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सिलखो में शराब का ठेका अलॉट नहीं करने की मांग
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तावडू। उपमंडल के गांव सिलखो में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त और आबकारी एवं कराधान आयुक्त (डीईटीसी) रोजकामेव जिला नूंह से नए सत्र में शराब का ठेका अलॉट नहीं करने की मांग की है। डीईटीसी ने ग्रामीणों को नियमों और शर्तों के अनुसार कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
गांव सिलखो निवासी शाहिद, रईस, शेरू, समसू, हाजी मोरमल, नसरुद्दीन, अब्दुल जब्बार, सत्तार आदि ने बताया कि गांव में एक शराब का ठेका खुला हुआ है। शराब का ठेका होने के कारण लोग दिन भर नशे के आदी हो रहे हैं। गरीब, मजदूर वर्ग में आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। यदि गांव से ठेका हटा दिया जाएगा तो धीरे-धीरे लोगों की आदत भी बदल सकती है। गांव के युवाओं पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी परेशान है। उन्होंने आगामी सत्र 2022-23 में गांव में शराब का ठेका न खुलवाने को लेकर गत सप्ताह ग्रामसभा की एक बैठक का आयोजन कर सर्वसम्मति से फैसला लिया कि गांव में शराब का ठेका नहीं खोलने देेंगे। सैकड़ों ग्रामीणों ने एक हस्ताक्षर युक्त पत्र विभाग के डीईटीसी को देकर आगामी सत्र में शराब का ठेका अलॉट नहीं करने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, नियमानुसार जिस गांव के 10 प्रतिशत मतदाता शराब की दुकान खोलने का विरोध करते हो, उस गांव में शराब ठेका अलॉट नहीं किया जा सकता है। जबकि गांव के 80 प्रतिशत ग्रामीण ठेका खुलने का विरोध कर रहे हैं।
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गांव सिलखो निवासी शाहिद, रईस, शेरू, समसू, हाजी मोरमल, नसरुद्दीन, अब्दुल जब्बार, सत्तार आदि ने बताया कि गांव में एक शराब का ठेका खुला हुआ है। शराब का ठेका होने के कारण लोग दिन भर नशे के आदी हो रहे हैं। गरीब, मजदूर वर्ग में आर्थिक और पारिवारिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। यदि गांव से ठेका हटा दिया जाएगा तो धीरे-धीरे लोगों की आदत भी बदल सकती है। गांव के युवाओं पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी परेशान है। उन्होंने आगामी सत्र 2022-23 में गांव में शराब का ठेका न खुलवाने को लेकर गत सप्ताह ग्रामसभा की एक बैठक का आयोजन कर सर्वसम्मति से फैसला लिया कि गांव में शराब का ठेका नहीं खोलने देेंगे। सैकड़ों ग्रामीणों ने एक हस्ताक्षर युक्त पत्र विभाग के डीईटीसी को देकर आगामी सत्र में शराब का ठेका अलॉट नहीं करने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, नियमानुसार जिस गांव के 10 प्रतिशत मतदाता शराब की दुकान खोलने का विरोध करते हो, उस गांव में शराब ठेका अलॉट नहीं किया जा सकता है। जबकि गांव के 80 प्रतिशत ग्रामीण ठेका खुलने का विरोध कर रहे हैं।
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