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पोस्टिंग नियमानुसार न होने पर दिव्यांगों ने किया विरोध
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पोस्टिंग प्रक्रिया में तरजीह नहीं मिलने पर भड़के दिव्यांग
ग्रेटर नोएडा। परिषदीय स्कूलों में दूसरे जिलों से स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों की पोस्टिंग प्रक्रिया बृहस्पतिवार और शुक्रवार को नॉलेज पार्क-5 स्थित बालक इंटर कॉलेज में हुई। बृहस्पतिवार को काउंसलिंग में नियमानुसार तरजीह नहीं मिलने पर दिव्यांग शिक्षक भड़क गए। हंगामे और विरोध के बीच प्रक्रिया को बीच में ही निरस्त करना पड़ा। उच्च अधिकारियों के आदेश पर देर शाम दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई। जिसमें दिव्यांगों को पहले मौका दिया गया।
गौतमबुद्ध नगर में अन्य जिलों से स्थानांतरित होकर 227 शिक्षक आए हैं। प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की तैनाती होनी थी। काउंसलिंग शुरू होने के कुछ देर बाद जब दिव्यांग शिक्षकों का नंबर नहीं आया तो वह भड़क गए। उनका कहना था कि सबसे पहले स्कूल चयन करने का अधिकार दिव्यांगों के पास होता है। इसके बाद पूर्व सैनिकों के परिजन, गंभीर बीमारी से पीड़ित फिर महिला शिक्षकों को तरजीह मिलती है। अंत में स्वस्थ पुरुष अभ्यर्थियों को मौका मिलता है। उनका आरोप था कि कई अभ्यर्थियों का चयन कर पहले ही भेज दिया गया।
शिक्षा विभाग से आई लिस्ट के अनुसार बृहस्पतिवार को शिक्षकों को स्कूल अलॉट करने की प्रक्रिया हुई थी। दिव्यांग अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। बाद में उच्च शिक्षा अधिकारियों से बातचीत के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई।
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संजय कुमार उपाध्याय, प्रधानाचार्य डाइट और कार्यकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी
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ग्रेटर नोएडा। परिषदीय स्कूलों में दूसरे जिलों से स्थानांतरित होकर आए शिक्षकों की पोस्टिंग प्रक्रिया बृहस्पतिवार और शुक्रवार को नॉलेज पार्क-5 स्थित बालक इंटर कॉलेज में हुई। बृहस्पतिवार को काउंसलिंग में नियमानुसार तरजीह नहीं मिलने पर दिव्यांग शिक्षक भड़क गए। हंगामे और विरोध के बीच प्रक्रिया को बीच में ही निरस्त करना पड़ा। उच्च अधिकारियों के आदेश पर देर शाम दोबारा प्रक्रिया शुरू हुई। जिसमें दिव्यांगों को पहले मौका दिया गया।
गौतमबुद्ध नगर में अन्य जिलों से स्थानांतरित होकर 227 शिक्षक आए हैं। प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की तैनाती होनी थी। काउंसलिंग शुरू होने के कुछ देर बाद जब दिव्यांग शिक्षकों का नंबर नहीं आया तो वह भड़क गए। उनका कहना था कि सबसे पहले स्कूल चयन करने का अधिकार दिव्यांगों के पास होता है। इसके बाद पूर्व सैनिकों के परिजन, गंभीर बीमारी से पीड़ित फिर महिला शिक्षकों को तरजीह मिलती है। अंत में स्वस्थ पुरुष अभ्यर्थियों को मौका मिलता है। उनका आरोप था कि कई अभ्यर्थियों का चयन कर पहले ही भेज दिया गया।
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शिक्षा विभाग से आई लिस्ट के अनुसार बृहस्पतिवार को शिक्षकों को स्कूल अलॉट करने की प्रक्रिया हुई थी। दिव्यांग अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। बाद में उच्च शिक्षा अधिकारियों से बातचीत के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई।
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संजय कुमार उपाध्याय, प्रधानाचार्य डाइट और कार्यकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी