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Noida News: व्हाइट ऑर्किड सोसाइटी में जीबीएम बनी जंग का मैदान, दो खेमों में बंटा एओए
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- व्हाइट ऑर्किड सोसाइटी में जीबीएम की बैठक में मतभेद हुए गहरे
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पारदर्शिता बनाम टकराव की इस जंग में अब सोसाइटी की राजनीति खुलकर सामने आ गई है। जीबीएम (जनरल बोर्ड मीटिंग) में जहां निवासियों ने ऑडिट की मांग को लेकर आवाज बुलंद की, वहीं सचिव की गैरमौजूदगी और बैठक के विरोध ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त ऑडिटर ने जैसे ही दस्तावेजों की मांग की, सोसाइटी के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई। सोसाइटी के अध्यक्ष बलवंत सिंह का कहना है कि जीबीएम का सचिव द्वारा विरोध किया गया और उन्होंने बैठक में शामिल होना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि सोसाइटी में पारदर्शिता बनाए रखने और निवासियों का विश्वास मजबूत करने के लिए नियमित रूप से जीबीएम आयोजित होना आवश्यक है।
वित्तीय अनियमितता पर उठ रहे सवाल :
वहीं निवासियों ने सुझाव दिया कि डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त ऑडिटर से ही ऑडिट कराया जाए ताकि एओऐ के वित्तीय कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आरोप है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान एओए के खाते से हुए कुछ वित्तीय लेनदेन और बड़े खर्चों को लेकर कई सवाल लंबे समय से बने हुए हैं। यदि किसी स्तर पर पदों का दुरुपयोग या सोसाइटी के धन का गलत इस्तेमाल हुआ है तो वह स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा। वहीं सचिव ऐश्वर्य कुमार पांडेय ने बताया कि वर्तमान अध्यक्ष बोर्ड की निर्धारित प्रक्रियाओं और मानक प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य करने के बजाय अपने दलगत एजेंडे के अनुसार कार्य कर रहे हैं। तथाकथित जीबीएम अमान्य थी और उसकी कोई आधिकारिक कार्यवाही या रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पारदर्शिता बनाम टकराव की इस जंग में अब सोसाइटी की राजनीति खुलकर सामने आ गई है। जीबीएम (जनरल बोर्ड मीटिंग) में जहां निवासियों ने ऑडिट की मांग को लेकर आवाज बुलंद की, वहीं सचिव की गैरमौजूदगी और बैठक के विरोध ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त ऑडिटर ने जैसे ही दस्तावेजों की मांग की, सोसाइटी के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई। सोसाइटी के अध्यक्ष बलवंत सिंह का कहना है कि जीबीएम का सचिव द्वारा विरोध किया गया और उन्होंने बैठक में शामिल होना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने कहा कि सोसाइटी में पारदर्शिता बनाए रखने और निवासियों का विश्वास मजबूत करने के लिए नियमित रूप से जीबीएम आयोजित होना आवश्यक है।
वित्तीय अनियमितता पर उठ रहे सवाल :
वहीं निवासियों ने सुझाव दिया कि डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नियुक्त ऑडिटर से ही ऑडिट कराया जाए ताकि एओऐ के वित्तीय कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। आरोप है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान एओए के खाते से हुए कुछ वित्तीय लेनदेन और बड़े खर्चों को लेकर कई सवाल लंबे समय से बने हुए हैं। यदि किसी स्तर पर पदों का दुरुपयोग या सोसाइटी के धन का गलत इस्तेमाल हुआ है तो वह स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगा। वहीं सचिव ऐश्वर्य कुमार पांडेय ने बताया कि वर्तमान अध्यक्ष बोर्ड की निर्धारित प्रक्रियाओं और मानक प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य करने के बजाय अपने दलगत एजेंडे के अनुसार कार्य कर रहे हैं। तथाकथित जीबीएम अमान्य थी और उसकी कोई आधिकारिक कार्यवाही या रिकॉर्ड दर्ज नहीं किया गया।
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