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आप-भाजपा की विफलताओं से अपराध की राजधानी बनी दिल्ली : कांग्रेस
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सुप्रिया ने कहा- हर घंटे चार महिलाओं से अपराध होना गंभीर स्थिति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में राजधानी में बढ़ते अपराध को लेकर भाजपा-आप को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 वर्षों में केंद्र और दिल्ली सरकार की असंवेदनशीलता व विफलताओं के कारण दिल्ली अपराधों की राजधानी बन गई है।
निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा का वादा कर सत्ता में आई केजरीवाल सरकार 11 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। हर घंटे चार महिलाओं के साथ अपराध व हर दिन 40 अपराध दर्ज होना गंभीर स्थिति है। केंद्र की भाजपा सरकार के अधीन पुलिस अपराधों को रोकने में नाकाम रही है। वर्ष 2014-2024 के बीच 18,285 हत्याएं और 17,956 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। हर साल औसत 5,894 अपहरण होते हैं, जिनमें से 2,812 बच्चे होते हैं। चोरी की औसत दर्ज 798.3 है, जो पूरे विश्व में सबसे अधिक है। बच्चों के खिलाफ अपराध का राष्ट्रीय औसत 36.6 है, जबकि दिल्ली की दर 134 है। महिलाओं के खिलाफ 85,000 मामले अदालतों में लंबित हैं, जिनका निपटारा मात्र 2.9 प्रतिशत हुआ है। भाजपा और आप सरकारें केवल आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रही हैं। केजरीवाल सरकार पुलिस पर जिम्मेदारी डालती है, जबकि केंद्र सरकार पुलिस की विफलताओं पर मौन है। दिल्ली की ध्वस्त कानून व्यवस्था और अपराधों की बढ़ती दर के लिए दोनों दल समान रूप से जिम्मेदार हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में राजधानी में बढ़ते अपराध को लेकर भाजपा-आप को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 वर्षों में केंद्र और दिल्ली सरकार की असंवेदनशीलता व विफलताओं के कारण दिल्ली अपराधों की राजधानी बन गई है।
निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा का वादा कर सत्ता में आई केजरीवाल सरकार 11 वर्षों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने में पूरी तरह विफल रही है। हर घंटे चार महिलाओं के साथ अपराध व हर दिन 40 अपराध दर्ज होना गंभीर स्थिति है। केंद्र की भाजपा सरकार के अधीन पुलिस अपराधों को रोकने में नाकाम रही है। वर्ष 2014-2024 के बीच 18,285 हत्याएं और 17,956 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए। हर साल औसत 5,894 अपहरण होते हैं, जिनमें से 2,812 बच्चे होते हैं। चोरी की औसत दर्ज 798.3 है, जो पूरे विश्व में सबसे अधिक है। बच्चों के खिलाफ अपराध का राष्ट्रीय औसत 36.6 है, जबकि दिल्ली की दर 134 है। महिलाओं के खिलाफ 85,000 मामले अदालतों में लंबित हैं, जिनका निपटारा मात्र 2.9 प्रतिशत हुआ है। भाजपा और आप सरकारें केवल आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेल रही हैं। केजरीवाल सरकार पुलिस पर जिम्मेदारी डालती है, जबकि केंद्र सरकार पुलिस की विफलताओं पर मौन है। दिल्ली की ध्वस्त कानून व्यवस्था और अपराधों की बढ़ती दर के लिए दोनों दल समान रूप से जिम्मेदार हैं।
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