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Noida News: विदेश में भी हो रही थी मादक पदार्थ की सप्लाई
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विदेश में भी हो रही थी मादक पदार्थ की सप्लाई
बॉलीवुड में सप्लाई और टेरर एंगल से जुड़ रहे आरोपियों के तार
बॉलीवुड में सप्लाई और टेरर एंगल से जुड़ रहे आरोपियों के तार
कनाडा, अमेरिका, चीन, नेपाल में भी एमडीएमए की सप्लाई का चल रहा पता
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। जैतपुर गांव में पकड़ी गई फैक्टरी में बनाए जाने वाले मादक पदार्थ की सप्लाई कनाडा, अमेरिका, चीन और नेपाल में भी जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी यहां ड्रग्स बनाकर विदेश भेजते थे। पुलिस इनके सप्लायरों को को गिरफ्तार करने के प्रयास में लगी है।
नारकोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, एमडीएमए, कोकीन और हेरोइन जैसे मादक पदार्थों की मैन्यूफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए 70 फीसदी से अधिक मामलों में नारको टेरर से जुड़े होते हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों से ड्रग्स की सप्लाई लंबे समय से भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में होती आ रही है। पुलिस इनके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और नेटवर्क की जांच में लगी है। इससे कमाए जा रहे पैसे का उपयोग कहीं आतंकी गतिविधियों में तो उपयोग नहीं हो रहा है, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि पानी के साथ आसानी से घुल जाने वाले मेथिलेनेडियो मेथानटामाइन (एमडीएमए) का इस्तेमाल आजकल सबसे अधिक बॉलीवुड इंडस्ट्री और रेव पार्टी में हो रहा है। ड्रग फैक्ट्री से दिल्ली-एनसीआर ही नहीं मुंबई के बॉलीवुड और गोवा में सप्लाई होने के सुबूत मिल रहे हैं।
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एमडीएमए का कहां हो रहा उपयोग
पुलिस ने प्रदेश और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से भी संपर्क किया है। इससे विदेशों में इनके लिंक और नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश में लगी है। खास बात यह है कि 300 करोड़ की एमडीएमए की सप्लाई हाल में कहां होने वाली थी, ऐसे में विदेश में इसकी सप्लाई का भी पता लगाने के लिए इनके लिंक और नेटवर्क का खुलासा करने के लिए राष्ट्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से संपर्क किया जा रहा है।
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कोकीन के भी होने की संभावना
पुलिस की प्राथमिक जांच में लैब में मिले मादक पदार्थ को पुलिस एमडीएमए मानकर चल रही है। हालांकि, आशंका है कि कुछ पदार्थ कोकीन भी हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी कोकीन लगभग 500 करोड़ की हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जा रही है।
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तीन माह से लैब का पता लगाने के प्रयास में लगी थी स्वाट टीम
थीटा-दो में पिछले एक वर्ष से ड्रग्स की फैक्ट्री चल रही थी। कई बार ड्रग कार्टेल का पुलिस पता लगाने में जुटी हुई है। स्वाट टीम ड्रग्स माफिया का पिछले तीन महीने से पता लगाने की कोशिश कर रही थी। इनमें से दो आरोपियों के ड्रग्स के साथ पकड़े जाने पर पुलिस ने फैक्ट्री पर कार्रवाई की।
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क्रिप्टोकरेंसी से हुआ लेनदेन
गिरफ्तार नाइजीरियाई नागरिकों के पास से पुलिस को कोई बैंक खाता, एटीएम या फाइनेंशियल लेनदेन के कागजात नहीं मिले हैं। शुरुआती जांच में सभी ग्रेनो में बिना वीजा के रह रहे थे। आरोपी ड्रग्स सप्लाई के बाद मिलने वाली रकम का लेनदेन क्रिप्टोकरंसी में करते आ रहे हैं।
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रेव पार्टी में भी होती थी सप्लाई
दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम के बड़े-बड़े फार्म हाउस में होने वाली रेव पार्टियों में यहीं से एमडीएमए या अन्य ड्रग्स की मांग होती थी। पुलिस पूछताछ में पता चला है यह स्थानीय स्तर पर कुछ सदस्यों के माध्यम से यहां भी सप्लाई करते थे।
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क्या है एमडीएमए
मेथिलेनेडियो मेथानटामाइन (एमडीएमए) को एमडीएमए, एक्स्टसी, ई एक्स, एक्सटीसी, मौली और मैंडी जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह बेहद खतरनाक नशा है। यह पानी के साथ आसानी से घुल जाती है। इसे पानी या कोल्ड ड्रिंक के साथ लेने पर नशा पीने का पता भी नहीं चलता है। दावा किया जाता है कि यह दिमाग को लगभग सुन्न अवस्था में पहुंचा देती है। इसका असर 36 से 48 घंटे तक बना रहता है। रेव पार्टियों और बॉलीवुड में एमडीएमए अधिक प्रचलित है।
