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फर्जी कॉल सेंटर : अमेरिकी नागरिकों से 10 करोड़ ठगे, 32 गिरफ्तार
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विदेशियों से ठगी करने वाले कॉल सेंटर से पकड़े गए आरोपी और बरामद सामान।
- फोटो : Grnoida
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो वेस्ट में बिसरख कोतवाली पुलिस ने रात में संचालित हो रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से 55 कंप्यूटर, दो लैपटॉप, 32 मोबाइल, 20 हेड फोन आदि सामान बरामद किया है।
पकड़े गए आरोपी हैकर से डाटा लेकर अमेरिका के नागरिकों को कॉल कर कंप्यूटर से वायरस व बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। आरोपी एक रात में तीन से चार हजार डॉलर तक ठग लेते थे। इस तरह से आरोपी एक साल में लगभग दस करोड़ रुपये कमा चुके थे। पकड़े गए आरोपियों में कॉल सेंटर का मैनेजर जहांगीरपुरी दिल्ली निवासी परविंद्र पाल सिंह शामिल है, लेकिन मालिक व लगभग 20 आरोपी फरार हैं।
वहीं, हैकर की भी पहचान नहीं हो पाई है। आरोपी एक विदेशी नागरिक से तीन सौ से चार सौ डॉलर तक की वसूली करते थे। एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल और एसीपी योगेंद्र सिंह ने बताया कि बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिता चौहान की टीम को सूचना मिली थी कि ग्रेनो वेस्ट में चेरी काउंटी सोसाइटी के पीछे रात में कुछ युवक आते हैं और सुबह होने से पहले लौट जाते हैं।
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पड़ताल करने पर पता चला कि अर्था स्पेशल इकोनॉमी जोन में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी पहले उन्हें चाय-काफी ऑफर कर रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एक साल से कॉल सेंटर चल रहा है। जब अमेरिका में दिन निकलता है और देश में रात होती है तो आरोपियों की ड्यूटी शुरू होती थी।
आरोपी निजी कार, दोपहिया और कैब से दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद से आते थे। दो आरोपी गौतमबुद्घ नगर के रहने वाले हैं। आरोपी उपलब्ध कराये गए मोबाइल नंबरों पर कॉल कर कंप्यूटर सिस्टम में वायरस व बग आदि की समस्या की जानकारी देते हैं और इसे हल कर डॉलर वसूलते हैं। खास बात यह है कि आरोपी एक या दो की दबाकर इस समस्या को हल कर देते थे, लेकिन इसमें काफी समय लेते थे, ताकि विदेशी को लगे कि कंपनी के प्रतिनिधि उनकी समस्या का हल करने में मेहनत कर रहे हैं।
ऐसे ठगते थे
कॉल सेंटर मालिक का सीधा संपर्क एक हैकर से है। हैकर विदेशी या फिर देश का है, इसकी जानकारी अभी पुलिस के पास नहीं है। हैकर सोशल मीडिया पर सक्रिय विदेशियों को लुभावने मेसेज, पोस्ट आदि के जरिये लिंक क्लिक करने पर विवश करते थे। जैसे ही कोई हैकर की वेबसाइट या लिंक खोलता था तो वह उसके कंप्यूटर या लैपटॉप सिस्टम में कुछ इस तरह की सेटिंग कर देते था कि वह काम नहीं करे। इसके बाद उनका डाटा हैकर कॉल सेंटर संचालक को उपलब्ध करा देता था। फिर कॉल सेंटर के कर्मी खुद को उस कंपनी के प्रतिनिधि बताकर कॉल करते थे, जिस कंपनी का विदेशी नागरिक कंप्यूटर इस्तेमाल करता था।
एक लाख तक वेतन केवल अच्छी अंग्रेजी थी भर्ती की योग्यता
