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अमर उजाला शिक्षक सम्मान 2024: डिप्टी CM बोले- छात्रों का हो चहुंमुखी विकास, मांगने की जगह बनें नौकरी देने वाले

Sun, 08 Sep 2024 07:59 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 08 Sep 2024 07:59 AM IST
सार

नोएडा सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह के दूसरे संस्करण में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, शिक्षक अपने छात्र के लिए कुम्हार की तरह है। छोटी उम्र में मां-बाप अगर बच्चों में संस्कार डालते हैं, तो शिक्षक यह बताता है कि बच्चे को दुनिया में काम कैसे करना है।

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Deputy Chief Minister of Uttar Pradesh Brajesh Pathak attended the Amar Ujala Teacher Award 2024
अमर उजाला शिक्षक सम्मान 2024 कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक सम्बोधित कर - फोटो : विवेक निगम

विस्तार

आज के दौर में शिक्षकों को अपने छात्रों का चहुंमुखी विकास करना है। हर विधा में पारंगत छात्र तरक्की करने के साथ नौकरी देने वाला भी बनेगा। उसको खुद के लिए नौकरी नहीं मांगनी पड़ेगी। शनिवार को नोएडा सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित अमर उजाला शिक्षक सम्मान समारोह के दूसरे संस्करण में बतौर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने यह बात कही। समारोह में नोएडा, ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद के 143 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कक्षा 8वीं-12वीं के करीब एक लाख विद्यार्थियों ने मतदान के जरिये 1,000 शिक्षकों में से इनका चयन किया था। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक व उनके परिजन मौजूद रहे।

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खचाखच भरे हॉल में ब्रजेश पाठक ने कहा, शिक्षक अपने छात्र के लिए कुम्हार की तरह है। छोटी उम्र में मां-बाप अगर बच्चों में संस्कार डालते हैं, तो शिक्षक यह बताता है कि बच्चे को दुनिया में काम कैसे करना है। ब्रजेश पाठक ने कहा, इस समय अंकतालिका में शीर्ष स्थान पाने के लिए भागमभाग मची है। हर कोई शीर्ष पर रहना चाहता है। यह कुछ और नहीं, नौकरी पाने के लिए है। यह ठीक है कि एक छात्र विज्ञान पढ़े, गणित पढ़े, जीव विज्ञान पढ़े, लेकिन यह ठीक नहीं कि वह सिर्फ इन विषयों को ही पढ़े। आज इस तरह की शिक्षा की जरूरत है, जिसमें छात्र को सब कुछ आए। उदाहरणों के साथ पाठक ने बताया कि आज ऐसे बहुत से कामयाब लोग हैं, जो पहले बनना कुछ चाहते थे, लेकिन बन कुछ और गए। मौजूदा प्रोफेशन में कमाई के साथ उनको सम्मान भी बहुत ज्यादा मिला।

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ब्रजेश पाठक के मुताबिक, आज बच्चों के चहुंमुखी विकास की जरूरत है। देश-दुनिया में क्या हो रहा है, उसे पता होना चाहिए। जिसको सब-कुछ पता होगा, उसको नौकरी ढूंढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह नौकरी देने वाला बनेगा। शिक्षक की भूमिका इसी में अहम है। वही उसको गढ़ता है, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। कबीर का उदाहरण देते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि उनके गुरु रामदास ने गंगा के तट की सीढ़ियों पर कबीर के कान में कुछ कहा, जिनसे बगैर अक्षर ज्ञान की उनकी रचनाएं कालजयी हो गईं। इनको पढ़कर लगता है कि यह आज के लिए ही लिखी गईं हैं।

मां-बाप ईश्वर तुल्य, बच्चे में डालें संस्कार
ब्रजेश पाठक ने कहा, माता-पिता धरती पर जीवित ईश्वर हैं। शिक्षक को अपने बच्चों में इस तरह का संस्कार डालना है कि वह अपने मां-बाप की ईश्वर की तरह कद्र करें। आंख खोलने के बाद बच्चे की पहली शिक्षक मां है। उसकी गोद में ही संस्कार पलते हैं। वहीं, दूसरा गुरु पिता है। मां अगर खुद को भीगे बिस्तर में रखकर बच्चे को अच्छी नींद सुलाती है, तो पिता भूखे रहकर, अपने जज्बात को कैद कर बच्चे को बेहतर शिक्षा दिलाने लखनऊ व दिल्ली भेजता है।

अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि अफसोसजनक यह है कि बड़े होने पर बच्चे मां-बाप से दूरी बना लेते हैं। दिल्ली-मुंबई में करिअर बना रहे बच्चों के पास जब मां-बाप पहुंचते हैं, तो उनको एक छोटे से कमरे में रख दिया जाता है। दोस्तों से मुलाकात नहीं करवाई जाती। जबकि हमारा संस्कार यह नहीं है। हमें समझना होगा कि मां-बाप हमारे गौरव हैं। एक शिक्षक को इस तरह की सीख अपने बच्चों को देनी है।

गाइडेड मिसाइल आज की, शब्दभेदी बाण सहस्राब्दियों पुराने
ब्रजेश पाठक ने कहा कि हमारा इतिहास बहुत समृद्ध रहा है। गाइडेड मिसाइल मौजूदा दौर का विकास है, जबकि शब्दभेदी बाण सहस्राब्दियों पहले हमारे यहां थे। पाठक के मुताबिक, विदेशी आक्रांताओं ने जब वेद-पुराण जलाने शुरू किए तो तत्कालीन ऋषियों ने अपने शिष्यों से गुरु दक्षिणा के तौर पर मांग की थी कि वह अपने ग्रंथों को कंठस्थ करें और पांच-पांच लोगों तक इसे पहुंचाएंगे। यह काम तत्कालीन छात्रों ने ठीक से किया। तभी हमारी संस्कृति और विचारधारा सहस्राब्दियों से बनी हुई है।

आक्रांताओं के हमलों के बाद भी नहीं टूटे हमारे संस्कार
ब्रिटिश शासन का जिक्र करते हुए ब्रजेश पाठक ने कहा कि ब्रिटिश शिक्षाविद लार्ड मैकाले ने कहा था कि जब तक वह भारतीयों की शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा नहीं कर लेते, भारतीयों को कब्जे में लाना मुमकिन नहीं होगा। इसके बाद भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बहुत से बदलाव किए गए। इसको लागू करने के अनवरत प्रयास भी हुए, लेकिन उनको पूरी कामयाबी नहीं मिली। आज भी हम बिना स्नान किए भोजन नहीं करते, बड़े-बुजुर्गों का पैर छूते हैं, जो घर आता है, उसे खाना खिलाते हैं। किसी संस्थान की ट्रेनिंग से नहीं, यह सब हमारी संस्कृति से, संस्कारों से हममें आता है।

मोदी सरकार ने किए शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव
ब्रजेश पाठक ने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षकों के साथ हर कदम पर खड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने नई शिक्षा नीति से देश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव किए हैं। इसमें मातृभाषा में शिक्षा देने की व्यवस्था की गई है। छात्रों की प्रतिभा को हर स्तर पर निखारा जा रहा है। इसमें छात्र का हर तरह से विकास होगा।

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