं। वह किसानों की मांगों की बजाए उद्योगपतियों का ख्याल रख रही हैं। उन्होंने कहा कि देश भर का किसान शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से धरनों पर बैठा है, लेकिन सरकार कुछ संस्थानों के जरिये किसान धरनों को बदनाम करने की कोशिश कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का पहले सर्दी और अब गर्मी में इम्तिहान ले रही है। लेकिन सरकार ये भूल गई है किसान सर्दी और गर्मी का ही बना है वह डरने वाला नहीं है। किसानों का धरना तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को नहीं मान लेती है।
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उनका कहना है कि सरकार पूंजीपतियों के सामने नतमस्तक हो रही हैं। वह किसानों की मांगों की बजाए उद्योगपतियों का ख्याल रख रही हैं। उन्होंने कहा कि देश भर का किसान शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से धरनों पर बैठा है, लेकिन सरकार कुछ संस्थानों के जरिये किसान धरनों को बदनाम करने की कोशिश कर चुकी है।
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उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का पहले सर्दी और अब गर्मी में इम्तिहान ले रही है। लेकिन सरकार ये भूल गई है किसान सर्दी और गर्मी का ही बना है वह डरने वाला नहीं है। किसानों का धरना तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को नहीं मान लेती है।
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