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डीयू : पीएचडी के लिए देना होगा सीयूईटी

Fri, 09 Jun 2023 09:19 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jun 2023 09:19 PM IST
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DU: CUET will have to be given for PhD
कार्यकारी परिषद की बैठक में कई प्रस्तावों की मंजूरी
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03 : प्रोग्राम शुरू होंगे बीटेक के
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में पीएचडी में प्रवेश लेने के लिए अब छात्रों को स्नातक व स्नातकोत्तर की तरह सीयूईटी देना होगा। इसके बाद ही छात्र पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। शुक्रवार को कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक में बीटेक के तीन प्रोग्राम शुरू करने समेत कई प्रस्तावों की मंजूरी दे दी गई।
शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए पीएचडी में प्रवेश परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय आधारित सीयूईटी (पीएचडी)-2023 के माध्यम से होगा। हालांकि, इसमें डीयू में सेवारत शिक्षक और गैर-शिक्षण वर्ग सीधे साक्षात्कार के लिए शामिल हो सकते हैं। कर्मचारियों को कार्यालय समय के दौरान निर्धारित कार्यों को प्रभावित किए बिना कक्षाओं में भाग लेने और परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।
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इसके अलावा शैक्षणिक सत्र 2023-24 के स्नातक एमबीबीएस-बीडीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए चिकित्सा विज्ञान पाठ्यक्रम प्रवेश समिति (एमसीएसी) की पात्रता शर्त और सीट मैट्रिक्स की सिफारिशें भी ईसी में मंजूरी कर ली गई। वहीं, एमएससी रेस्पिरेटरी थेरेपी प्रोग्राम में प्रवेश भी सीयूईटी के तहत होगा।
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डीयू के कन्वेंशन हॉल में रात तक चली बैठक में अधिकतर वे प्रस्ताव शामिल हैं, जिन्हें अकादमिक परिषद (एसी) की बैठक में पास किए गए थे। अकादमिक परिषद की स्थायी समिति की सिफारिश के आधार पर स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के एडमिशन से संबंधित विभिन्न मामलों पर विचार-विमर्श के उपरांत उन्हें भी कार्यकारी परिषद द्वारा स्वीकार किया गया है। इसके साथ ही शैक्षणिक सत्र 2023-24 से एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) पाठ्यक्रम को भी मंजूरी मिल गई है। यह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चार वर्षीय कोर्स होगा। डीयू का शिक्षा विभाग और बीएलएड पाठ्यक्रम चलाने वाले आठ कॉलेज आईटीईपी पाठ्यक्रम के लिए शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए आवेदन करेंगे। इसके साथ ही एलएलबी के दो नए पाठ्यक्रम को भी शुरु किया जाएगा। इसकी सालाना फीस दो लाख 16 हजार रुपये के आसपास होगी। वहीं, स्नातक में विनायक दामोदर वीर सावरकर को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला लिया है। जिससे छात्र अब वीर सावरकर को पढ़ेंगे।


360 छात्रों के साथ शुरू होगा बीटेक पाठ्यक्रम



प्रौद्योगिकी संकाय के वर्तमान विभागों के तहत कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोग्राम बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के संचालन के लिए गठित समिति को भी ईसी की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई। डीयू को शिक्षा मंत्रालय द्वारा अपने प्रौद्योगिकी संकाय के लिए 72 शिक्षण व 48 गैर शिक्षण पदों के सृजन हेतु स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। फिलहाल इन विभागों के तहत 14 शिक्षकों की नियुक्तियां ही की जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2023-24 से तीन बीटेक प्रोग्राम शुरू करने की सिफारिश की है। इनके तहत कुल 360 विद्यार्थियों को दाखिला दिया जाएगा। जिनमें प्रत्येक बीटेक प्रोग्राम के लिए 120 छात्र होंगे। इन प्रोग्रामों के लिए प्रवेश जेईई मेन्स स्कोर के आधार पर दिया जाएगा। प्रोग्रामों के पहले दो सेमेस्टर की पाठ्यक्रम संरचना, क्रेडिट वितरण और पाठ्यक्रम तैयार हो चुके हैं।


स्वतंत्रता और विभाजन अध्ययन केंद्र होंगे स्थापित



डीयू में स्वतंत्रता और विभाजन अध्ययन केंद्र को स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृत कर लिया गया। इस केंद्र की ओर से शोध के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के ऐसे अज्ञात नायकों और घटनाओं पर भी काम होगा, जिन्हें इतिहास में अभी तक स्थान नहीं मिला है। इसके साथ ही भारत विभाजन की त्रासदी के दौरान की घटनाओं पर भी गहनता से अध्ययन एवं शोध होगा। इसके अलावा जनजातीय अध्ययन केंद्र के गठन को भी मंजूरी मिल गई है। यह एक बहु-अनुशासनात्मक केंद्र होगा, इसमें देश की विभिन्न जनजातियों पर अध्ययन किया जाएगा। उपरोक्त के अतिरिक्त हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना को भी ईसी की बैठक में पारित कर दिया गया। हिंदू अध्ययन केंद्र के तहत हिंदू अध्ययन में मास्टर ऑफ आर्ट्स प्रोग्राम शुरू किया जाएगा।

खेल कोटा में एक फीसदी सीट आरक्षित



विश्वविद्यालय ने कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश संबंधी प्रक्रिया में बढ़ा बदलाव किया है। खेल और पाठ्येतर गतिविधियों (ईसीए) के कोटे से कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए अब एक फीसदी ही सीटें आवंटित होंगी। पहले छात्रों को पांच प्रतिशत तक सीटों पर प्रवेश दिया जा रहा था। शेष चार प्रतिशत सीटों पर कॉलेज निर्णय लेंगे। ईसी ने अकादमी परिषद की बैठक का फैसला पलट दिया है। जिसमें पहले ढाई फीसदी सीटों को आवंटित करने का फैसला लिया गया था। ऐसे में खेल कोटे में सीटें को कम करने को लेकर कई शिक्षकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि खेल कोटे में 10 फीसदी को कम कर पांच किया गया था उसमें में अब एक फीसदी सीटें ही कर दी गई है।


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वर्जन


बैठक में अगले 25 वर्षों के लिए विचार विमर्श पेश किया गया है। इसमें कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई और उन्हें पारित किया गया। देश के लिए अगले 25 वर्ष बहुत महत्वपूर्ण हैं। -प्रो. योगेश सिंह, कुलपति, डीयू
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