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Noida News: उद्यमियों ने बिजली की कमी और लाइसेंस की जटिलता का उठाया मुद्दा

Sun, 21 Sep 2025 01:01 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:01 AM IST
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Entrepreneurs raised the issue of power shortage and complexity of licensing.
एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों ने प्रशासन के सामने रखी समस्याएं
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। अमर उजाला एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में शहर के उद्योगपतियों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। कार्यक्रम में बिजली की अनियमित आपूर्ति, फैक्ट्री और फायर लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया, जल संचयन और सरकारी नीतियों के धरातल पर अमल को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।

उद्योगपतियों ने कहा कि बिजली की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। कई छोटी इकाइयों के पास जेनसेट नहीं हैं और जगह की कमी के कारण लगा भी नहीं सकते। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में त्वरित कार्रवाई की मांग की। वहीं, सरकार की ओर से बनाई गई नीतियों का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। नगर निगम, इंडस्ट्री विभाग और बिजली विभाग के निचले स्तर के अधिकारी अपेक्षित कार्य नहीं कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि उच्च अधिकारी इस स्थिति में सुधार लाएं।
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केवल 10 प्रतिशत उद्योगों के पास ही फैक्ट्री लाइसेंस है। उन्होंने फायर लाइसेंस की प्रक्रिया को भी बेहद जटिल बताया और सुझाव दिया कि यदि उद्योग में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, तो लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि बीते दस वर्षों में कई विकास कार्य हुए हैं और उद्योगों को इससे फायदा हुआ है। इस वर्ष अधिक वर्षा हुई है, ऐसे में यदि प्रशासन जल संचयन के उपाय करे तो उद्योगों को भी इससे लाभ होगा। ऐसे ही कई और पहलू हैं, जिन पर यदि काम किया जाए तो सभी को इसका फायदा होगा। उद्योगपतियों की सामूहिक मांग है कि उद्योग पंजीकरण की प्रक्रिया जिला स्तर पर की जाए, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिल सके। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों ने उद्योगपतियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। हालांकि, इन्हीं चीजों पर पलटवार करते हुए नगर निगम आयुक्त धीरेन्द्र खड़गटा ने कहा कि कई कारखाने रिहायशी जगहों पर हैं। जहां पर अक्सर मशीनों के शोर और उनसे निकल रहे कचरे की बदबू से आम लोगों की शिकायतें आती रहती हैं। उन्हें किसी दूसरी जगह पर बनाने की आवश्यकता है।
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फैक्टरी संचालन के लिए लाइसेंस की व्यवस्था जिला स्तर पर हो। कई छोटी इकाइयां भी हैं, जिन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। सरकार को इस दिशा में विचार कर सुधार करना चाहिए। - वीरभान शर्मा, अध्यक्ष, आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
अधिकतर उद्योगपति बाटा फ्लाईओवर से निकलते हैं, लेकिन सड़क खराब होने से घंटों जाम में फंसे रहना पड़ता है। जिन लोगों के पास जेनसेट नहीं है, उनको दिक्कत होती है और उत्पादन प्रभावित होता है। --
डॉ. गुरनाम सिंह विरदी, उपाध्यक्ष, फरीदाबाद स्मॉल इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
जब तक प्रशासन की ओर से बनाई गई नीतियां धरातल पर नहीं लागू होंगी तब तक उद्योगपतियों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जीएसटी और कंप्यूटर प्रणाली के बाद उद्योगों को काफी लाभ पहुंचा है। इससे कई चीजें आसान हुई हैं। -
जितेंद्र शाह, अध्यक्ष सरूरपुर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन


हम भाग्यशाली हैं कि भारत स्टार्टअप इकोसिस्टम के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है। एमएसएमई और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा पद्धति पर भी काम किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को शुरुआत से ही व्यापार की तकनीक भी सिखाई जानी चाहिए। -

पुष्पेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, मैन्यूफेक्चर्स एसोसिएशन फरीदाबाद





किसी उद्योग को चलाने के लिए बिजली और पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। जीवन नगर में हजारों छोटे- बड़े उद्योग हैं, लेकिन पानी, बिजली, सड़क और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझना पड़ता है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। -
नरेश राव, महासचिव, सोहना रोड स्क्रैप मार्केट एसोसिएशन
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