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सरकार के खिलाफ कर्मचारियों का प्रदर्शन
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नूंह। जिले के 15 विभागों के सैकड़ों कर्मचारियों ने रविवार को सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर नूंह के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से गांधी पार्क तक जुलूस निकालकर हल्ला बोल प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन की अध्यक्षता सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान तैय्यब हुसैन ने की। संचालन जिला सचिव योगराज दीक्षित ने किया।
इस दौरान मेवात मॉडल स्कूल एंपलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव निसार अहमद व वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने विद्यालयों को शिक्षा विभाग में समायोजित करवाने के लिए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा का धन्यवाद किया और अनुबंधित कर्मचारियों को पक्का करने व कोविड संक्रमण से कर्मचारियों की मौत होने से उनके आश्रितों को नौकरी देने की मांग की। जिला सचिव योगराज दीक्षित ने कहा कि हल्ला बोल प्रदर्शन में मुख्य मांगों को उठाया गया, जिनमें ठेका प्रथा समाप्त कर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पक्का होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने, एनपीएस रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली, केंद्र सरकार की तर्ज पर सरकारी अंशदान 10 से बढ़कर 14 प्रतिशत करने, रिटायरमेंट पर मेडिकल भत्ता और मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति का भुगतान करने, लिपिक को पे-मैट्रिक्स लेवल-6 में 35400 वेतन देने, 18 महीने के डीए एरियर का भुगतान करने, एचआरए के स्लैब में बदलाव कर 9-18-27 करने, जनवरी, 2020 से जून 2021 के बीच सेवानिवृत्त कर्मियों के लीव एनकेशमेंट व ग्रेच्युटी की पुर्नगणना करते हुए अंतर का भुगतान करने आदि मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान तय्यब हुसैन ने कर्मचारियों को संबोधित कर कहा कि नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के चलते अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने एक कार्यकारी आदेश से जनवरी, 2004 से पुरानी परिभाषित पेंशन स्कीम खत्म कर नए कर्मचारियों पर एनपीएस थोप दी थी। हरियाणा में एनपीएस जनवरी, 2006 से लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा व कांग्रेस ने मिलकर यूपीए-2 के कार्यकाल में संसद में पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) विधेयक पास कर एनपीएस लागू की थी। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत कर्मचारियों के मूल वेतन का दस प्रतिशत हिस्सा कटौती किया जाता है और इतना ही राशि सरकार द्वारा जमा करवाया जाता है। रिटायरमेंट पर जमा हुई कुल राशि का 40 प्रतिशत नकद और बाकी 60 प्रतिशत राशि को शेयर मार्केट में निवेश किया जाता है। इसके लिए बकायदा फंड मैनेजर नियुक्त किया गया है। शेयर मार्केट के उतार चढ़ाव से पेंशन का निर्धारण होता है, जो एक हजार से तीन हजार के बीच ही होती है। इससे कर्मचारी का परिवार गुजर बसर नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का भी यह कथन है कि पेंशन कोई खैरात व उपहार नहीं है बल्कि कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में जीवन का दिया गया बहुमूल्य समय के बदले बुढ़ापे का सहारा है। उन्होंने कहा कि एनपीएस के विरोध मे कर्मियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आक्रोश को देखते हुए ही सातवें वेतन आयोग ने भी एनपीएस को समाप्त कर कोई अन्य बेहतर पेंशन स्कीम लागू करने की सिफारिश की थी, किंतु केंद्र सरकार ने इसे अनदेखा कर दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने एनपीएस में कुछ संशोधन कर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पुरानी पेंशन बहाली व ठेका प्रथा समाप्त कर कच्चे कर्मियों को पक्का नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में एएचपीसी वर्कर यूनियन राज्य सचिव सामून खान, नल्हड़ मेडिकल कॉलेज से जितेंद्र गुलिया, संदीप देशवाल, ओमबीर, विजय कुमार व राजबीर सिंह, जन स्वास्थ्य विभाग से लिखी राम सचिव अख्तर हुसैन, अध्यापक संघ के जिला प्रधान फूल कुमार व जिला सचिव अरशद हुसैन, नगर पालिका से सुभाष व खंड प्रधान असलम व बनवारी लाल, अब्बास आदि मौजूद थे। इस मौके पर बिजली विभाग से प्रधान देवेंद्र सिंह, राहुल दीक्षित, वेद प्रकाश, लियाकत अली, सुभाष, फिरोजपुर झिरका से ब्लॉक प्रधान बनवारी सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
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इस दौरान मेवात मॉडल स्कूल एंपलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव निसार अहमद व वरिष्ठ उपाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने विद्यालयों को शिक्षा विभाग में समायोजित करवाने के लिए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा का धन्यवाद किया और अनुबंधित कर्मचारियों को पक्का करने व कोविड संक्रमण से कर्मचारियों की मौत होने से उनके आश्रितों को नौकरी देने की मांग की। जिला सचिव योगराज दीक्षित ने कहा कि हल्ला बोल प्रदर्शन में मुख्य मांगों को उठाया गया, जिनमें ठेका प्रथा समाप्त कर सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, पक्का होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने, एनपीएस रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली, केंद्र सरकार की तर्ज पर सरकारी अंशदान 10 से बढ़कर 14 प्रतिशत करने, रिटायरमेंट पर मेडिकल भत्ता और मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति का भुगतान करने, लिपिक को पे-मैट्रिक्स लेवल-6 में 35400 वेतन देने, 18 महीने के डीए एरियर का भुगतान करने, एचआरए के स्लैब में बदलाव कर 9-18-27 करने, जनवरी, 2020 से जून 2021 के बीच सेवानिवृत्त कर्मियों के लीव एनकेशमेंट व ग्रेच्युटी की पुर्नगणना करते हुए अंतर का भुगतान करने आदि मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान तय्यब हुसैन ने कर्मचारियों को संबोधित कर कहा कि नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के चलते अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने एक कार्यकारी आदेश से जनवरी, 2004 से पुरानी परिभाषित पेंशन स्कीम खत्म कर नए कर्मचारियों पर एनपीएस थोप दी थी। हरियाणा में एनपीएस जनवरी, 2006 से लागू की गई थी। उन्होंने कहा कि भाजपा व कांग्रेस ने मिलकर यूपीए-2 के कार्यकाल में संसद में पेंशन फंड रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) विधेयक पास कर एनपीएस लागू की थी। उन्होंने कहा कि इस स्कीम के तहत कर्मचारियों के मूल वेतन का दस प्रतिशत हिस्सा कटौती किया जाता है और इतना ही राशि सरकार द्वारा जमा करवाया जाता है। रिटायरमेंट पर जमा हुई कुल राशि का 40 प्रतिशत नकद और बाकी 60 प्रतिशत राशि को शेयर मार्केट में निवेश किया जाता है। इसके लिए बकायदा फंड मैनेजर नियुक्त किया गया है। शेयर मार्केट के उतार चढ़ाव से पेंशन का निर्धारण होता है, जो एक हजार से तीन हजार के बीच ही होती है। इससे कर्मचारी का परिवार गुजर बसर नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का भी यह कथन है कि पेंशन कोई खैरात व उपहार नहीं है बल्कि कर्मचारियों द्वारा सरकारी सेवा में जीवन का दिया गया बहुमूल्य समय के बदले बुढ़ापे का सहारा है। उन्होंने कहा कि एनपीएस के विरोध मे कर्मियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस आक्रोश को देखते हुए ही सातवें वेतन आयोग ने भी एनपीएस को समाप्त कर कोई अन्य बेहतर पेंशन स्कीम लागू करने की सिफारिश की थी, किंतु केंद्र सरकार ने इसे अनदेखा कर दिया। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने एनपीएस में कुछ संशोधन कर आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पुरानी पेंशन बहाली व ठेका प्रथा समाप्त कर कच्चे कर्मियों को पक्का नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में एएचपीसी वर्कर यूनियन राज्य सचिव सामून खान, नल्हड़ मेडिकल कॉलेज से जितेंद्र गुलिया, संदीप देशवाल, ओमबीर, विजय कुमार व राजबीर सिंह, जन स्वास्थ्य विभाग से लिखी राम सचिव अख्तर हुसैन, अध्यापक संघ के जिला प्रधान फूल कुमार व जिला सचिव अरशद हुसैन, नगर पालिका से सुभाष व खंड प्रधान असलम व बनवारी लाल, अब्बास आदि मौजूद थे। इस मौके पर बिजली विभाग से प्रधान देवेंद्र सिंह, राहुल दीक्षित, वेद प्रकाश, लियाकत अली, सुभाष, फिरोजपुर झिरका से ब्लॉक प्रधान बनवारी सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
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