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Noida News: किरायानामा की अवधि खत्म होने पर किरायेदार को फ्लैट खाली करने का आदेश
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 के तहत किरायेदार को बेदखल करने के एक अहम मामले में अदालत ने किरायेदार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ किया कि अधिनियम की धारा-4 के तहत किरायेदारी की सूचना किराया प्राधिकारी को न दिए जाने मात्र से बेदखली का वाद अस्वीकार्य नहीं हो जाता।
नोएडा सेक्टर-110 स्थित लोट्स पनचे सोसाइटी में फ्लैट को लेकर विवाद है। मधुशरण ने किराया प्राधिकारी के समक्ष वाद दायर कर कहा कि उनके पति अमरेन्द्र शरण ने फरवरी 2016 में यह फ्लैट अपने भतीजे प्रकाश श्रीवास्तव को 11 माह के लिए मात्र एक रुपये मासिक किराये पर दिया था। किरायानामा की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन फ्लैट खाली नहीं किया गया। अमरेन्द्र शरण का 12 अगस्त 2019 को निधन हो गया था। मधुशरण ने 23 नवंबर 2024 को नोटिस भी भेजा था।
किराया प्राधिकारी ने वाद स्वीकार करते हुए प्रकाश श्रीवास्तव को एक माह में कब्जा और बकाया किराया देने का निर्देश दिया था। अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि प्राधिकारी को वाद सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं था। मधुशरण फ्लैट की एकमात्र स्वामिनी नहीं हैं, अन्य उत्तराधिकारियों को पक्षकार नहीं बनाया गया। फ्लैट की देखभाल व मरम्मत पर 6-7 लाख रुपये खर्च करने का भी दावा किया।
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अदालत ने माना कि मधुशरण भवन स्वामी की उत्तराधिकारी हैं और वाद दायर करने में सक्षम हैं। किरायेदारी की 11 माह की अवधि समाप्त हो चुकी है और नवीनीकरण का कोई साक्ष्य नहीं है। चूंकि बेदखली आवश्यकता के आधार पर नहीं, बल्कि अवधि समाप्त होने पर हुई है, इसलिए निचली अदालत के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई।
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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम 2021 के तहत किरायेदार को बेदखल करने के एक अहम मामले में अदालत ने किरायेदार की अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ किया कि अधिनियम की धारा-4 के तहत किरायेदारी की सूचना किराया प्राधिकारी को न दिए जाने मात्र से बेदखली का वाद अस्वीकार्य नहीं हो जाता।
नोएडा सेक्टर-110 स्थित लोट्स पनचे सोसाइटी में फ्लैट को लेकर विवाद है। मधुशरण ने किराया प्राधिकारी के समक्ष वाद दायर कर कहा कि उनके पति अमरेन्द्र शरण ने फरवरी 2016 में यह फ्लैट अपने भतीजे प्रकाश श्रीवास्तव को 11 माह के लिए मात्र एक रुपये मासिक किराये पर दिया था। किरायानामा की अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन फ्लैट खाली नहीं किया गया। अमरेन्द्र शरण का 12 अगस्त 2019 को निधन हो गया था। मधुशरण ने 23 नवंबर 2024 को नोटिस भी भेजा था।
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किराया प्राधिकारी ने वाद स्वीकार करते हुए प्रकाश श्रीवास्तव को एक माह में कब्जा और बकाया किराया देने का निर्देश दिया था। अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि प्राधिकारी को वाद सुनने का क्षेत्राधिकार नहीं था। मधुशरण फ्लैट की एकमात्र स्वामिनी नहीं हैं, अन्य उत्तराधिकारियों को पक्षकार नहीं बनाया गया। फ्लैट की देखभाल व मरम्मत पर 6-7 लाख रुपये खर्च करने का भी दावा किया।
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अदालत ने माना कि मधुशरण भवन स्वामी की उत्तराधिकारी हैं और वाद दायर करने में सक्षम हैं। किरायेदारी की 11 माह की अवधि समाप्त हो चुकी है और नवीनीकरण का कोई साक्ष्य नहीं है। चूंकि बेदखली आवश्यकता के आधार पर नहीं, बल्कि अवधि समाप्त होने पर हुई है, इसलिए निचली अदालत के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई।