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Noida News: लूट की साजिश बेनकाब, तीन आरोपी सलाखों के पीछे, सरगना बना चुनौती

Wed, 17 Dec 2025 08:57 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 08:57 PM IST
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- जनसुविधा केंद्र में हथियार के बल पर हुई लूट का पुलिस ने किया खुलासा
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- उधारी खत्म करने को देते थे लूट को अंजाम, सरगना तक नहीं पहुंच सकी पुलिस



माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। सेक्टर-113 के जिस जनसुविधा केंद्र में हथियारों से लैस बदमाशों ने लूट को अंजाम दिया था, बुधवार को पुलिस ने उसका राजफाश कर दिया। पुलिस ने तीन आरोपियों को हिरासत में लेते बरामद हुए सामान के साथ मामले का खुलासा किया। हालांकि पुलिस सरगना तक नहीं पहुंच सकी। पकड़े गए तीनों आरोपी उधारी खत्म करने के लिए लूट की घटनाओं का अंजाम दिया करते थे। आरोपियों की पहचान इकोटेक तृतीय थानाक्षेत्र के रहने वाले जाहिद, मेरठ के मुंडाली निवासी तरुण और बुलंदशहर स्याना के रहने वाले पुष्पेंद्र के रूप में हुई है।

फिल्मी अंदाज में बीते दिनों सेक्टर-113 स्थित एक जनसुविधा केंद्र में तीन बदमाशों ने लूट की थी। डीसीपी यमुना प्रसाद बुधवार को खुलासा करते हुए बताया कि तीन बदमाश बाइक पर सवार होकर जब पहुंचे तो जन सुविधा केंद्र बंद होने वाला था। इस बीच संचालक अपने बेटे के साथ जनसेवा केंद्र में था। हथियार से लैस दो बदमाश केंद्र में घुस गए और लैपटॉप और नकदी लेकर मौके से निकल गए थे। जिसके बाद संचालक की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच के लिए टीम भी गठित की। बुधवार को सेक्टर-113 से गुजर रहे बदमाशों को पुलिस ने पकड़ लिया। हालांकि गिरोह का सरगना देवेश की गिरफ्त से अभी भी दूर है। देवेश के विरुद्ध बीस से ज्यादा प्राथमिकी दर्ज हैं। पकड़ा गया जाहिद (19), तरुण (20) और पुष्पेंद्र (18) साल का है। बदमाशों के पास से लैपटॉप और नकदी भी बरामद हुआ।
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जनसेवा केंद्र के पास ही रहता था सरगना : जिस जनसेवा केंद्र में लूट की घटना को अंजाम दिया गया उसके पास गिरोह का सरगना देवेश रहा करता था। देवेश ने कई बार आवाजाही के दौरान जनसेवा केंद्र में नजर घुमाई। एसीपी ट्विंकल जैन ने बताया लूट से पहले गिरोह ने जनसेवा केंद्र की रेकी की थी।
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इसलिए देते थे लूट को अंजाम : एडिशनल डीसीपी शैव्या गोयल ने बताया कि आरोपियों पर महंगे शौक के चक्कर पर उधारी चढ़ने लगी। उधारी चुकाने के लिए कोई रास्ता नहीं मिला तो लूट को अंजाम देने लगे। छाेटी लूट से शुरुआत करते हुए बदमशों ने उधारी चुकानी शुरू की। जिसके बाद इन्होंने लूट को ही पेशा बना लिया। अकसर रुपये की जरूरत पड़ने पर लूट को ही अंजाम देने लगे।
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