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कॉल सेंटर में नौकरी लिए तकनीकी विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं थी। कॉल सेंटर में केवल उन युवकों को नौकरी मिलती थी, जो इंग्लिश स्पीकिंग में माहिर थे। इसके अलावा जिले के बाहर के युवकों की ही भर्ती की जाती थी। उन्हें अमेरिका के वासियों के कंप्यूटर को ठीक करने का फार्मूला बता दिया जाता था। इसे इस्तेमाल कर आरोपी सेकेंडों में कंप्यूटर लैपटॉप आदि ऑनलाइन सही कर देते थे, लेकिन डॉलर वसूलने के लिए विदेशी से लंबी बातचीत कर बताते थे कि उसने काफी प्रयास किया था। इसके लिए आरोपी युवकों को 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का वेतन देते थे। कॉल सेंटर के मैनेजर को एक लाख का वेतन मिलता था। इसके अलावा सभी आरोपियों को वेतन का लगभग 50 फीसदी तक इंसेंटिव भी मिलता था।
कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार के कारण जिला बना पसंद
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में एक साल से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इससे पहले आरोपी दिल्ली के कोंडली में कॉल सेंटर चला रहे थे। हैकर का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हैकर से डाटा लेने के बाद ही आरोपी अमेरिका के नागरिकों से संपर्क कर वायरस और बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। कंपनियों और कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार होने के कारण आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाने के लिए जिले का रुख करते हैं, लेकिन पुलिस लगातार कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेज रही है।
निक नेम रखकर करते थे कॉल
अधिकांश आरोपी दिल्ली और एनसीआर के रहने वाले हैं। आरोपी असली नाम को छिपाकर निक नेम रखकर धंधा कर रहे थे। कॉल सेंटर के मैनेजर ने अपना नाम एरिक रखा था। वहीं, अन्य आरोपितों के नाम रोबिन, एडम, डगलस, ग्लेन, स्मिथ, जैक, मार्क आदि थे। लड़कियों ने अपना नाम एंजेलिना, क्रिस्टोफर रखा हुआ था।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
संकेत, अविनाश, अक्षय, शाहरुख, रविन्द्र, शिवम, प्रियांक, सुमन, हरमनजीत, परविंदर पाल, चरनदीप, शिव द्विवेदी, राकेश सिंह, किरण कुमार, मोहम्मद लादेन, हर प्रकाश, अजय नेगी, सुनीश मेहरा, गौरव बंसल, नाजामल हक, गौरव कुमार, राज सिंह, साहब, शिवम, मनन शर्मा, सार्थक गांधी, अमित भल्ला, रवि नागपाल, नितिन शर्मा, शैलेश कुमार और परविंदर ।
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पकड़े गए आरोपी हैकर से डाटा लेकर अमेरिका के नागरिकों को कॉल कर कंप्यूटर से वायरस व बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। आरोपी एक रात में तीन से चार हजार डॉलर तक ठग लेते थे। इस तरह से आरोपी एक साल में लगभग दस करोड़ रुपये कमा चुके थे। पकड़े गए आरोपियों में कॉल सेंटर का मैनेजर जहांगीरपुरी दिल्ली निवासी परविंद्र पाल सिंह शामिल है, लेकिन मालिक व लगभग 20 आरोपी फरार हैं।
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वहीं, हैकर की भी पहचान नहीं हो पाई है। आरोपी एक विदेशी नागरिक से तीन सौ से चार सौ डॉलर तक की वसूली करते थे। एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल और एसीपी योगेंद्र सिंह ने बताया कि बिसरख कोतवाली प्रभारी अनिता चौहान की टीम को सूचना मिली थी कि ग्रेनो वेस्ट में चेरी काउंटी सोसाइटी के पीछे रात में कुछ युवक आते हैं और सुबह होने से पहले लौट जाते हैं।
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पड़ताल करने पर पता चला कि अर्था स्पेशल इकोनॉमी जोन में फर्जी कॉल सेंटर चल रहा है। पुलिस ने दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी पहले उन्हें चाय-काफी ऑफर कर रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि एक साल से कॉल सेंटर चल रहा है। जब अमेरिका में दिन निकलता है और देश में रात होती है तो आरोपियों की ड्यूटी शुरू होती थी।
