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Noida News: सोसाइटियों में ही हो रहा गीले कचरे का निस्तारण

Mon, 12 May 2025 08:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 12 May 2025 08:57 PM IST
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Disposal of wet waste is happening in societies itself
फोटो है
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-हाईराइज सोसाइटियों में गीला कूड़ा अब कचरा गाड़ी को नहीं देना पड़ रहा
- निस्तारण के लिए लगे एरोबिंस, गीले कचरे से बनाई जा रही खाद

वान्या दीक्षित
नोएडा। पर्यावरण संरक्षण के लिए शहरवासी लगातार जागरूक हो रहे हैं। यही वजह है कि हाईराइज सोसाइटियों ने गीले कूड़े के निस्तारण का जिम्मा भी खुद ही संभाल रखा है। सोसाइटी में गीला कूड़ा निस्तारण के लिए प्लांट लगाए गए हैं और घरों से निकलने वाले गीले कूड़े का निस्तारण भी सोसाइटी के अंदर ही किया जा रहा है। गीले कूड़े से बनने वाली खाद सोसाइटी के अंदर लगे पेड़-पौधों में डाली जा रही है।


बता दें कि गीले कचरे में ऐसी सामग्री होती है जो आमतौर पर नम या गीली होती है और प्राकृतिक रूप से सड़ सकती है। गीले कचरे में वह कचरा होता है जैसे खाद्य अपशिष्ट, रसोई अपशिष्ट, सब्जियों के छिलके, फलों के छिलके आदि। इनका निस्तारण समय पर न किया जाए तो इनसे एक दुर्गंध भरा द्रव्य निकलने लगता है और सड़न हो जाती है। गीले कचरे से खाद बनने के साथ ही इससे लिक्विड फर्टिलाइजर भी निकलता है जिसका पेड़-पौधों पर छिड़काव किया जाता है।
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-बिना ऑक्सीजन एनारोबिक प्रक्रिया से चलता है प्लांट
सेक्टर 107 स्थित प्रतीक एडिफिस सोसाइटी की एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल कमेटी की सदस्य प्रतिभा खान ने बताया कि गीले कूड़े का निस्तारण यहीं पर होता है। इसके लिए सोसाइटी के अंदर छह एरोबिंस लगाए गए हैं। यहां रोजाना करीब 90 किलो गीला कूड़ा निकलता है। इस गीले कूड़े को एरोबिंस में डाला जाता है तो उसमें कम मात्रा में साथ में कोकोपीट भी डाला जाता है। इससे कई लेयर बनती हैं। हर प्रक्रिया में खाद बनने में 40-45 दिन का समय लगता है। एक बार की साइकिल में 180 किलो खाद और 150 लीटर लिक्विड फर्टिलाइजर निकलता है। यह प्रक्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।
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बन रहा लिक्विड फर्टिलाइजर
प्रतिभा खान ने बताया कि हर एरोबिंस से गीले कचरे से लिक्विड फर्टिलाइजर भी निकलता है। इसमें कैल्शियम, नाइट्रोजन, पोटैशियम अधिक मात्रा में होती हैं। इस लिक्विड को पेड़ पौधों में डालने और छिड़काव करने में उपयोग किया जाता है। यह लिक्विड रोजाना निकलता है।
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रोजाना बन रही 100 किलो खाद

होम्स 121 सोसाइटी के एओए सचिव निमित अग्रवाल ने बताया कि सोसाइटी के अंदर कंपोज्ड मशीन से गीले कूड़े का निस्तारण किया जाता है। रोजाना करीब 200 किलो गीला कूड़ा इकट्ठा होता है। जिससे रोजाना करीब 100 किलो खाद बन रही है। गीले कचरे का वजन अधिक होता है, क्योंकि उसमें पानी की मात्रा भी होती है। कंपोज्ड मशीन में डालते ही इसमें से काफी मात्रा में पानी भी निकलता है। इस पानी को सुखाने के लिए पेड़ों की सूखी पत्तियां और लकड़ी का बुरादा भी प्लांट में डाला जाता है। इससे निकलने वाला एक विशेष तरह का द्रव्य पदार्थ सूख जाता है और सिर्फ खाद ही मिलती है।
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रोजाना निकल रहा 85 किलो गीला कूड़ा
सेक्टर 78 स्थित सनशाइन हेलियस निवासी करुणा भल्ला ने बताया कि सोसाइटी में एरोबिंस लगे हुए आठ साल से अधिक हो गया है। यहां पर रोजाना करीब 80-85 किलो गीला कूड़ा निकलता है। इस कूड़े को एरोबिंस में डाला जाता है और इससे खाद बनाई जाती है। खाद बनाने की प्रक्रिया की एक साइकिल में 40 से 45 दिन का समय लगता है। एरोबिंस से कूड़ा निस्तारण में किसी तरह की बिजली की खपत नहीं होती है। इस समय सोसाइटी में चार एरोबिंस काम कर रहे हैं।

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-हाईराइज सोसाइटियों में लगाए जा रहे एरोबिंस

इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी पवन कुमार ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से सोसाइटियों में एरोबिंस लगाए जा रहे हैं। नोएडा में अबतक छह हाईराइज सोसाइटियों में एरोबिंस लगाए गए हैं। एरोबिंस लगाने के बाद छह महीने तक हमारी तरफ से ही यह एरोबिंस चलाए जाते हैं। इसमें सोसाइटी को कोई खर्च नहीं देना होता है। छह महीने के बाद हम सोसाइटी को हैंडओवर कर देते हैं।
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