{"_id":"6adb58573cb39390950f1dd3","slug":"dfsgdf-grnoida-news-c-23-1-lko1064-109970-2026-10-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: चेक बाउंस मामले में दुकानदार को दो साल की कैद, 15 लाख रुपये जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: चेक बाउंस मामले में दुकानदार को दो साल की कैद, 15 लाख रुपये जुर्माना
विज्ञापन
(अदालत से)
- 9.20 लाख रुपये के उधार के बदले दिए पांच चेक हुए थे बाउंस, 14.75 लाख रुपये शिकायतकर्ता को मिलेंगे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चेक बाउंस के एक मामले में विशेष न्यायालय ने नयाबांस सेक्टर-15 निवासी मनोज कुमार कश्यप को दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे दो वर्ष के साधारण कारावास और 15 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस अर्थदंड में से 14.75 लाख रुपये शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे। शेष 25 हजार रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा होंगे।
यह परिवाद बरौला सेक्टर-49 निवासी राजपाल ने दायर किया था। राजपाल ने बताया कि आरोपी मनोज ने 9 नवंबर 2016 को इलेक्ट्रिक जनरेटर के कारोबार के लिए 9.20 लाख रुपये उधार मांगे थे। गवाहों की मौजूदगी में लिखित अनुबंध हुआ और मनोज ने अपने खाते के पांच चेक दिए। तय हुआ था कि 30 मार्च 2017 तक भुगतान न होने पर चेक बैंक में लगाए जा सकेंगे। मनोज के आग्रह पर चेक 29, 30 और 31 मई 2017 को बैंक में लगाए गए। सभी चेक पेमेंट स्टॉप्ड बाई ड्रॉअर टिप्पणी के साथ लौट आए। मनोज ने रकम उधार लेने से इन्कार करते हुए चेक चोरी होने और नोटबंदी का दावा किया। अदालत ने बचाव की दलीलें खारिज कर दीं। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सजा को उचित माना और मनोज को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेजने का आदेश
विज्ञापन
- 9.20 लाख रुपये के उधार के बदले दिए पांच चेक हुए थे बाउंस, 14.75 लाख रुपये शिकायतकर्ता को मिलेंगे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। चेक बाउंस के एक मामले में विशेष न्यायालय ने नयाबांस सेक्टर-15 निवासी मनोज कुमार कश्यप को दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे दो वर्ष के साधारण कारावास और 15 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इस अर्थदंड में से 14.75 लाख रुपये शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे। शेष 25 हजार रुपये राज्य सरकार के खाते में जमा होंगे।
यह परिवाद बरौला सेक्टर-49 निवासी राजपाल ने दायर किया था। राजपाल ने बताया कि आरोपी मनोज ने 9 नवंबर 2016 को इलेक्ट्रिक जनरेटर के कारोबार के लिए 9.20 लाख रुपये उधार मांगे थे। गवाहों की मौजूदगी में लिखित अनुबंध हुआ और मनोज ने अपने खाते के पांच चेक दिए। तय हुआ था कि 30 मार्च 2017 तक भुगतान न होने पर चेक बैंक में लगाए जा सकेंगे। मनोज के आग्रह पर चेक 29, 30 और 31 मई 2017 को बैंक में लगाए गए। सभी चेक पेमेंट स्टॉप्ड बाई ड्रॉअर टिप्पणी के साथ लौट आए। मनोज ने रकम उधार लेने से इन्कार करते हुए चेक चोरी होने और नोटबंदी का दावा किया। अदालत ने बचाव की दलीलें खारिज कर दीं। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सजा को उचित माना और मनोज को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेजने का आदेश
विज्ञापन