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15 दिन में बनेगी मेडिकल डिवाइस पार्क की डीपीआर
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के मेडिकल डिवाइस पार्क की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) फिर से बनेगी। अगले 15 दिन में यह तैयार हो जाएगी। प्राधिकरण ने अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी को जिम्मेदारी दी है। नवंबर में डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र सरकार ने पहली डीपीआर को मंजूर नहीं किया था। मेडिकल डिवाइस पार्क में करीब 15000 करोड़ रुपये का निवेश होगा।
यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 में 350 एकड़ जमीन पर पार्क विकसित होगा। पिछले माह योजना को केंद्र सरकार ने सैद्घांतिक मंजूरी दी थी। बुधवार को मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स की सचिव एस अपर्णा ने इस पर बैठक भी की। बैठक में यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह और अन्य अफसरों ने भाग लिया। अफसरों ने बताया कि पहले कलाम इंस्टीट्यूट हैदराबाद से डीपीआर तैयार करवाई गई थी। अब अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। पहले चरण में 100 एकड़ जमीन को विकसित किया जाएगा। यहां पर 1000 वर्ग मीटर से 10 हजार वर्ग मीटर के भूखंड होंगे। 15 दिन में डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूखंडों का आवंटन शुरू होगा। अभी से कंपनियों से संपर्क करना भी शुरू कर दिया है।
देश का तीसरा मेडिकल डिवाइस पार्क होगा
यह पार्क देश का तीसरा और उत्तर भारत का पहला होगा। बंगलूरू और कोलकाता में दो अन्य मेडिकल डिवाइस पार्क हैं। यहां पर मेडिकल उपकरण बनेंगे, ताकि दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो सके। अभी 70 प्रतिशत उपकरण आयात होते हैं। केंद्र सरकार की मेडिकल उपकरण में आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
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यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 में 350 एकड़ जमीन पर पार्क विकसित होगा। पिछले माह योजना को केंद्र सरकार ने सैद्घांतिक मंजूरी दी थी। बुधवार को मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स की सचिव एस अपर्णा ने इस पर बैठक भी की। बैठक में यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह और अन्य अफसरों ने भाग लिया। अफसरों ने बताया कि पहले कलाम इंस्टीट्यूट हैदराबाद से डीपीआर तैयार करवाई गई थी। अब अर्नेस्ट एंड यंग कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। पहले चरण में 100 एकड़ जमीन को विकसित किया जाएगा। यहां पर 1000 वर्ग मीटर से 10 हजार वर्ग मीटर के भूखंड होंगे। 15 दिन में डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूखंडों का आवंटन शुरू होगा। अभी से कंपनियों से संपर्क करना भी शुरू कर दिया है।
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देश का तीसरा मेडिकल डिवाइस पार्क होगा
यह पार्क देश का तीसरा और उत्तर भारत का पहला होगा। बंगलूरू और कोलकाता में दो अन्य मेडिकल डिवाइस पार्क हैं। यहां पर मेडिकल उपकरण बनेंगे, ताकि दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो सके। अभी 70 प्रतिशत उपकरण आयात होते हैं। केंद्र सरकार की मेडिकल उपकरण में आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
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