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आरोपियों ने ड्रग्स बनाने के लिए थीटा-दो में लेबोरेटरी और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए बेस बना रखा था। ड्रग्स कार्टेल, क्रिप्टो करेंसी और टेरर फंडिंग से ड्रग्स फैक्ट्री के तार जुड़ने के संकेत हैं। इसकी जांच के साथ इनके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। - लक्ष्मी सिंह, पुलिस आयुक्त, गौतमबुद्ध नगर
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बॉलीवुड में सप्लाई और टेरर एंगल से जुड़ रहे आरोपियों के तार
बॉलीवुड में सप्लाई और टेरर एंगल से जुड़ रहे आरोपियों के तार
कनाडा, अमेरिका, चीन, नेपाल में भी एमडीएमए की सप्लाई का चल रहा पता
संदीप वर्मा
ग्रेटर नोएडा। जैतपुर गांव में पकड़ी गई फैक्टरी में बनाए जाने वाले मादक पदार्थ की सप्लाई कनाडा, अमेरिका, चीन और नेपाल में भी जाती थी। पुलिस का कहना है कि आरोपी यहां ड्रग्स बनाकर विदेश भेजते थे। पुलिस इनके सप्लायरों को को गिरफ्तार करने के प्रयास में लगी है।
नारकोटिक्स विशेषज्ञों के अनुसार, एमडीएमए, कोकीन और हेरोइन जैसे मादक पदार्थों की मैन्यूफैक्चरिंग और सप्लाई के लिए 70 फीसदी से अधिक मामलों में नारको टेरर से जुड़े होते हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रों से ड्रग्स की सप्लाई लंबे समय से भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में होती आ रही है। पुलिस इनके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन और नेटवर्क की जांच में लगी है। इससे कमाए जा रहे पैसे का उपयोग कहीं आतंकी गतिविधियों में तो उपयोग नहीं हो रहा है, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
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पुलिस का कहना है कि पानी के साथ आसानी से घुल जाने वाले मेथिलेनेडियो मेथानटामाइन (एमडीएमए) का इस्तेमाल आजकल सबसे अधिक बॉलीवुड इंडस्ट्री और रेव पार्टी में हो रहा है। ड्रग फैक्ट्री से दिल्ली-एनसीआर ही नहीं मुंबई के बॉलीवुड और गोवा में सप्लाई होने के सुबूत मिल रहे हैं।
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एमडीएमए का कहां हो रहा उपयोग
पुलिस ने प्रदेश और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से भी संपर्क किया है। इससे विदेशों में इनके लिंक और नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश में लगी है। खास बात यह है कि 300 करोड़ की एमडीएमए की सप्लाई हाल में कहां होने वाली थी, ऐसे में विदेश में इसकी सप्लाई का भी पता लगाने के लिए इनके लिंक और नेटवर्क का खुलासा करने के लिए राष्ट्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो से संपर्क किया जा रहा है।
कोकीन के भी होने की संभावना
पुलिस की प्राथमिक जांच में लैब में मिले मादक पदार्थ को पुलिस एमडीएमए मानकर चल रही है। हालांकि, आशंका है कि कुछ पदार्थ कोकीन भी हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इतनी कोकीन लगभग 500 करोड़ की हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों से इसकी जांच कराई जा रही है।
तीन माह से लैब का पता लगाने के प्रयास में लगी थी स्वाट टीम
थीटा-दो में पिछले एक वर्ष से ड्रग्स की फैक्ट्री चल रही थी। कई बार ड्रग कार्टेल का पुलिस पता लगाने में जुटी हुई है। स्वाट टीम ड्रग्स माफिया का पिछले तीन महीने से पता लगाने की कोशिश कर रही थी। इनमें से दो आरोपियों के ड्रग्स के साथ पकड़े जाने पर पुलिस ने फैक्ट्री पर कार्रवाई की।
क्रिप्टोकरेंसी से हुआ लेनदेन
गिरफ्तार नाइजीरियाई नागरिकों के पास से पुलिस को कोई बैंक खाता, एटीएम या फाइनेंशियल लेनदेन के कागजात नहीं मिले हैं। शुरुआती जांच में सभी ग्रेनो में बिना वीजा के रह रहे थे। आरोपी ड्रग्स सप्लाई के बाद मिलने वाली रकम का लेनदेन क्रिप्टोकरंसी में करते आ रहे हैं।
रेव पार्टी में भी होती थी सप्लाई
दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम के बड़े-बड़े फार्म हाउस में होने वाली रेव पार्टियों में यहीं से एमडीएमए या अन्य ड्रग्स की मांग होती थी। पुलिस पूछताछ में पता चला है यह स्थानीय स्तर पर कुछ सदस्यों के माध्यम से यहां भी सप्लाई करते थे।
क्या है एमडीएमए
मेथिलेनेडियो मेथानटामाइन (एमडीएमए) को एमडीएमए, एक्स्टसी, ई एक्स, एक्सटीसी, मौली और मैंडी जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह बेहद खतरनाक नशा है। यह पानी के साथ आसानी से घुल जाती है। इसे पानी या कोल्ड ड्रिंक के साथ लेने पर नशा पीने का पता भी नहीं चलता है। दावा किया जाता है कि यह दिमाग को लगभग सुन्न अवस्था में पहुंचा देती है। इसका असर 36 से 48 घंटे तक बना रहता है। रेव पार्टियों और बॉलीवुड में एमडीएमए अधिक प्रचलित है।
आरोपियों ने ड्रग्स बनाने के लिए थीटा-दो में लेबोरेटरी और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए बेस बना रखा था। ड्रग्स कार्टेल, क्रिप्टो करेंसी और टेरर फंडिंग से ड्रग्स फैक्ट्री के तार जुड़ने के संकेत हैं। इसकी जांच के साथ इनके फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। - लक्ष्मी सिंह, पुलिस आयुक्त, गौतमबुद्ध नगर