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Noida News: निर्माणाधीन बिल्डिंग के 22वीं मंजिल से गिरकर श्रमिक की मौत, हंगामा
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- सहयोगियों ने धक्का देकर नीचे गिराने का लगाया आरोप, बोले-बिल्डर पर शव को गायब करने का लगा आरोप, 10 लाख रुपये मुआवजे के आश्वासन पर शांत हुआ हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। सेक्टर-115 स्थित आइवरी काउंटी की निर्माणाधीन बिल्डिंग के 22वीं मंजिल से गिरकर श्रमिक जावेद हुसैन (25) की मौत हो गई। बृहस्पतिवार रात करीब 8 बजे हुए घटनाक्रम के बाद अन्य श्रमिकों ने जावेद को धक्का देकर नीचे गिराने का आरोप लगाया। आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन ने शव को वहां से गायब कर दिया। शुक्रवार सुबह तक शव नहीं मिलने पर नाराज परिजनों और अन्य श्रमिकों ने हंगामा कर दिया। मौके पर कई थानों की पुलिस, थाना प्रभारी, एसीपी और एडीसीपी पहुंचे। करीब तीन घंटे तक श्रमिक नारेबाजी करते रहे।
सुबह पुलिस की मौजूदगी में बिल्डर प्रबंधन की ओर से जावेद का शव सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के मोर्चुरी में रखे जाने की जानकारी दी गई है। साथ ही परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा दिलाने के आश्वासन पर मामला शांत कराया गया। साथी उस्मान के मुताबिक वह और जावेद मूल रूप से दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के निवासी थें। और दोनों निर्माणाधीन सोसाइटी में मजदूरी करते थे। बृहस्पतिवार देर रात जावेद की 22वीं मंजिल से गिरने के कारण मौत हो गई। हालांकि काउंटी प्रबंधन के अनुसार उनको जावेद का शव 12 वीं मंजिल पर मिला।
उनके साथ काम करने वाले शाहिद और सैफ ने बताया कि बृहस्पतिवार रात वह जावेद को चलने के लिए कहे तो उसने कहा कि कुछ काम बाकी है पूरा करके आता हूं। उस समय वहां जावेद, बिल्डर प्रबंधन की तरफ से कंचन, हरिशंकर और बिल्डर स्टाफ का एक आदमी मौजूद था। कमरे पर आने के बाद पूरी रात हम लोग उसे फोन करते रहे लेकिन मोबाइल ऑफ आ रहा था। शुक्रवार सुबह जब हम वहां पहुंचे तो हमें अंदर जाने से मना किया जाने लगा। जब हम जबरदस्ती अंदर गए कि हमारा साथी गायब है। हमें बताया गया कि वह 12 वीं मंजिल पर है सीढ़ियों से चले जाओ। जब हम जाने लगे इसी बीच प्रबंधन के लोग उसे एंबुलेंस में भरकर तेजी से भाग गए।
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जावेद के सहयोगी महफूज आलम ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि हादसा रात आठ बजे के बाद हुआ। जावेद साइट इंचार्ज (फोरमैन) था और उस समय वहां उसका कोई काम नहीं था। हमारा काम 24वीं मंजिल पर चल रहा था। 23वीं और 24वीं मंजिल पर सेफ्टी नेट लगा हुआ है। ऐसे में वह 22वीं मंजिल से कैसे गिरा, इसकी जांच होनी चाहिए। जावेद का मोबाइल फोन फ्लाइट मोड में मिलने की बात भी कही और इतने ऊपर से गिरने के बावजूद उसका मोबाइल पर कोई खरोच नहीं आया।
हंगामे की सूचना पर एडीसीपी अभय कुमार मिश्रा, दो एसीपी और पांच थाना प्रभारियों समेत पुलिस बल मौके पर पहुंचा। एडीसीपी अभय कुमार मिश्रा ने बताया परिजनों को समझा बुझाकर करीब दो घंटे बाद मुआवजे के आश्वासन पर हंगामा शांत हुआ। उनका कहना है कि परिवार की ओर से तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी।
पांच महीने के रेहान के सिर से उठा पिता का साया : जावेद हुसैन की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। उसका पांच महीने का बेटा रेहान अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाया है और उसके सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों के मुताबिक, जावेद करीब 15 दिन पहले ही घर से काम पर लौटा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चे और घर का भविष्य संवारेगा, लेकिन निर्माणाधीन सोसाइटी में हुई घटना ने सब कुछ बदल दिया।
