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प्रत्याशियों के करीबी कर रहे चुनावी दावत का ई-भुगतान, प्रशासन अनजान

Sun, 06 Feb 2022 01:18 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 01:18 AM IST
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E-payment of election feast is being done close to the candidates, the administration is unaware
ग्रेटर नोएडा। चुनाव आयोग की सख्ती बढ़ने के साथ ही चुनावी दावत के इंतजाम की व्यवस्था में भी बदलाव आ रहा है। चुनाव प्रचार ही नहीं बल्कि अब खाने-पीने का इंतजाम और भुगतान भी डिजिटल ढंग से हो रहा है। एक दशक पहले प्रत्याशियों के कार्यालय या उसके आसपास का कोई स्थान होटल या ढाबे में तब्दील हो जाता था। फिर पर्चियों का खेल चलने लगा। हस्तलिखित पर्चियां होटलों और ढाबे आदि पर देकर समर्थक भरपेट खाना खाते थे, लेकिन इस बार इन पर्चियों की जगह पेटीएम, फोनपे आदि ने ले ली है। इसकी जिम्मेदारी प्रत्याशियों ने अपने करीबियों को दे रखी है, ताकि उनका आयोग की नजर में उनका चुनावी खर्च नहीं बढ़े। ई-भुगतान से वह खाने-पीने पर हो रहे खर्च को प्रशासन की नजरों से बचाने में कामयाब हो रहे हैं।
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प्रत्येक चुनाव में प्रत्याशी के साथ बड़ी संख्या में ऐसे समर्थक होते हैं, जो दिन-रात उनके लिए प्रचार में जुटे रहते हैं। ये समर्थक प्रत्याशी के साथ और अकेले गांव-गांव घूमते हैं। ऐसे में उनके दिन और रात के खाने की व्यवस्था प्रत्याशी या करीबी कराते हैं। प्रत्याशियों के समर्थकों ने बताया कि एक दशक पहले टिकट की घोषणा होने के बाद प्रत्याशी कार्यालय के पास ही हलवाई व कैटर्स को बुलाकर खाने-पीने का बंदोबस्त करते थे। यहां न केवल कार्यालयों पर आने वाले व प्रचार के लिए जाने वाले लोगों के लिए बंदोबस्त होता था। आलम यह था कि प्रत्याशियों के कार्यालय होटल और ढाबे जैसे प्रतीत होने लगते थे। समर्थकों के पहुंचते ही चाय-पानी के अलावा दोपहर में लंच और दिन ढलते ही डिनर का प्रबंध रहता था, लेकिन जैसे ही चुनाव आयोग ने सख्ती की तो प्रत्याशियों ने भी इस प्रक्रिया को पहले कम किया और फिर पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद किसी होटल-ढाबे से संपर्क कर पर्चियां देकर समर्थकों के लिए भोजन आदि का प्रबंध किया गया। इस बार यह व्यवस्था भी नदारद है।
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किसी भी होटल-ढाबे में खाने की छूट
इस बार तो प्रत्याशी के करीबी समर्थकों को किसी भी होटल-ढाबे में खाने की छूट दे रहे हैं। इससे यह फायदा होता है कि उन्हें दिन में चुनाव प्रचार को छोड़कर कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वह रास्ते में किसी भी होटल व ढाबे पर खाना खा लेते हैं। इसके बाद प्रत्याशी या उसका करीबी होटल व ढाबे संचालक के ई-वॉलेट में भुगतान कर देता है। कुछ समर्थकों को ऑनलाइन खाना मंगाने की भी छूट दी गई है। वह किसी भी होटल से ऑनलाइन पसंद का खाना मंगाकर खा सकते हैं। कार्यालयों पर भी कई लोगों के लिए इसी तरह खाना मंगाया जा रहा है। वहीं, कुछ लोगों को बाजार से शराब खरीदने की भी छूट दी गई है। इसका भी ई-भुगतान किया जा रहा है।
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