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Noida News: अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा
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- सेक्टर-108 में चल रहे कॉल सेंटर से 14 आरोपी गिरफ्तार, तकनीकी सहायता के नाम पर करते थे ठगी
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस और साइबर सेल की टीम ने सेक्टर-108 स्थित बिल्डिंग में छापा मारकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कई माह से ऑनलाइन फ्रॉड कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपी कॉल सेंटर की तरह सेट अप बनाकर जालसाजी कर रहे थे। पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों का डाटा लेकर मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि पर पॉप ऑप भेजकर एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन आदि की कस्टमर केयर सर्विस प्रदाता होने का दावा करते थे। इसके लिए इन आरोपियोंं ने वर्चुअल टीएफएन नंबर लिया हुआ था। आरोपी नोएडा के फर्जी कॉल सेंटर से आईबीएम डायलर के माध्यम से अमेरिकी नंबरों पर कॉल लैंड करवाते थे।
एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन, गूगल प्ले आदि से कोई असुविधा होने पर आरोपी वर्चुअल टीएफएन नंबर से कॉल करते थे। जालसाज अमेरिकी कॉलर से उनकी शिकायत पूछते थे। कॉलर/कस्टमर जिस कम्पनी के बारे में कोई असुविधा या समस्या बताता है वह खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले उसकी समस्या दूर करने के लिए एनी डेस्क, टीम व्यूअर, अल्ट्रा व्यूअर आदि एप्लीकेशन के माध्यम से सिस्टम का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते थे।
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इसके बाद कॉलर को असली बात न बताकर उनसे अन्य समस्याओं के बारे में बात करते है और उन्हें उनकी निजी जानकारी का रिस्क, हैकर द्वारा अकाउंट हैक करना, डिवाइस असुरक्षित, फाइनेंशियल इनफार्मेशन लीक व चाईल्ड पोर्नोग्राफी इत्यादि के बारे में बताते है। फिर समस्या को दूर करने के नाम पर कॉलर से 500-1000 डॉलर का ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड जैसे गूगल पे, अमेजान के माध्यम से ट्रांसफर करवा लेते थे। बाद मे ब्लॉकर के माध्यम से कैश करवाकर अपना हिस्सा प्राप्त कर लेते थे डीसीपी क्राइम शक्तिमोहन अवस्थी के मुताबिक जालसाज अमेरिकी व दूसरे देशों के नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी करते थे। इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की भी पहचान की जा रही है।
वीओआईपी कॉलिंग से करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आरोपी वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कॉलिंग से ठगी को अंजाम देते थे। यह इंटरनेट आधारित कॉलिंग है जो व्हाट्स एप कॉलिंग जैसे काम करता है। इसकी रिकॉर्डिंग आदि नहींं होती है। इसमें कहां से किसे फोन किया जा रहा है इसका पता नहीं लगता।
गिरफ्तार आरोपी
जींद हरियाणा निवासी प्रिंस, दिल्ली निवासी राम राठौर, वैभव अरोड़ा, तंसुल सोलंकी, शिवम शर्मा, ध्रुव चोपड़ा, सारांश दुआ व नवजोत सिंह, देहरादून निवासी अंकित पंत, कौशिक सेन, विक्की व वैभव गौड़, मुजफ्फरनगर निवासी मो. नादिर और ग्रेनो वेस्ट निवासी सौरभ अवस्थी।
बरामद सामान
चार कारें, 18 लैपटाप, 1 इंटरनेट राउटर, 2 इंटरनेट नेटवर्क स्विच, 17 हेडफोन।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। अमेरिकी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का नोएडा पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस और साइबर सेल की टीम ने सेक्टर-108 स्थित बिल्डिंग में छापा मारकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कई माह से ऑनलाइन फ्रॉड कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपी कॉल सेंटर की तरह सेट अप बनाकर जालसाजी कर रहे थे। पुलिस पूछताछ में पता चला कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों का डाटा लेकर मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप आदि पर पॉप ऑप भेजकर एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन आदि की कस्टमर केयर सर्विस प्रदाता होने का दावा करते थे। इसके लिए इन आरोपियोंं ने वर्चुअल टीएफएन नंबर लिया हुआ था। आरोपी नोएडा के फर्जी कॉल सेंटर से आईबीएम डायलर के माध्यम से अमेरिकी नंबरों पर कॉल लैंड करवाते थे।
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एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजॉन, गूगल प्ले आदि से कोई असुविधा होने पर आरोपी वर्चुअल टीएफएन नंबर से कॉल करते थे। जालसाज अमेरिकी कॉलर से उनकी शिकायत पूछते थे। कॉलर/कस्टमर जिस कम्पनी के बारे में कोई असुविधा या समस्या बताता है वह खुद को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले उसकी समस्या दूर करने के लिए एनी डेस्क, टीम व्यूअर, अल्ट्रा व्यूअर आदि एप्लीकेशन के माध्यम से सिस्टम का रिमोट एक्सेस प्राप्त कर लेते थे।
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इसके बाद कॉलर को असली बात न बताकर उनसे अन्य समस्याओं के बारे में बात करते है और उन्हें उनकी निजी जानकारी का रिस्क, हैकर द्वारा अकाउंट हैक करना, डिवाइस असुरक्षित, फाइनेंशियल इनफार्मेशन लीक व चाईल्ड पोर्नोग्राफी इत्यादि के बारे में बताते है। फिर समस्या को दूर करने के नाम पर कॉलर से 500-1000 डॉलर का ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड जैसे गूगल पे, अमेजान के माध्यम से ट्रांसफर करवा लेते थे। बाद मे ब्लॉकर के माध्यम से कैश करवाकर अपना हिस्सा प्राप्त कर लेते थे डीसीपी क्राइम शक्तिमोहन अवस्थी के मुताबिक जालसाज अमेरिकी व दूसरे देशों के नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर ठगी करते थे। इस गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की भी पहचान की जा रही है।
वीओआईपी कॉलिंग से करते थे ठगी
पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आरोपी वॉयर ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) कॉलिंग से ठगी को अंजाम देते थे। यह इंटरनेट आधारित कॉलिंग है जो व्हाट्स एप कॉलिंग जैसे काम करता है। इसकी रिकॉर्डिंग आदि नहींं होती है। इसमें कहां से किसे फोन किया जा रहा है इसका पता नहीं लगता।
गिरफ्तार आरोपी
जींद हरियाणा निवासी प्रिंस, दिल्ली निवासी राम राठौर, वैभव अरोड़ा, तंसुल सोलंकी, शिवम शर्मा, ध्रुव चोपड़ा, सारांश दुआ व नवजोत सिंह, देहरादून निवासी अंकित पंत, कौशिक सेन, विक्की व वैभव गौड़, मुजफ्फरनगर निवासी मो. नादिर और ग्रेनो वेस्ट निवासी सौरभ अवस्थी।
बरामद सामान
चार कारें, 18 लैपटाप, 1 इंटरनेट राउटर, 2 इंटरनेट नेटवर्क स्विच, 17 हेडफोन।