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सपा नेता उपदेश नागर और संजीव नागर का निष्कासन निरस्त
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ग्रेटर नोएडा। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने जनपद गौतमबुद्ध नगर के पार्टी नेता उपदेश नागर और संजीव नागर का निष्कासन निरस्त कर दिया है। हाल ही में दोनों नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। दोनों के निष्कासन के बाद कुछ अन्य नेताओं ने भी इस्तीफे दे दिए थे। लगातार हो रहे इस्तीफे से जिले में पार्टी की गुटबाजी उजागर हुई थी। बताया गया है कि निष्कासित दोनों नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर अपनी बात रखी और उनके खिलाफ झूठी शिकायत देने की बात कही गई। इसके बाद निष्कासन निरस्त किया गया है।
अब, निष्कासन निरस्त होने के बाद उपदेश नागर और संजीव नागर का कहना है कि उनके संबंध में हाईकमान को साजिशन गलत जानकारी दी गई थी। जिस पर निष्कासन की कार्रवाई की गई थी। वहीं, जिलाध्यक्ष इंदर प्रधान का कहना है दोनों नेताओं का निष्कासन निरस्त करने के साथ भविष्य में पार्टी के प्रति निष्ठा से कार्य करने की चेतावनी भी दी गई है।
अहम है कि विधानसभा प्रभारी रहे मिलक लच्छी गांव निवासी उपदेश नागर और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रहे संजीव नागर को 11 अप्रैल को सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। दोनों नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इनके निष्कासन के बाद जिले के कुछ अन्य नेताओं ने इस्तीफे दिए थे। हालांकि कई नेताओं ने इस्तीफे वापस ले लिए थे। अन्य नेताओं के भी इस्तीफे वापस लेने का दावा किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी की गुटबाजी सतह पर आ गई थी।
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अब, निष्कासन निरस्त होने के बाद उपदेश नागर और संजीव नागर का कहना है कि उनके संबंध में हाईकमान को साजिशन गलत जानकारी दी गई थी। जिस पर निष्कासन की कार्रवाई की गई थी। वहीं, जिलाध्यक्ष इंदर प्रधान का कहना है दोनों नेताओं का निष्कासन निरस्त करने के साथ भविष्य में पार्टी के प्रति निष्ठा से कार्य करने की चेतावनी भी दी गई है।
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अहम है कि विधानसभा प्रभारी रहे मिलक लच्छी गांव निवासी उपदेश नागर और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष रहे संजीव नागर को 11 अप्रैल को सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। दोनों नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। इनके निष्कासन के बाद जिले के कुछ अन्य नेताओं ने इस्तीफे दिए थे। हालांकि कई नेताओं ने इस्तीफे वापस ले लिए थे। अन्य नेताओं के भी इस्तीफे वापस लेने का दावा किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी की गुटबाजी सतह पर आ गई थी।
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