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Noida News: डायबिटीज बढ़ा रही अवसाद और भूलने की बीमारी
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डायबिटीज बढ़ा रही अवसाद और भूलने की बीमारी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नियंत्रित डायबिटीज अब केवल शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने से मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की प्रवृत्ति और व्यवहार में बदलाव तेजी से बदला है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भी मधुमेह के रोगियों इन्हीं समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 400 मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर दीपक शर्मा ने बताया कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। कई बार मरीज हार्ट अटैक, किडनी फेल होने या मानसिक समस्या के बाद जांच कराते हैं, तब डायबिटीज का पता चलता है। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक मरीजों में रोज ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों को सलाह दी जा रही है कि मधुमेह को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और जांच से शुगर सामान्य स्तर तक लाई जा सकती है। लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाना चाहिए, जैसे पैदल चलना, घर के काम करना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना होगा। व्रत और त्योहारों में अधिक कार्बोहाइड्रेट व तले भोजन से बचने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने और हेलमेट सही तरीके से न पहनने पर भी चिंता जताई।
ये हैं प्रमुख बातें
अनियंत्रित डायबिटीज से अवसाद और भूलने की बीमारी का खतरा
50 वर्ष के बाद मानसिक लक्षण अधिक उभर रहे
बढ़ी शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं को प्रभावित करती है
नियमित व्यायाम और खानपान नियंत्रण बेहद जरूरी
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। नियंत्रित डायबिटीज अब केवल शुगर तक सीमित बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है। लंबे समय तक शुगर बढ़ी रहने से मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की प्रवृत्ति और व्यवहार में बदलाव तेजी से बदला है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भी मधुमेह के रोगियों इन्हीं समस्याओं को लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 400 मरीज पहुंच रहे हैं। मेडिसन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर दीपक शर्मा ने बताया कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते। कई बार मरीज हार्ट अटैक, किडनी फेल होने या मानसिक समस्या के बाद जांच कराते हैं, तब डायबिटीज का पता चलता है। उन्होंने बताया कि 50 से अधिक मरीजों में रोज ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों को सलाह दी जा रही है कि मधुमेह को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और जांच से शुगर सामान्य स्तर तक लाई जा सकती है। लोगों को रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाना चाहिए, जैसे पैदल चलना, घर के काम करना और लंबे समय तक बैठे रहने से बचना होगा। व्रत और त्योहारों में अधिक कार्बोहाइड्रेट व तले भोजन से बचने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने और हेलमेट सही तरीके से न पहनने पर भी चिंता जताई।
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ये हैं प्रमुख बातें
अनियंत्रित डायबिटीज से अवसाद और भूलने की बीमारी का खतरा
50 वर्ष के बाद मानसिक लक्षण अधिक उभर रहे
बढ़ी शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं को प्रभावित करती है
नियमित व्यायाम और खानपान नियंत्रण बेहद जरूरी