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Noida News: 24 साल पुरानी हत्या का रहस्य बरकरार, जुर्म साबित न होने पर पति समेत तीनों बरी
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- 24 साल पुराने केस में नहीं टिके सबूत, पति सहित तीनों आरोपी बरी
-मां की हत्या के लिए पिता पर रची गई साजिश का आरोप साबित नहीं हुआ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। एक हत्या, जो पहले लूटपाट का नतीजा लगी। एक पति, जो शोक में डूबा दिखाई दिया और एक जांच, जिसने कहानी का पूरा किरदार बदल दिया। 24 साल तक अदालतों में चलती रही इस मर्डर मिस्ट्री का आखिरकार ऐसा अंत हुआ, जिसकी पटकथा किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती। हत्या के करीब 24 वर्ष बाद अदालत ने पति समेत तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2002 का है, जिसने उस समय पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात को शुरुआत में एक साधारण लूटपाट के दौरान हुई हत्या माना गया, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। एफआईआर के मुताबिक 25 जून 2002 को राजकुमार अपनी पत्नी पिंकी और बेटे राहुल के साथ बैंक से नकदी निकालकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उनकी ओमनी वैन को कुछ युवकों ने रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने नकदी लूटने की कोशिश की और विरोध होने पर एक हमलावर ने बेहद नजदीक से गोली चला दी। गोली पिंकी को लगी और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
शुरुआत में यह घटना एक लूट के दौरान हुई हत्या के रूप में दर्ज हुई, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं, जांच का रुख पूरी तरह बदल गया। पुलिस के अनुसार यह कोई आकस्मिक वारदात नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया कत्ल था। जांच में मृतका के पति राजकुमार का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया। इसके अलावा शाहजाद और नाजिर उर्फ नाजिम उर्फ यशवीर को भी आरोपी बनाया गया।
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पति को बताया गया था मुख्य साजिशकर्ता : इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मृतका के पति राजकुमार को इस पूरे मामले का कथित मास्टरमाइंड माना गया। पुलिस का दावा था कि राजकुमार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम देने की योजना बनाई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने इंद्रजीत, शाहजाद और नाजिर को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी का भी दावा किया।
बेटे की गवाही बनी अहम आधार : मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें मृतका का बेटा राहुल और बेटी प्रियंका भी शामिल थे। पुत्री ने अदालत में गवाही देते हुए कहा कि उसके पिता राजकुमार अक्सर उसकी मां के साथ शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्व्यवहार करते थे। उसने यह भी कहा कि उसके पिता को शराब और जुए की लत थी।
बेटे की गवाही पर खड़े हुए प्रश्न : पुत्र ने अदालत में नाजिर की पहचान उस व्यक्ति के रूप में की, जिसने उसकी मां को गोली मारी थी। उसने दावा किया कि घटना के अगले दिन नाजिर और शाहजाद उसके घर आए थे। उसके पिता से कहा था कि उन्होंने उनकी पत्नी को “आदेश के अनुसार” मार दिया है। अब बाकी भुगतान किया जाए। अभियोजन पक्ष ने पुत्र की इस गवाही को साजिश साबित करने के लिए महत्वपूर्ण माना, लेकिन अदालत ने इस बयान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोष सिद्ध करने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना आवश्यक है। जब उपलब्ध साक्ष्य इस कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने मृतका के पति राजकुमार और सह-आरोपी शाहजाद और नाजिर को आरोपों से बरी कर दिया।
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-मां की हत्या के लिए पिता पर रची गई साजिश का आरोप साबित नहीं हुआ
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। एक हत्या, जो पहले लूटपाट का नतीजा लगी। एक पति, जो शोक में डूबा दिखाई दिया और एक जांच, जिसने कहानी का पूरा किरदार बदल दिया। 24 साल तक अदालतों में चलती रही इस मर्डर मिस्ट्री का आखिरकार ऐसा अंत हुआ, जिसकी पटकथा किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगती। हत्या के करीब 24 वर्ष बाद अदालत ने पति समेत तीन आरोपियों को बरी कर दिया।
यह मामला वर्ष 2002 का है, जिसने उस समय पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। सेक्टर-39 थाना क्षेत्र में हुई इस वारदात को शुरुआत में एक साधारण लूटपाट के दौरान हुई हत्या माना गया, लेकिन पुलिस जांच आगे बढ़ी तो कहानी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। एफआईआर के मुताबिक 25 जून 2002 को राजकुमार अपनी पत्नी पिंकी और बेटे राहुल के साथ बैंक से नकदी निकालकर घर लौट रहे थे। रास्ते में उनकी ओमनी वैन को कुछ युवकों ने रोक लिया। आरोप है कि बदमाशों ने नकदी लूटने की कोशिश की और विरोध होने पर एक हमलावर ने बेहद नजदीक से गोली चला दी। गोली पिंकी को लगी और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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शुरुआत में यह घटना एक लूट के दौरान हुई हत्या के रूप में दर्ज हुई, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं, जांच का रुख पूरी तरह बदल गया। पुलिस के अनुसार यह कोई आकस्मिक वारदात नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया कत्ल था। जांच में मृतका के पति राजकुमार का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया। इसके अलावा शाहजाद और नाजिर उर्फ नाजिम उर्फ यशवीर को भी आरोपी बनाया गया।
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पति को बताया गया था मुख्य साजिशकर्ता : इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस जांच ने चौंकाने वाले खुलासे किए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, मृतका के पति राजकुमार को इस पूरे मामले का कथित मास्टरमाइंड माना गया। पुलिस का दावा था कि राजकुमार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर अपनी पत्नी की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम देने की योजना बनाई। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने इंद्रजीत, शाहजाद और नाजिर को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की बरामदगी का भी दावा किया।
बेटे की गवाही बनी अहम आधार : मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 10 गवाह पेश किए। इनमें मृतका का बेटा राहुल और बेटी प्रियंका भी शामिल थे। पुत्री ने अदालत में गवाही देते हुए कहा कि उसके पिता राजकुमार अक्सर उसकी मां के साथ शारीरिक और मानसिक रूप से दुर्व्यवहार करते थे। उसने यह भी कहा कि उसके पिता को शराब और जुए की लत थी।
बेटे की गवाही पर खड़े हुए प्रश्न : पुत्र ने अदालत में नाजिर की पहचान उस व्यक्ति के रूप में की, जिसने उसकी मां को गोली मारी थी। उसने दावा किया कि घटना के अगले दिन नाजिर और शाहजाद उसके घर आए थे। उसके पिता से कहा था कि उन्होंने उनकी पत्नी को “आदेश के अनुसार” मार दिया है। अब बाकी भुगतान किया जाए। अभियोजन पक्ष ने पुत्र की इस गवाही को साजिश साबित करने के लिए महत्वपूर्ण माना, लेकिन अदालत ने इस बयान की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दोष सिद्ध करने के लिए आरोपों का संदेह से परे साबित होना आवश्यक है। जब उपलब्ध साक्ष्य इस कसौटी पर खरे नहीं उतरे तो आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने मृतका के पति राजकुमार और सह-आरोपी शाहजाद और नाजिर को आरोपों से बरी कर दिया।