{"_id":"6a998e411f8e27eac40a611c","slug":"dfgfds-grnoida-news-c-23-1-lko1064-104961-2026-09-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: गवाहों के मुकरने से पॉक्सो मामले में आरोपी बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: गवाहों के मुकरने से पॉक्सो मामले में आरोपी बरी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
(अदालत से)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पॉक्सो मामले में सत्र अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। मामले के अनुसार 1 मई 2013 को शिकायतकर्ता की तत्कालीन 13 वर्षीय नाबालिग बेटी अकेली घर में थी। तभी पड़ोसी ने उसे जबरन पड़ोस के घर ले जाकर छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर परिजन मौके पर पहुंचे। जिसे देख आरोपी भाग निकला। इसी आधार पर थाना फेज-2 में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी और अगस्त 2024 में आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से दो गवाह पेश किए गए। पीड़िता की मां ने बयान दिया कि तहरीर अन्य व्यक्ति से लिखवाई गई थी। बचाव पक्ष ने उनसे जिरह करना भी जरूरी नहीं समझा। स्वयं पीड़िता ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि पुलिस ने उसका कोई बयान नहीं लिया था और आरोपी ने उसके साथ कोई छेड़छाड़ या दुर्व्यवहार नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। यह तथ्य साबित है, लेकिन घटना के मूल तथ्यों को लेकर दोनों प्रमुख गवाह मुकर गए, इसलिए संदेह से परे अपराध साबित नहीं हो सका। आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। पॉक्सो मामले में सत्र अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया। मामले के अनुसार 1 मई 2013 को शिकायतकर्ता की तत्कालीन 13 वर्षीय नाबालिग बेटी अकेली घर में थी। तभी पड़ोसी ने उसे जबरन पड़ोस के घर ले जाकर छेड़छाड़ करने का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर परिजन मौके पर पहुंचे। जिसे देख आरोपी भाग निकला। इसी आधार पर थाना फेज-2 में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की गई थी और अगस्त 2024 में आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से दो गवाह पेश किए गए। पीड़िता की मां ने बयान दिया कि तहरीर अन्य व्यक्ति से लिखवाई गई थी। बचाव पक्ष ने उनसे जिरह करना भी जरूरी नहीं समझा। स्वयं पीड़िता ने अदालत में बयान देते हुए कहा कि पुलिस ने उसका कोई बयान नहीं लिया था और आरोपी ने उसके साथ कोई छेड़छाड़ या दुर्व्यवहार नहीं किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। यह तथ्य साबित है, लेकिन घटना के मूल तथ्यों को लेकर दोनों प्रमुख गवाह मुकर गए, इसलिए संदेह से परे अपराध साबित नहीं हो सका। आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया।
विज्ञापन