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10वीं और 12वीं के परीक्षा कार्यक्रम का एलान
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नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षामंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के कार्यक्रम का एलान 2 फरवरी को करेगा। उन्होंने सीबीएसई स्कूलों में नई शिक्षा नीति को लागू करने पर प्रिंसिपलों के साथ आयोजित वेबिनार में यह जानकारी दी। सीबीएसई अपने अधिकारिक वेबसाइट पर डेटशीट अपलोड करेगा।
निशंक ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 में सीबीएसई के स्कूलों में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। छात्रों को अपनी मातृभाषा में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की आजादी होगी। छात्रों में बोर्ड परीक्षा का तनाव दूर करने के लिए योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ेगी। इससे उनमें रट्टा लगाकर पढ़ाई की आदत भी दूर होगी। बोर्ड परीक्षा के छात्रों को इंप्रवूमेंट परीक्षा की सुविधा भी मिलेगी। यदि किसी छात्र को अपने अंक कम लगते हैं तो वे दोबारा परीक्षा दे पाएंगे। नई शिक्षा नीति के तहत छठीं कक्षा से वोकेशनल ट्रेनिंग भी मिलनी शुरू हो जाएगी। मार्केट डिमांड के आधार पर छात्र अपने कौशल का विकास कर पाएंगे। देश में इस नीति के चलते स्कूली शिक्षा में सबसे बड़ा बदलाव दिखेगा। स्कूली शिक्षा में सुधार की शुरुआत होने जा रही है।
इससे पहले निशंक 31 दिसंबर को बोर्ड परीक्षा की डेट की पहले ही घोषणा कर चुके हैं। इसके तहत 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा 4 मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेंगी और दोनों कक्षाओं के परिणाम 15 जुलाई 2021 तक घोषित कर दिए जाएंगे। हर साल बोर्ड परीक्षाएं आम तौर पर फरवरी-मार्च में शुरू होती हैं और मई में नतीजा आ जाता था लेकिन कोरोना चलते इसमें इस बार देरी हो रही है।
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45 सालों का रिकार्ड ऑनलाइन होगा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सीबीएसई अपने छात्रों के 1975 से अब तक 45 साल के रिकॉर्ड को डिजिटल या ऑनलाइन करने जा रहा है। इससे देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र अपने नजदीकी बोर्ड कार्यालय में जाकर अपनी जानकारी जुटा सकता है। उसे मुख्यालय या बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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निशंक ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 में सीबीएसई के स्कूलों में कई बदलाव देखने को मिलेंगे। छात्रों को अपनी मातृभाषा में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की आजादी होगी। छात्रों में बोर्ड परीक्षा का तनाव दूर करने के लिए योग्यता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ेगी। इससे उनमें रट्टा लगाकर पढ़ाई की आदत भी दूर होगी। बोर्ड परीक्षा के छात्रों को इंप्रवूमेंट परीक्षा की सुविधा भी मिलेगी। यदि किसी छात्र को अपने अंक कम लगते हैं तो वे दोबारा परीक्षा दे पाएंगे। नई शिक्षा नीति के तहत छठीं कक्षा से वोकेशनल ट्रेनिंग भी मिलनी शुरू हो जाएगी। मार्केट डिमांड के आधार पर छात्र अपने कौशल का विकास कर पाएंगे। देश में इस नीति के चलते स्कूली शिक्षा में सबसे बड़ा बदलाव दिखेगा। स्कूली शिक्षा में सुधार की शुरुआत होने जा रही है।
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इससे पहले निशंक 31 दिसंबर को बोर्ड परीक्षा की डेट की पहले ही घोषणा कर चुके हैं। इसके तहत 10वीं और 12वीं कक्षा की परीक्षा 4 मई से शुरू होकर 10 जून तक चलेंगी और दोनों कक्षाओं के परिणाम 15 जुलाई 2021 तक घोषित कर दिए जाएंगे। हर साल बोर्ड परीक्षाएं आम तौर पर फरवरी-मार्च में शुरू होती हैं और मई में नतीजा आ जाता था लेकिन कोरोना चलते इसमें इस बार देरी हो रही है।
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45 सालों का रिकार्ड ऑनलाइन होगा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सीबीएसई अपने छात्रों के 1975 से अब तक 45 साल के रिकॉर्ड को डिजिटल या ऑनलाइन करने जा रहा है। इससे देश के किसी भी कोने में बैठा छात्र अपने नजदीकी बोर्ड कार्यालय में जाकर अपनी जानकारी जुटा सकता है। उसे मुख्यालय या बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।