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Noida News: भारी वाहनों में लगेगी डिवाइस, 70% तक कम होगा प्रदूषण
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दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की अगुवाई में पायलट प्रोजेक्ट जल्द होगा शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार ने भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाया है। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) की अगुवाई में 30 एडवांस्ड कैटेलिटिक कन्वर्टर आधारित रेट्रोफिटिंग डिवाइस लगाने का पायलट प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा। ये देश में पहला ऐसा प्रयास है जो तकनीक के जरिये दिल्ली की हवा को साफ करने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि ये तकनीक पुराने वाहनों से प्रदूषण कम कर सकती है।
उन्होंने कहा कि ये डिवाइस भारी वाहनों के एग्जॉस्ट में लगेगी जो बीएस-3 और बीएस-4 गाड़ियों से निकलने वाले हानिकारक कणों और गैसों को 70 फीसदी तक कम कर सकती है। टेस्टिंग से इनकी उपयोगिता साबित हो चुकी है और 9,000 किलोमीटर से ज्यादा की फील्ड टेस्टिंग भी पूरी हो गई है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली को प्रदूषण नियंत्रण में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डीपीसीसी पायलट प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी
डीपीसीसी को इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी बनाया गया है। ये पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, डीजेबी और हेल्थ जैसे विभागों के साथ मिलकर बीएस-4 या उससे पुराने सरकारी वाहनों की सूची तैयार करेगी। प्रोजेक्ट के परिणामों की जांच आईआईटी दिल्ली या आईसीएटी के साथ की जाएगी। अगर यह पायलट सफल रहा तो इसे दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
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दिल्ली को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ नियमों का पालन नहीं, बल्कि दिल्ली को स्वच्छ, स्वस्थ और भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास है। सही तकनीक, मजबूत इरादे और अच्छी गवर्नेंस से प्रदूषण जैसी बड़ी चुनौतियों का हल निकाला जा सकता है। रोजगार और पर्यावरण के संतुलन के लिए दिल्ली सरकार ने ये इनोवेटिव समाधान चुना है। ये तकनीक न सिर्फ हवा साफ करेगी बल्कि परिवहन से जुड़े रोजगार को भी बचाएगी। कई कंपनियां और इनोवेटर इस प्रोजेक्ट के लिए अपने प्रोडक्ट पेश कर रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली सरकार ने भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाया है। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (डीपीसीसी) की अगुवाई में 30 एडवांस्ड कैटेलिटिक कन्वर्टर आधारित रेट्रोफिटिंग डिवाइस लगाने का पायलट प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा। ये देश में पहला ऐसा प्रयास है जो तकनीक के जरिये दिल्ली की हवा को साफ करने की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकता है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि ये तकनीक पुराने वाहनों से प्रदूषण कम कर सकती है।
उन्होंने कहा कि ये डिवाइस भारी वाहनों के एग्जॉस्ट में लगेगी जो बीएस-3 और बीएस-4 गाड़ियों से निकलने वाले हानिकारक कणों और गैसों को 70 फीसदी तक कम कर सकती है। टेस्टिंग से इनकी उपयोगिता साबित हो चुकी है और 9,000 किलोमीटर से ज्यादा की फील्ड टेस्टिंग भी पूरी हो गई है। यह प्रोजेक्ट दिल्ली को प्रदूषण नियंत्रण में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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डीपीसीसी पायलट प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी
डीपीसीसी को इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी बनाया गया है। ये पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, डीजेबी और हेल्थ जैसे विभागों के साथ मिलकर बीएस-4 या उससे पुराने सरकारी वाहनों की सूची तैयार करेगी। प्रोजेक्ट के परिणामों की जांच आईआईटी दिल्ली या आईसीएटी के साथ की जाएगी। अगर यह पायलट सफल रहा तो इसे दिल्ली के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है।
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दिल्ली को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य
मंत्री ने कहा कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ नियमों का पालन नहीं, बल्कि दिल्ली को स्वच्छ, स्वस्थ और भविष्य के लिए तैयार करने का प्रयास है। सही तकनीक, मजबूत इरादे और अच्छी गवर्नेंस से प्रदूषण जैसी बड़ी चुनौतियों का हल निकाला जा सकता है। रोजगार और पर्यावरण के संतुलन के लिए दिल्ली सरकार ने ये इनोवेटिव समाधान चुना है। ये तकनीक न सिर्फ हवा साफ करेगी बल्कि परिवहन से जुड़े रोजगार को भी बचाएगी। कई कंपनियां और इनोवेटर इस प्रोजेक्ट के लिए अपने प्रोडक्ट पेश कर रहे हैं।