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Noida News: 82 दिन बाद भी सिटी बसों की निगरानी की व्यवस्था नहीं
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-12 जून से शुरू हुआ था सिटी बसों का संचालन, अब तक ऐप आधारित निगरानी की व्यवस्था नहीं बन पाई
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में सिटी बस का संचालन शुरू हुए 82 दिन गुजर चुके हैं लेकिन निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं बना पाया है। संचालन शुरू होने की तैयारी के साथ ऐप बनाने, निगरानी बोर्ड बनाने समेत कई चर्चा हुई थी। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण वास्तविक समय पर यह नहीं जानकारी जुटा पा रहा है कि कौन सी बस कौन से रूट से गुजर रही है। बसें रुक रहीं हैं या रुक भी नहीं रही हैं। यह शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि कई बसों के चालक बगैर सवारी बैठाए खाली बसें दौड़ा रहे हैं। यह देखते हुए प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को पत्र भेजकर ऐप आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने को कहा है।
परिवहन निगम ने 12 जून से सिटी बस का संचालन शुरू किया था। इसके बाद 15 जून से बसों की संख्या बढ़ाकर नोएडा में 50 और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए 25-25 की गई थीं। संचालन सेक्टर-90 स्थित बस डिपो से हो रहा है। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि यात्री संख्या सिटी बसों में बढ़ रही है। चलने वाली 50 बसें मुख्य रूट से गुजर रही हैं। लेकिन सेक्टरों की आंतरिक कनेक्टिविटी के काम नहीं आ रही हैं। एक्सप्रेस-वे किनारे के गांव-सेक्टर भी छूटे हुए हैं। इसलिए 25 बसें और बढ़वाई जानी हैं। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 75 बसें हो जाएंगी। प्राधिकरण इन बसों के संचालन के लिए आने वाले किराए और खर्च के अंतर (वीजीएफ) का भुगतान परिवहन निगम को कर रहा है। 50 बसों के लिए वीजीएफ करीब 1 करोड़ रुपये प्रति महीने का आ रहा है। निगरानी को लेकर सिटी बस योजना के प्रभारी प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक आर के शर्मा का कहना है कि ऐप परिवहन निगम को बनवाना है। निगम को ऐप के लिए पत्र भेज दिया गया है।
ऐप से यात्रियों को रूट और बस की मौजूदा स्थिति की जानकारी मिलेगी
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि ऐप से सभी बसों की संचालन की निगरानी प्राधिकरण कर सकेगा। इसके साथ ही यात्रियों के लिए इसे उपयोगी बनाने के लिए कहा गया है। ऐप में यात्रियों को सिटी बस के रूट, रूट पर आने-जाने वाली बसों की मौजूदा स्थिति की वास्तविक जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। शहर में सिटी बस का संचालन शुरू हुए 82 दिन गुजर चुके हैं लेकिन निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं बना पाया है। संचालन शुरू होने की तैयारी के साथ ऐप बनाने, निगरानी बोर्ड बनाने समेत कई चर्चा हुई थी। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण वास्तविक समय पर यह नहीं जानकारी जुटा पा रहा है कि कौन सी बस कौन से रूट से गुजर रही है। बसें रुक रहीं हैं या रुक भी नहीं रही हैं। यह शिकायतें भी सामने आ रही हैं कि कई बसों के चालक बगैर सवारी बैठाए खाली बसें दौड़ा रहे हैं। यह देखते हुए प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को पत्र भेजकर ऐप आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने को कहा है।
परिवहन निगम ने 12 जून से सिटी बस का संचालन शुरू किया था। इसके बाद 15 जून से बसों की संख्या बढ़ाकर नोएडा में 50 और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के लिए 25-25 की गई थीं। संचालन सेक्टर-90 स्थित बस डिपो से हो रहा है। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि यात्री संख्या सिटी बसों में बढ़ रही है। चलने वाली 50 बसें मुख्य रूट से गुजर रही हैं। लेकिन सेक्टरों की आंतरिक कनेक्टिविटी के काम नहीं आ रही हैं। एक्सप्रेस-वे किनारे के गांव-सेक्टर भी छूटे हुए हैं। इसलिए 25 बसें और बढ़वाई जानी हैं। इसके बाद नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में कुल 75 बसें हो जाएंगी। प्राधिकरण इन बसों के संचालन के लिए आने वाले किराए और खर्च के अंतर (वीजीएफ) का भुगतान परिवहन निगम को कर रहा है। 50 बसों के लिए वीजीएफ करीब 1 करोड़ रुपये प्रति महीने का आ रहा है। निगरानी को लेकर सिटी बस योजना के प्रभारी प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक आर के शर्मा का कहना है कि ऐप परिवहन निगम को बनवाना है। निगम को ऐप के लिए पत्र भेज दिया गया है।
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ऐप से यात्रियों को रूट और बस की मौजूदा स्थिति की जानकारी मिलेगी
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि ऐप से सभी बसों की संचालन की निगरानी प्राधिकरण कर सकेगा। इसके साथ ही यात्रियों के लिए इसे उपयोगी बनाने के लिए कहा गया है। ऐप में यात्रियों को सिटी बस के रूट, रूट पर आने-जाने वाली बसों की मौजूदा स्थिति की वास्तविक जानकारी उपलब्ध करवाई जाएगी।
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