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फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, 22 गिरफ्तार
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गुरुग्राम। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बृहस्पतिवार देर रात उद्योग विहार फेज-5 क्षेत्र में छापा मारकर फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। मौके से 22 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। इनमें संचालक के अलावा 12 युवक व 9 युवतियां शामिल हैं। आरोपी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करते थे।
साइबर क्राइम थाने के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुंदरपाल ने बताया कि उद्योग विहार फेज-5 के प्लॉट नंबर 770 की दूसरी मंजिल पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मौके पर छापा मारा गया। सभी कर्मचारी कीपैड मोबाइल से कॉल कर नौकरी दिलाने की एवज में पैसे लेने की बातें कर रहे थे। पूछताछ नें कॉल सेंटर संचालक सोनू ने बताया कि उसने एक कंपनी पंजीकृत करवा रखी है। ईमेल भेजने के लिए प्लेसमेंटएमनसी डॉट कॉम के नाम से एक डोमेन भी ले रखा है। ये लोग अलग-अलग वेबसाइट पर नौकरी के लिए बायोडाटा अपलोड करने वालों का डेटा इकट्ठा कर लेते थे। जो भी जरूरतमंद इनसे संपर्क करता तो उनसे पंजीकरण फीस के नाम पर 6500 रुपये ले लिए जाते थे। इसके बाद दस्तावेज जांच के नाम पर 28 हजार रुपये, कमीशन के नाम पर 89 हजार रुपये और सिक्योरिटी के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूलते थे।
पहले भी हो चुकी है एफआईआर: कॉल सेंटर संचालक ने पुलिस को बताया कि इस काम में उसका भाई संजय भी साथ देता है। दिल्ली के द्वारका निवासी अनिल, दीपक, कापसहेड़ा निवासी राज, डीएलएफ फेज-3 निवासी अजीत पार्टनर हैं। सोनू पर अगस्त 2020 में भी फर्जी कॉल सेंटर चलाने का मामला दर्ज किया गया था। हैदराबाद, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी उस पर एफआईआर दर्ज है। डीसीपी हेडक्वार्टर आस्था मोदी ने बताया कि आरोपी नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उनसे ठगी करते थे। ऐेसे में बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
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साइबर क्राइम थाने के निरीक्षक (इंस्पेक्टर) सुंदरपाल ने बताया कि उद्योग विहार फेज-5 के प्लॉट नंबर 770 की दूसरी मंजिल पर फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना मिली थी। इसके बाद मौके पर छापा मारा गया। सभी कर्मचारी कीपैड मोबाइल से कॉल कर नौकरी दिलाने की एवज में पैसे लेने की बातें कर रहे थे। पूछताछ नें कॉल सेंटर संचालक सोनू ने बताया कि उसने एक कंपनी पंजीकृत करवा रखी है। ईमेल भेजने के लिए प्लेसमेंटएमनसी डॉट कॉम के नाम से एक डोमेन भी ले रखा है। ये लोग अलग-अलग वेबसाइट पर नौकरी के लिए बायोडाटा अपलोड करने वालों का डेटा इकट्ठा कर लेते थे। जो भी जरूरतमंद इनसे संपर्क करता तो उनसे पंजीकरण फीस के नाम पर 6500 रुपये ले लिए जाते थे। इसके बाद दस्तावेज जांच के नाम पर 28 हजार रुपये, कमीशन के नाम पर 89 हजार रुपये और सिक्योरिटी के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूलते थे।
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पहले भी हो चुकी है एफआईआर: कॉल सेंटर संचालक ने पुलिस को बताया कि इस काम में उसका भाई संजय भी साथ देता है। दिल्ली के द्वारका निवासी अनिल, दीपक, कापसहेड़ा निवासी राज, डीएलएफ फेज-3 निवासी अजीत पार्टनर हैं। सोनू पर अगस्त 2020 में भी फर्जी कॉल सेंटर चलाने का मामला दर्ज किया गया था। हैदराबाद, गुजरात और पश्चिम बंगाल में भी उस पर एफआईआर दर्ज है। डीसीपी हेडक्वार्टर आस्था मोदी ने बताया कि आरोपी नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उनसे ठगी करते थे। ऐेसे में बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
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