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Noida News: पश्चिम एशिया युद्ध का असर अब शिपमेंट के कंटेनर पर, महंगा हुआ निर्यात
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फोटो -- -- -
-दोगुना चुकानी पड़ेगी कीमत
-अपने उत्पाद निर्यात करने के लिए निर्यातकों को उठाना पड़ेगा नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिम एशिया में मची उथल पुथल के चलते बाधित हुई हार्मुज जलडमरूमध्य मार्ग ने समुद्री व्यापार को प्रभावित कर दिया है। फिलहाल टैंकरों की आवाजाही ठप होने से सीधा असर शिपमेंट के कंटेनर पर पड़ा है। इसके चलते अब शहर के निर्यातकों को नुकसान उठाकर अपने उत्पाद को निर्यात करना पड़ेगा।
एनईए के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि पश्चिम एशिया में मची उथल पुथल के बीच ईरान की ओर से हार्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद कर देने से अब शिपिंग कंपनियों ने रास्ते में बदलाव किया है। इन रास्तों में अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का रास्ता शामिल है, जो कि हार्मुज लाइन से काफी लंबा है, जिससे ट्रांजिट यानी आवागमन का समय 12-15 दिनों तक बढ़ गया है। यही कारण है कि शिपमेंट के कंटेनर कंपनियों की ओर से महंगे कर दिए गए हैं। निर्यातक अभय कुमार के अनुसार, जहां युद्ध से पहले तक कंटेनर का किराया 1200 डॉलर (1.10 लाख रुपये) लगता था वहां अब 2400 डॉलर (2.20 लाख रुपये प्रति कंटेनर तक किराया पहुंच गया है। एशिया-यूरोप और अन्य रूटों पर स्पॉट रेट में 30-50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि खाड़ी समेत उन्हीं रूट से जाने वाले मार्गों में 150 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है।
टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल प्रभावित : निर्यातक दीप भूटानी के अनुसार, हार्मुज लाइन ईरान की ओर बंद कर देने की वजह से सबसे ज्यादा असर कच्चे माल, खनिज पदार्थों पर पड़ा है। यही कारण है कि उद्योग में उपयोग आने वाले कच्चा माल, खनिज तेल समेत अन्य कारकों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके चलते शहर की टेक्सटाइल उद्योग, ऑटोमोबाइल और प्लास्टिक समेत अन्य उद्योग पर भी पड़ा है।
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शहर के निर्यातकों को हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के रूकने के कारण शिपमेंट के बढ़े चार्ज देने पड़ेंगें, जिसका असर सीधा निर्यातकों पर पड़ेगा। -राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
निर्यात प्रभावित होगा, वैश्विक उथल पुथल के कारण शिपमेंट के कंटेनर महंगे हुए हैं।
-सुधीर श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एनईए
हमारे उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे, प्रोफिट मार्जन में भी इसका सीधा असर पड़ेगा. इसके कारण नुकसान भी संभव है। -राकेश कपूर, विशेष अपैरल,
आगामी दिनों में यह समस्या और भी बढ़ेगी, क्योंकि शिपमेंट पहुंचने में भी देरी होने लगी है, युद्ध लंबा चला तो नुकसान भी भारी उठाना पड़ेगा।
-अभय कुमार, निर्यातक
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-दोगुना चुकानी पड़ेगी कीमत
-अपने उत्पाद निर्यात करने के लिए निर्यातकों को उठाना पड़ेगा नुकसान
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। पश्चिम एशिया में मची उथल पुथल के चलते बाधित हुई हार्मुज जलडमरूमध्य मार्ग ने समुद्री व्यापार को प्रभावित कर दिया है। फिलहाल टैंकरों की आवाजाही ठप होने से सीधा असर शिपमेंट के कंटेनर पर पड़ा है। इसके चलते अब शहर के निर्यातकों को नुकसान उठाकर अपने उत्पाद को निर्यात करना पड़ेगा।
एनईए के उपाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि पश्चिम एशिया में मची उथल पुथल के बीच ईरान की ओर से हार्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद कर देने से अब शिपिंग कंपनियों ने रास्ते में बदलाव किया है। इन रास्तों में अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का रास्ता शामिल है, जो कि हार्मुज लाइन से काफी लंबा है, जिससे ट्रांजिट यानी आवागमन का समय 12-15 दिनों तक बढ़ गया है। यही कारण है कि शिपमेंट के कंटेनर कंपनियों की ओर से महंगे कर दिए गए हैं। निर्यातक अभय कुमार के अनुसार, जहां युद्ध से पहले तक कंटेनर का किराया 1200 डॉलर (1.10 लाख रुपये) लगता था वहां अब 2400 डॉलर (2.20 लाख रुपये प्रति कंटेनर तक किराया पहुंच गया है। एशिया-यूरोप और अन्य रूटों पर स्पॉट रेट में 30-50 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि खाड़ी समेत उन्हीं रूट से जाने वाले मार्गों में 150 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है।
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टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल प्रभावित : निर्यातक दीप भूटानी के अनुसार, हार्मुज लाइन ईरान की ओर बंद कर देने की वजह से सबसे ज्यादा असर कच्चे माल, खनिज पदार्थों पर पड़ा है। यही कारण है कि उद्योग में उपयोग आने वाले कच्चा माल, खनिज तेल समेत अन्य कारकों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसके चलते शहर की टेक्सटाइल उद्योग, ऑटोमोबाइल और प्लास्टिक समेत अन्य उद्योग पर भी पड़ा है।
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शहर के निर्यातकों को हार्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के रूकने के कारण शिपमेंट के बढ़े चार्ज देने पड़ेंगें, जिसका असर सीधा निर्यातकों पर पड़ेगा। -राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
निर्यात प्रभावित होगा, वैश्विक उथल पुथल के कारण शिपमेंट के कंटेनर महंगे हुए हैं।
-सुधीर श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष, एनईए
हमारे उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे, प्रोफिट मार्जन में भी इसका सीधा असर पड़ेगा. इसके कारण नुकसान भी संभव है। -राकेश कपूर, विशेष अपैरल,
आगामी दिनों में यह समस्या और भी बढ़ेगी, क्योंकि शिपमेंट पहुंचने में भी देरी होने लगी है, युद्ध लंबा चला तो नुकसान भी भारी उठाना पड़ेगा।
-अभय कुमार, निर्यातक