{"_id":"612e8db88ebc3e887a34c9b7","slug":"du-to-commence-fyup-from-next-session-noida-news-noi6020644132","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीयू में 2022-23 के शैक्षिक सत्र से शुरू होगा चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीयू में 2022-23 के शैक्षिक सत्र से शुरू होगा चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम
विज्ञापन
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने मंगलवार को हुई कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में देर शाम चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम और नई शिक्षा नीति (एनईपी) को मंजूरी दे दी। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम 2022-23 के शैक्षिक सत्र से शुरू कर दिया जाएगा।
डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने कहा कि एनईपी को 2022-23 सत्र से लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यों ने इसका विरोध भी किया। उन्होंने बताया कि एनईपी और चार वर्षीय पाठ्यक्रम को शैक्षिक मामलों की स्थाई समिति और शैक्षणिक परिषद ने गत सप्ताह अपनी मंजूरी दे दी थी।
बैठक में मल्टीपल इंट्री और एक्जिट (एमईईएस) के साथ ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) को मंजूरी दे दी गई। एमईईएस के तहत छात्रों के पास अपनी पढ़ाई किसी भी स्तर पर छोड़कर दोबारा शुरू करने का विकल्प उपलब्ध होगा। कार्यकारी परिषद ने एमईईएस और एबीसी को मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
ईसी सदस्य और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार आपत्ति के बाद भी एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को पास कर दिया गया। स्नातक प्रोग्राम के गुण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं हैं। यदि पहले से ही छात्र तीन वर्ष के प्रोग्राम में सब कुछ पढ़ रहे हैं तो चार वर्ष का भार छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है।
दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों का फंड जारी नहीं किए जाने का मुद्दा बैठक में गरमाया। परिषद के सदस्यों ने कॉलेजों को जल्द से जल्द फंड जारी करने की मांग की। सदस्यों की ओर से कहा गया कि सभी सदस्यों को इस मामले में उपराज्यपाल से बात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करनी चाहिए।
दरअसल इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार फंड जारी करती है। फंड जारी नहीं होने से शिक्षक और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं मिल रहा है। इससे उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
शून्य काल में इसके अलावा तदर्थ शिक्षकों के समायोजन और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 5 दिसंबर को जारी पत्र पर सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग की।
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने एनईपी लागू करने के विरोध में ऑनलाइन तरीके से अपना विरोध जताया। डूटा ने एनईपी को लागू करने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया। हैशटैग रिजेक्ट एनईपी का प्रयोग करते हुए शिक्षकों और छात्रों ने ट्विटर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई।
डूटा अध्यक्ष राजीव राय के अनुसार इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालयों का दखल बढ़ जाएगा और वर्तमान में चल रहे शैक्षणिक संस्थान कमजोर होंगे।
विज्ञापन
डीयू के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने कहा कि एनईपी को 2022-23 सत्र से लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यों ने इसका विरोध भी किया। उन्होंने बताया कि एनईपी और चार वर्षीय पाठ्यक्रम को शैक्षिक मामलों की स्थाई समिति और शैक्षणिक परिषद ने गत सप्ताह अपनी मंजूरी दे दी थी।
विज्ञापन
बैठक में मल्टीपल इंट्री और एक्जिट (एमईईएस) के साथ ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) को मंजूरी दे दी गई। एमईईएस के तहत छात्रों के पास अपनी पढ़ाई किसी भी स्तर पर छोड़कर दोबारा शुरू करने का विकल्प उपलब्ध होगा। कार्यकारी परिषद ने एमईईएस और एबीसी को मंजूरी दे दी है।
विज्ञापन
ईसी सदस्य और अधिवक्ता अशोक अग्रवाल के अनुसार आपत्ति के बाद भी एनईपी 2020 के कार्यान्वयन को पास कर दिया गया। स्नातक प्रोग्राम के गुण बिलकुल भी स्पष्ट नहीं हैं। यदि पहले से ही छात्र तीन वर्ष के प्रोग्राम में सब कुछ पढ़ रहे हैं तो चार वर्ष का भार छात्रों पर क्यों डाला जा रहा है।
दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों का फंड जारी नहीं किए जाने का मुद्दा बैठक में गरमाया। परिषद के सदस्यों ने कॉलेजों को जल्द से जल्द फंड जारी करने की मांग की। सदस्यों की ओर से कहा गया कि सभी सदस्यों को इस मामले में उपराज्यपाल से बात कर उनसे हस्तक्षेप की मांग करनी चाहिए।
दरअसल इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार फंड जारी करती है। फंड जारी नहीं होने से शिक्षक और अन्य स्टाफ को वेतन नहीं मिल रहा है। इससे उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
शून्य काल में इसके अलावा तदर्थ शिक्षकों के समायोजन और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 5 दिसंबर को जारी पत्र पर सदस्यों ने चर्चा कराने की मांग की।
वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) ने एनईपी लागू करने के विरोध में ऑनलाइन तरीके से अपना विरोध जताया। डूटा ने एनईपी को लागू करने को लेकर सोशल मीडिया पर विरोध जताया। हैशटैग रिजेक्ट एनईपी का प्रयोग करते हुए शिक्षकों और छात्रों ने ट्विटर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई।
डूटा अध्यक्ष राजीव राय के अनुसार इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी विश्वविद्यालयों का दखल बढ़ जाएगा और वर्तमान में चल रहे शैक्षणिक संस्थान कमजोर होंगे।