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Noida News: बजट के अभाव में चार साल से बंद है पुल का कार्य

Sat, 06 Sep 2025 12:02 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा Updated Sat, 06 Sep 2025 12:02 AM IST
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Due to lack of budget the work of the bridge has been stopped for four years
फोटो24- भूरागढ़ के पास अधूरा पड़ा नरैनी-महोबा बाइपास पुल। संवाद
बांदा। बसपा सरकार में स्वीकृत हुए रिंग रोड पर नरैनी-महोबा (हाईवे) को जोड़ने के लिए केन नदी पर करीब 12 सालों से पुल बनाया जा रहा है। इस पुल को साल 2022 में बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन बजट के अभाव में साल 2021 से पुल का निर्माण कार्य बंद है। पुल के समय से पूरा नहीं होने से इसकी लागत 64.57 करोड़ रुपये बढ़ गई है। समय से बजट मिल गया होता तो रिंग रोड अब तक चालू हो गया होता। इससे शहर में जाम से राहत मिल गई जाती।
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वर्ष 2011-12 में बसपा सरकार के लोक निर्माण विभाग के मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शहर के चारों ओर रिंग रोड की स्वीकृति दी थी। इसका मकसद था कि जनपद से निकलने वाले वाहन शहर में दाखिल न हों, ताकि शहर में जाम की स्थिति न बने। रिंग रोड को नरैनी रोड बाईपास से महोबा रोड (एनएच-35) को जोड़ने के लिए केन नदी पर पुल बनाया जाना था। इसकी स्वीकृति मिल गई थी। तब इसकी लागत 23.17 करोड़ रुपये थी।
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पहली किस्त 10 करोड़ रुपये मिलने के साथ निर्माण शुरू हो गया था। पुल में कुल 16 जोड़ी पिलर बनने हैं। 10 जोड़ी पिलर बनकर तैयार हैं और तीन अधूरे हैं। बजट के अभाव में पुल का काम चार साल से बंद है। कार्यदायी संस्था सेतु निर्माण निगम ने मार्च 2024 में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय लखनऊ को 87.74 करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट प्रस्ताव भेजा है। अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिली है। उधर, अधूरे पुल के अधिकांश हिस्से में कंटीली झाड़ियां उग आई हैं।
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10 किलोमीटर दूरी की होती बचत

बाईपास पुल बनने पर नरैनी व महोबा रोड से आने वाले वाहनों को करीब 10 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। अभी वाहन शहर से होकर गुजर रहे हैं। शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। आए दिन जाम लगता रहता है।
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चार गुना हो गई पुल की लागत

समय से बजट नहीं मिलने से लागत चार गुना से अधिक हो गई है। बजट के लिए कई बार पत्राचार किया गया है। मार्च 2024 को शासन को 87.74 करोड़ का पुनरीक्षित बजट भेजा है।
- सीपी दिवाकर, उप-परियोजना प्रबंधक, सेतु निगम
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नरैनी-महोबा को जोड़ने वाला देश का पहला रिंग रोड पास कराया था। इसी के लिए केन नदी पर पुल बनाया जाना था। लखनऊ का रिंग इसके बाद मंजूर हुआ और बन गया जबकि बांदा का अभी तक नहीं बन पाया। राजनीतिक दुर्भावना के चलते बसपा के बाद की सरकारों ने पुल के लिए बजट नहीं दिया। इस वजह से पुल अधूरा पड़ा है। पुल बन जाता तो शहर को जाम से मुक्ति मिल जाती।

-नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
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मैं पहली बार सांसद बनी हूं। मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। इस मामले को संसद में उठाऊंगी। पूर्व के सांसद व विधायकों को भी ध्यान देना चाहिए था। इससे जाम की समस्या खत्म होगी।
-कृष्णा पटेल, सांसद बांदा
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कुल स्वीकत लागत- 23.17 करोड़
- पुनरीक्षित लागत- 87.74 करोड़
- मिली धनराशि- 10 करोड़ रुपये
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