आरोपी निजी कार, दोपहिया और कैब से दिल्ली, हरियाणा, गाजियाबाद से आते थे। दो आरोपी गौतमबुद्घ नगर के रहने वाले हैं। आरोपी उपलब्ध कराये गए मोबाइल नंबरों पर कॉल कर कंप्यूटर सिस्टम में वायरस व बग आदि की समस्या की जानकारी देते हैं और इसे हल कर डॉलर वसूलते हैं। खास बात यह है कि आरोपी एक या दो की दबाकर इस समस्या को हल कर देते थे, लेकिन इसमें काफी समय लेते थे, ताकि विदेशी को लगे कि कंपनी के प्रतिनिधि उनकी समस्या का हल करने में मेहनत कर रहे हैं।
ऐसे ठगते थे
कॉल सेंटर मालिक का सीधा संपर्क एक हैकर से है। हैकर विदेशी या फिर देश का है, इसकी जानकारी अभी पुलिस के पास नहीं है। हैकर सोशल मीडिया पर सक्रिय विदेशियों को लुभावने मेसेज, पोस्ट आदि के जरिये लिंक क्लिक करने पर विवश करते थे। जैसे ही कोई हैकर की वेबसाइट या लिंक खोलता था तो वह उसके कंप्यूटर या लैपटॉप सिस्टम में कुछ इस तरह की सेटिंग कर देते था कि वह काम नहीं करे। इसके बाद उनका डाटा हैकर कॉल सेंटर संचालक को उपलब्ध करा देता था। फिर कॉल सेंटर के कर्मी खुद को उस कंपनी के प्रतिनिधि बताकर कॉल करते थे, जिस कंपनी का विदेशी नागरिक कंप्यूटर इस्तेमाल करता था।
एक लाख तक वेतन केवल अच्छी अंग्रेजी थी भर्ती की योग्यता
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कॉल सेंटर में नौकरी लिए तकनीकी विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं थी। कॉल सेंटर में केवल उन युवकों को नौकरी मिलती थी, जो इंग्लिश स्पीकिंग में माहिर थे। इसके अलावा जिले के बाहर के युवकों की ही भर्ती की जाती थी। उन्हें अमेरिका के वासियों के कंप्यूटर को ठीक करने का फार्मूला बता दिया जाता था। इसे इस्तेमाल कर आरोपी सेकेंडों में कंप्यूटर लैपटॉप आदि ऑनलाइन सही कर देते थे, लेकिन डॉलर वसूलने के लिए विदेशी से लंबी बातचीत कर बताते थे कि उसने काफी प्रयास किया था। इसके लिए आरोपी युवकों को 25 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का वेतन देते थे। कॉल सेंटर के मैनेजर को एक लाख का वेतन मिलता था। इसके अलावा सभी आरोपियों को वेतन का लगभग 50 फीसदी तक इंसेंटिव भी मिलता था।
कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार के कारण जिला बना पसंद
एडिशनल डीसीपी अंकुर अग्रवाल ने बताया कि ग्रेनो वेस्ट में एक साल से फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। इससे पहले आरोपी दिल्ली के कोंडली में कॉल सेंटर चला रहे थे। हैकर का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। हैकर से डाटा लेने के बाद ही आरोपी अमेरिका के नागरिकों से संपर्क कर वायरस और बग निकालने का झांसा देकर ठगते थे। कंपनियों और कॉरपोरेट दफ्तरों की भरमार होने के कारण आरोपी फर्जी कॉल सेंटर चलाने के लिए जिले का रुख करते हैं, लेकिन पुलिस लगातार कार्रवाई कर आरोपियों को जेल भेज रही है।
निक नेम रखकर करते थे कॉल
अधिकांश आरोपी दिल्ली और एनसीआर के रहने वाले हैं। आरोपी असली नाम को छिपाकर निक नेम रखकर धंधा कर रहे थे। कॉल सेंटर के मैनेजर ने अपना नाम एरिक रखा था। वहीं, अन्य आरोपितों के नाम रोबिन, एडम, डगलस, ग्लेन, स्मिथ, जैक, मार्क आदि थे। लड़कियों ने अपना नाम एंजेलिना, क्रिस्टोफर रखा हुआ था।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
संकेत, अविनाश, अक्षय, शाहरुख, रविन्द्र, शिवम, प्रियांक, सुमन, हरमनजीत, परविंदर पाल, चरनदीप, शिव द्विवेदी, राकेश सिंह, किरण कुमार, मोहम्मद लादेन, हर प्रकाश, अजय नेगी, सुनीश मेहरा, गौरव बंसल, नाजामल हक, गौरव कुमार, राज सिंह, साहब, शिवम, मनन शर्मा, सार्थक गांधी, अमित भल्ला, रवि नागपाल, नितिन शर्मा, शैलेश कुमार और परविंदर ।