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सलाम आले कुम शब्द समुदाय विशेष के लिए था

Thu, 02 Sep 2021 12:45 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 12:45 AM IST
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Delhi Police says Salaam Aale Kum was for the particular community
नई दिल्ली। जेएनयू छात्र शरजील इमाम ने अपने भाषण की शुरुआत सलाम आलेकुम से की थी। इससे पता चलता कि उसका भड़काऊ भाषण समुदाय विशेष के लिए था न कि आम जनता के लिए। दिल्ली पुलिस की ओर से ये दलील बुधवार को अदालत में दी गई।
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दिल्ली पुलिस की ओर से शरजीम इमाम के खिलाफ देशद्रोह मामले में जिरह करते हुए विशेष अधिवक्ता अमित प्रसाद ने ये टिप्पणी की। ये मामला वर्ष 2019 में दो विश्वविद्यालयों में दिए उन दो भाषणों के आधार दर्ज किया गया था जिसमें उसने कथित रूप से असम और शेष पूर्वोत्तर को भारत से काटने की कथित धमकी दी थी।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष अमित प्रसाद ने कहा कि इमाम ने अराजकता फैलाने की कोशिश की और विभाजनकारी भाषण सीएए-एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिए।
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विशेष अधिवक्ता ने अलीगढ़ में 16 दिसंबर को दिए गया इमाम का भाषण पढ़ते हुए कहा कि उसने इसकी शुरुआत सलाम आले कुम कहकर की जिससे दिखता है कि ये भाषण आम लोगों के लिए नहीं बल्कि समुदाय विशेष के लिए था। समुदाय विशेष के लोगों से ही आह्वान किया गया था। ये भाषण निसंदेह विभाजनकारी था। इमाम अपने भाषण से अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा था।
ये कथित भाषण इमाम ने 13 दिसंबर 2019 को जामिया और 16 दिसंबर 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिए थे। इमाम जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में है।
करीब तीन घंटे चली सुनवाई के दौरान अमित प्रसाद ने कहा कि इमाम कोई मामूली जेबकतरा या ड्रग तस्कर नहीं है। वह एक उत्तम वक्ता है और दंगों पर थीसिस लिखी है। वह जानता है कि आलोचनात्मक लोग किस तरह साथ आ सकते हैं।
प्रदर्शनों के दौरान इमाम के भाषणों की हर पंक्ति को विशेष अधिवक्ता प्रसाद ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान पढ़कर सुनाया। प्रसाद ने भाषण के उस हिस्से को भी पढ़ा जिसमें कहा गया था कि ‘असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। वे (सरकार) हमारी बात तब ही सुनेगी जब असम को बाकी देश से काट दिया जाएगा। आप असम में मुस्लिमों की दशा से परिचित हैं।’
दिल्ली पुलिस इस मामले में इमाम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। इसमें कहा गया है कि इमाम ने कथित रूप से केंद्र सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और असंतोष भड़काने वाले भाषण दिए। उसने लोगों को भड़काया जिससे दिसंबर 2019 में हिंसा हुई।

पुलिस का आरोप है कि इमाम ने सीएए की आड़ में समुदाय विशेष के लोगों को प्रमुख शहरों के हाईवे रोकने और चक्का जाम के लिए कहा। उसने सीएए विरोध की आड़ में असम और शेष पूर्वोत्तर को देश से काटने के लिए लोगों से कहा। - एजेंसी
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