सुरक्षा मानक भी सवालों के घेरे में : हंगामा कर रहे श्रमिकों ने बताया कि उन्हें बिना हेलमेट के अंदर नहीं जाने दिया जाता। लेकिन अंदर बिल्डिंग पर कोई भी सेफ्टी नेट मौजूद नहीं है। हमें न तो जूते दिए जाते हैं और न ही सेफ्टी बेल्ट, रिफ्लेक्टिव जैकेट और दस्ताने जैसी मूलभूत चीजें भी नहीं मुहैया कराई जाती।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। सेक्टर-115 स्थित आइवरी काउंटी की निर्माणाधीन बिल्डिंग के 22वीं मंजिल से गिरकर श्रमिक जावेद हुसैन (25) की मौत हो गई। बृहस्पतिवार रात करीब 8 बजे हुए घटनाक्रम के बाद अन्य श्रमिकों ने जावेद को धक्का देकर नीचे गिराने का आरोप लगाया। आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन ने शव को वहां से गायब कर दिया। शुक्रवार सुबह तक शव नहीं मिलने पर नाराज परिजनों और अन्य श्रमिकों ने हंगामा कर दिया। मौके पर कई थानों की पुलिस, थाना प्रभारी, एसीपी और एडीसीपी पहुंचे। करीब तीन घंटे तक श्रमिक नारेबाजी करते रहे।
सुबह पुलिस की मौजूदगी में बिल्डर प्रबंधन की ओर से जावेद का शव सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के मोर्चुरी में रखे जाने की जानकारी दी गई है। साथ ही परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा दिलाने के आश्वासन पर मामला शांत कराया गया। साथी उस्मान के मुताबिक वह और जावेद मूल रूप से दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के निवासी थें। और दोनों निर्माणाधीन सोसाइटी में मजदूरी करते थे। बृहस्पतिवार देर रात जावेद की 22वीं मंजिल से गिरने के कारण मौत हो गई। हालांकि काउंटी प्रबंधन के अनुसार उनको जावेद का शव 12 वीं मंजिल पर मिला।
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उनके साथ काम करने वाले शाहिद और सैफ ने बताया कि बृहस्पतिवार रात वह जावेद को चलने के लिए कहे तो उसने कहा कि कुछ काम बाकी है पूरा करके आता हूं। उस समय वहां जावेद, बिल्डर प्रबंधन की तरफ से कंचन, हरिशंकर और बिल्डर स्टाफ का एक आदमी मौजूद था। कमरे पर आने के बाद पूरी रात हम लोग उसे फोन करते रहे लेकिन मोबाइल ऑफ आ रहा था। शुक्रवार सुबह जब हम वहां पहुंचे तो हमें अंदर जाने से मना किया जाने लगा। जब हम जबरदस्ती अंदर गए कि हमारा साथी गायब है। हमें बताया गया कि वह 12 वीं मंजिल पर है सीढ़ियों से चले जाओ। जब हम जाने लगे इसी बीच प्रबंधन के लोग उसे एंबुलेंस में भरकर तेजी से भाग गए।
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जावेद के सहयोगी महफूज आलम ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि हादसा रात आठ बजे के बाद हुआ। जावेद साइट इंचार्ज (फोरमैन) था और उस समय वहां उसका कोई काम नहीं था। हमारा काम 24वीं मंजिल पर चल रहा था। 23वीं और 24वीं मंजिल पर सेफ्टी नेट लगा हुआ है। ऐसे में वह 22वीं मंजिल से कैसे गिरा, इसकी जांच होनी चाहिए। जावेद का मोबाइल फोन फ्लाइट मोड में मिलने की बात भी कही और इतने ऊपर से गिरने के बावजूद उसका मोबाइल पर कोई खरोच नहीं आया।
हंगामे की सूचना पर एडीसीपी अभय कुमार मिश्रा, दो एसीपी और पांच थाना प्रभारियों समेत पुलिस बल मौके पर पहुंचा। एडीसीपी अभय कुमार मिश्रा ने बताया परिजनों को समझा बुझाकर करीब दो घंटे बाद मुआवजे के आश्वासन पर हंगामा शांत हुआ। उनका कहना है कि परिवार की ओर से तहरीर मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी।
पांच महीने के रेहान के सिर से उठा पिता का साया : जावेद हुसैन की मौत ने उसके परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। उसका पांच महीने का बेटा रेहान अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाया है और उसके सिर से पिता का साया उठ गया। परिजनों के मुताबिक, जावेद करीब 15 दिन पहले ही घर से काम पर लौटा था। परिवार को उम्मीद थी कि वह मेहनत-मजदूरी करके अपने बच्चे और घर का भविष्य संवारेगा, लेकिन निर्माणाधीन सोसाइटी में हुई घटना ने सब कुछ बदल दिया।
सुरक्षा मानक भी सवालों के घेरे में : हंगामा कर रहे श्रमिकों ने बताया कि उन्हें बिना हेलमेट के अंदर नहीं जाने दिया जाता। लेकिन अंदर बिल्डिंग पर कोई भी सेफ्टी नेट मौजूद नहीं है। हमें न तो जूते दिए जाते हैं और न ही सेफ्टी बेल्ट, रिफ्लेक्टिव जैकेट और दस्ताने जैसी मूलभूत चीजें भी नहीं मुहैया कराई जाती।