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Noida News: हाईराइज सोसाइटियों में बिजली कटौती के साथ बढ़ रहा डीजल जेनरेटर का धुआं
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सन्दीप।चौहान।
-20 से 30 मंजिला इमारतों में बिजली जाने पर लिफ्ट और पानी की आपूर्ति के लिए जेनरेटर चलाना होता है जरूरी
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) के तहत पाबंदियां लागू होती हैं। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई हाईराइज सोसाइटियों में अघोषित बिजली कटौती के दौरान डीजल जेनरेटर चलाना मजबूरी बना हुआ है। इससे प्रदूषण बढ़ने की चिंता बनी रहती है। सेक्टर-74, 77, 121, 137 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसाइटियों के निवासियों के मुताबिक गर्मी और उमस में लोकल फॉल्ट व ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने से दो से छह घंटे तक बिजली कटौती हो जाती है। बैकअप के लिए डीजी सेट चलाना जरूरी होता है। 20 से 30 मंजिला इमारतों में बिजली जाने पर लिफ्ट और पानी की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है।
कन्वर्जन में लाखों का खर्च
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के नियमों के तहत डीजी सेट को डुअल-फ्यूल (पीएनजी+डीजल) या रेट्रोफिटेड एमिशन कंट्रोल डिवाइस से लैस करना जरूरी है। 500 से 750 केवीए के एक जेनरेटर को अपग्रेड करने में करीब पांच से आठ लाख रुपये खर्च होते हैं। बड़ी सोसाइटियों में चार से छह जेनरेटर होने पर यह खर्च 30 से 40 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
हैंडओवर विवाद भी बाधा
कई सोसाइटियों में बिल्डर और एओए के बीच हैंडओवर का विवाद चल रहा है। वहीं, कुछ सोसाइटियों के पास तकनीक अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त मेंटेनेंस फंड नहीं है। ऐसे में निवासी 24 घंटे बिजली आपूर्ति और जेनरेटर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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सोसाइटियों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो, ताकि डीजल जेनरेटर की जरूरत न पड़े और वैकल्पिक व्यवस्था समय पर दुरुस्त हो। - अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा
पर्यावरणीय नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन बिजली कटौती में जेनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध से सुरक्षा और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होंगी। -संदीप चौहान, अध्यक्ष, फोना
ग्रेप के दौरान जेनसेट पर प्रतिबंध से बिजली कटौती में हजारों परिवारों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। -निखिल सिंघल, अध्यक्ष, नोएडा हाईराइज फेडरेशन
प्रदूषण का मौसम नजदीक है, इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हाईराइज सोसाइटियों में ग्रेप के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन जरूरी है। - राजीव सिंह, संस्थापक, नोफा
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) के तहत पाबंदियां लागू होती हैं। लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई हाईराइज सोसाइटियों में अघोषित बिजली कटौती के दौरान डीजल जेनरेटर चलाना मजबूरी बना हुआ है। इससे प्रदूषण बढ़ने की चिंता बनी रहती है। सेक्टर-74, 77, 121, 137 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सोसाइटियों के निवासियों के मुताबिक गर्मी और उमस में लोकल फॉल्ट व ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड होने से दो से छह घंटे तक बिजली कटौती हो जाती है। बैकअप के लिए डीजी सेट चलाना जरूरी होता है। 20 से 30 मंजिला इमारतों में बिजली जाने पर लिफ्ट और पानी की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है।
कन्वर्जन में लाखों का खर्च
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के नियमों के तहत डीजी सेट को डुअल-फ्यूल (पीएनजी+डीजल) या रेट्रोफिटेड एमिशन कंट्रोल डिवाइस से लैस करना जरूरी है। 500 से 750 केवीए के एक जेनरेटर को अपग्रेड करने में करीब पांच से आठ लाख रुपये खर्च होते हैं। बड़ी सोसाइटियों में चार से छह जेनरेटर होने पर यह खर्च 30 से 40 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
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हैंडओवर विवाद भी बाधा
कई सोसाइटियों में बिल्डर और एओए के बीच हैंडओवर का विवाद चल रहा है। वहीं, कुछ सोसाइटियों के पास तकनीक अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त मेंटेनेंस फंड नहीं है। ऐसे में निवासी 24 घंटे बिजली आपूर्ति और जेनरेटर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
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सोसाइटियों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो, ताकि डीजल जेनरेटर की जरूरत न पड़े और वैकल्पिक व्यवस्था समय पर दुरुस्त हो। - अभिषेक कुमार, अध्यक्ष, नेफोवा
पर्यावरणीय नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन बिजली कटौती में जेनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध से सुरक्षा और आवश्यक सेवाएं प्रभावित होंगी। -संदीप चौहान, अध्यक्ष, फोना
ग्रेप के दौरान जेनसेट पर प्रतिबंध से बिजली कटौती में हजारों परिवारों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। -निखिल सिंघल, अध्यक्ष, नोएडा हाईराइज फेडरेशन
प्रदूषण का मौसम नजदीक है, इसलिए स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए हाईराइज सोसाइटियों में ग्रेप के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन जरूरी है। - राजीव सिंह, संस्थापक, नोफा

सन्दीप।चौहान।

सन्दीप।चौहान।

सन्दीप।चौहान।