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लीड मौत के साए में शिक्षा: घासेड़ा स्कूल का भवन जर्जर, खतरे में बच्चों की जान

Sun, 25 Jan 2026 10:34 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 10:34 PM IST
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Education under the shadow of death: Ghaseda school building in dilapidated condition
क्रासर
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-स्कूल की दीवारें जर्जर, कक्षाओं का लिंटर भी जगह जगह से क्षतिग्रस्त
-स्कूल में पढ़ने वाले 1000 से ज्यादा बच्चों की जान को खतरा
- हर दिन डर के साये में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे व शिक्षक
रिजवान खान
नूंह।
घासेड़ा गांव का राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल आज शिक्षा का मंदिर कम और खतरे का केंद्र अधिक बन चुका है। यहां पढ़ने वाले एक हजार से अधिक छात्र हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल का भवन इस कदर जर्जर हो चुका है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक खामोश बने हुए हैं।

स्कूल भवन की हालत बेहद भयावह है। कक्षाओं के लिंटर जगह-जगह से टूट चुके हैं, छत से लोहे के सरिये बाहर झांक रहे हैं और दीवारों में गहरी दरारें साफ दिखाई देती हैं। कई कमरों की छत से प्लास्टर झड़ चुका है, जिससे हर समय मलबा गिरने का खतरा बना रहता है। बच्चों के सामने सवाल है कि किताब पर ध्यान दें या छत से गिरने वाले खतरे पर।
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कमरों की कमी, खुले में पढ़ाई को मजबूर छात्र
स्कूल स्टाफ के अनुसार कक्षा 6 से 12वीं तक कुल 1010 विद्यार्थी यहां अध्ययनरत हैं। स्कूल प्रिंसिपल सुनीता ने बताया कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल में कुल 11 कमरे हैं, जिनमें से अधिकतर जर्जर हालत में हैं। कमरों की कमी और असुरक्षा के चलते कई बार बच्चों को बरामदे या खुले प्रांगण में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। गर्मी, सर्दी और बारिश—हर मौसम में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
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- प्राइमरी सेक्शन की हालत भी चिंताजनक
स्कूल परिसर में प्राइमरी सेक्शन के लिए केवल 10 कमरे हैं, जिनकी स्थिति भी बेहद खराब है। शिक्षक बच्चों को पढ़ाते समय लगातार छत और दीवारों पर नजर बनाए रखते हैं। उनका कहना है कि वे रोज़ भय के माहौल में ड्यूटी करते हैं, क्योंकि किसी भी समय अनहोनी हो सकती है।

अधिकारियों को दी गई जानकारी, फिर भी इंतज़ार
स्कूल प्रशासन और स्टाफ ने कई बार उच्च अधिकारियों को भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया है। आश्वासन तो मिले, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जैसे ही मरम्मत या नए भवन को लेकर कोई निर्देश मिलेगा, उसी अनुसार कार्य किया जाएगा।

वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी अचानक लिंटर टूटकर गिरने लगा। गनीमत रही कि बच्चे समय रहते बाहर निकल गए। कुछ सेकेंड की देरी बड़ा हादसा बन सकती थी।

ग्रामीणों का गुस्सा, प्रशासन से सीधी मांग
स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष है। उनका कहना है कि बच्चों को शिक्षा के नाम पर मौत के साए में बैठाया जा रहा है। कई बार अधिकारियों को स्थिति बताई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों और अभिभावकों की साफ मांग है कि स्कूल भवन की तत्काल मरम्मत या नया भवन बनाया जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकें।


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स्कूल में जर्जर कमरे होने के कारण बच्चों को दो शिफ्ट में पढ़ाया जा रहा है। जर्जर भवन की मरम्मत या नया भवन बनाने की मांग कई बार की जा चुकी है। अधिकारियों की तरफ से आदेश मिलने पर आगे काम कराया जाएगा।

सुनीता, स्कूल प्रिंसिपल।
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