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Noida News: बोड़ाकी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 16 को होगी
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(अदालत से)
- याचिकाकर्ताओं ने सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार न होने का आरोप लगाया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोड़ाकी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब मामले में बोड़ाकी गांव निवासी बलराज भाटी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को 16 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ताओं ने गौतम बुद्ध नगर के तहसील दादरी स्थित गांव चमरावली-बोड़ाकी की भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी है। जो रेलवे की मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) बोड़ाकी परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि रेलवे अधिनियम-1989 के तहत 16 जून 2025 को जारी अधिसूचना पर उन्होंने आपत्ति दाखिल की थी। बावजूद इसके बिना सामाजिक प्रभाव आकलन कराए 12 जून 2026 को अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो राष्ट्रीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति और भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है, क्योंकि परियोजना से प्रभावित परिवारों की संख्या 400 से अधिक है। वहीं रेलवे की ओर से अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्ति निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा के बाद 25 जुलाई 2025 को दाखिल की गई थी। उन्होंने कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 नियत की है।
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- याचिकाकर्ताओं ने सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट तैयार न होने का आरोप लगाया
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोड़ाकी मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब मामले में बोड़ाकी गांव निवासी बलराज भाटी द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले को 16 सितंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ताओं ने गौतम बुद्ध नगर के तहसील दादरी स्थित गांव चमरावली-बोड़ाकी की भूमि के अधिग्रहण को चुनौती दी है। जो रेलवे की मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) बोड़ाकी परियोजना के लिए अधिग्रहीत की जा रही है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि रेलवे अधिनियम-1989 के तहत 16 जून 2025 को जारी अधिसूचना पर उन्होंने आपत्ति दाखिल की थी। बावजूद इसके बिना सामाजिक प्रभाव आकलन कराए 12 जून 2026 को अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो राष्ट्रीय पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति और भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है, क्योंकि परियोजना से प्रभावित परिवारों की संख्या 400 से अधिक है। वहीं रेलवे की ओर से अधिवक्ता ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्ति निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा के बाद 25 जुलाई 2025 को दाखिल की गई थी। उन्होंने कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 नियत की है।