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घरेलू हिंसा, वैवाहिक तनाव और अवसाद आत्महत्या के प्रयास के प्रमुख कारण : जिम्स शोध

Sat, 08 Aug 2026 06:53 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 06:53 PM IST
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Domestic violence, marital stress, and depression are major causes of suicide attempts: GIMS study.
- साइकियाट्री और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के संयुक्त अध्ययन में सामने आए महत्वपूर्ण तथ्य
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- समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता को बताया बचाव का प्रभावी उपाय
संवाद न्यूज एजेंसी
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के साइकियाट्री और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के संयुक्त शोध में घरेलू हिंसा, वैवाहिक तनाव और अवसाद को आत्महत्या के प्रयास के प्रमुख कारणों में शामिल पाया गया है। शुक्रवार को जिम्स में आयोजित क्लीनिकल मीटिंग में शोध अध्ययन प्रस्तुत किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और घरेलू हिंसा के संकेतों की समय रहते पहचान कर उपचार और मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो आत्मघाती प्रवृत्तियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
शोध जिम्स के साइकियाट्री विभाग की डॉ. किरण जाखड़ और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग की डॉ. अंजू रानी ने एक 32 वर्षीय विवाहित महिला के मामले पर किया। महिला को जहर खाने के बाद जिम्स के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया था। शुरुआती जानकारी में घटना को दुर्घटनावश बताया गया, लेकिन विस्तृत मनोवैज्ञानिक जांच में सामने आया कि महिला लंबे समय से वैवाहिक विवाद, घरेलू हिंसा और गंभीर अवसाद से जूझ रही थी। इमरजेंसी विभाग में प्राथमिक उपचार के बाद महिला की स्थिति स्थिर की गई और उसे साइकियाट्री विभाग में रेफर किया गया। विशेषज्ञों ने मानसिक स्थिति और आत्महत्या के जोखिम का मूल्यांकन कर उपचार शुरू किया। इसमें चिकित्सकीय देखभाल, मनोवैज्ञानिक परामर्श और नियमित काउंसलिंग को शामिल किया गया। चिकित्सकों के अनुसार महिला की स्थिति अब स्थिर है और उपचार जारी है।
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मेडिको-लीगल पहलुओं की दी जानकारी-
क्लीनिकल मीटिंग में डॉ. अंजू रानी ने आत्महत्या के प्रयास से जुड़े मेडिको-लीगल पहलुओं पर भी जानकारी दी। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 के प्रावधानों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था में ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य उपचार, पुनर्वास और परामर्श को महत्व दिया गया है। उन्होंने बताया कि आत्महत्या के प्रयास के पीछे तत्काल परिस्थितियों के साथ लंबे समय से चले आ रहे मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक दबाव भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए मरीज के उपचार के साथ उसके पारिवारिक और मनोसामाजिक वातावरण को समझना जरूरी है। समय पर पहचान, संवेदनशीलता, उचित चिकित्सा और निरंतर सहयोग आत्मघाती प्रवृत्तियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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