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Noida News: नाइट स्टे की सुविधा न देने पर रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड लौटाए पूरी शुल्क राशि
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जिला उपभोक्ता आयोग
नाइट स्टे की सुविधा न देने पर रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड लौटाए पूरी शुल्क राशि
संवाद न्यूज एजेंसी, ग्रेटर नोएडा। दस साल की सदस्यता लेने के बाद रिसोर्ट में रहने और नाइट स्टे की सुविधा नहीं देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड को 6 फीसदी ब्याज समेत पूरा शुल्क लौटाने का आदेश दिया है। दादरी तहसील के चिपियाना बुजुर्ग गांव निवासी शिखा कन्नौजिया ने रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि की बातों में आकर 1 अक्तूबर 2024 को सभी मौसमों के लिए दस साल की सदस्यता खरीदी। सदस्यता के लिए अपने क्रेडिट कार्ड से 1.37 लाख रुपये का भुगतान किया। जिसका एग्रीमेंट कंपनी ने किया। सदस्यता दो बच्चों समेत दो व्यस्क व्यक्तियों के रहने के लिए है।
छुट्टियों में रिसोर्ट में रहने पर आधारित है। जिसके लिए हर साल 8500 रुपये का रख रखाव शुल्क देना होगा। कंपनी ने भुगतान होने के बाद वायदे और लाभों से मुकरना शुरू कर दिया। उनके द्वारा पॉलिसी को रद्द कराने के लिए कंपनी से अनुरोध किया। कटौती करके धनराशि वापस करने का बात कहीं गई। विधिक नोटिस देने के बाद भी पैसा वापस नहीं किया गया। जिस पर आयोग में वाद दायर किया गया। आयोग में सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष नहीं रखा। आयोग में एक पक्षीय सुनवाई करते हुए कहा कि कंपनी ने सुविधा न देकर सेवा में कमी की हे।आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है वह शिकायत कर्ता को 1.37 लाख रुपये 6 फीसदी ब्याज समेत 30 दिन में लौटाए।
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नाइट स्टे की सुविधा न देने पर रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड लौटाए पूरी शुल्क राशि
संवाद न्यूज एजेंसी, ग्रेटर नोएडा। दस साल की सदस्यता लेने के बाद रिसोर्ट में रहने और नाइट स्टे की सुविधा नहीं देने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड को 6 फीसदी ब्याज समेत पूरा शुल्क लौटाने का आदेश दिया है। दादरी तहसील के चिपियाना बुजुर्ग गांव निवासी शिखा कन्नौजिया ने रेंजर्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि की बातों में आकर 1 अक्तूबर 2024 को सभी मौसमों के लिए दस साल की सदस्यता खरीदी। सदस्यता के लिए अपने क्रेडिट कार्ड से 1.37 लाख रुपये का भुगतान किया। जिसका एग्रीमेंट कंपनी ने किया। सदस्यता दो बच्चों समेत दो व्यस्क व्यक्तियों के रहने के लिए है।
छुट्टियों में रिसोर्ट में रहने पर आधारित है। जिसके लिए हर साल 8500 रुपये का रख रखाव शुल्क देना होगा। कंपनी ने भुगतान होने के बाद वायदे और लाभों से मुकरना शुरू कर दिया। उनके द्वारा पॉलिसी को रद्द कराने के लिए कंपनी से अनुरोध किया। कटौती करके धनराशि वापस करने का बात कहीं गई। विधिक नोटिस देने के बाद भी पैसा वापस नहीं किया गया। जिस पर आयोग में वाद दायर किया गया। आयोग में सुनवाई के दौरान कंपनी ने अपना पक्ष नहीं रखा। आयोग में एक पक्षीय सुनवाई करते हुए कहा कि कंपनी ने सुविधा न देकर सेवा में कमी की हे।आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है वह शिकायत कर्ता को 1.37 लाख रुपये 6 फीसदी ब्याज समेत 30 दिन में लौटाए।
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