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Noida News: खतरा बरकरार, चंडीगढ़ गांव की पुलिया के ऊपर से बह रहा बाढ़ का पानी
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-लोग जान जोखिम में डालकर बहते पानी के बीच मोटरसाइकिलों से पार कर रहे पुलिया
माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। यमुना नदी का कटान होने से रबूपुरा के चंडीगढ़ गांव का संपर्क अभी भी अन्य जिले से कटा हुआ है। यमुना नदी की एक धारा गांव को जोड़ने वाले इस रास्ते पर बह रही है। गांव पहुंचने के रास्ते में बनी पुलिया के करीब आधे फुट ऊपर से अभी भी बाढ़ का पानी बह रहा है। इस रास्ते पर गांव के लोग पैदल और बाइकों से निकल रहे हैं। ऐसे में कभी भी दुर्घटना हो सकती है।
यमुना नदी के नजदीक रबूपुरा क्षेत्र के गांव चंडीगढ़ स्थित है। लगभग 15 से 20 वर्ष पूर्व यमुना नदी इस रास्ते से चंडीगढ़ गांव के नजदीक से होकर गुजरती थी। बाद में बंधा लगने से नदी ने गांव से दो से तीन किलोमीटर दूर रास्ता बना लिया। यमुना में बाढ़ आने पर नदी की एक धारा वापस इसी रास्ते का रुख कर लेती है। हालांकि, प्रशासन ने इस बार रेत की बोरियां लगाकर इस रास्ते को बंद करने का प्रयास किया था। एक सितंबर को हथिनी कुंड बैराज से सवा तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चार सितंबर की सुबह यमुना की धारा ने अवरोध तोड़कर इस ओर रुख कर लिया। इसके बाद से पानी पुलिया के ऊपर से जाने लगा।
इसके बाद से जिला प्रशासन ने बेरिकेड लगाकर इस रास्ते को बंद करा दिया था। मौके पर पहुंची एनडीआरएफ टीम ने लगभग 350 ग्रामीणों को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थान ले जाने की पेशकश की थी लेकिन ग्रामीण नहीं माने। शुरू में दो दिन एनडीआरएफ टीम भी मौजूद रही, बाढ़ का पानी कम हुआ तो एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें भी वहां से चली आईं। पिछले दो दिनों से बाढ़ का पानी थोड़ा कम हुआ तो ग्रामीणों ने इस रास्ते से पैदल और बाइकों से निकलना शुरू कर दिया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
यमुना सिटी। यमुना नदी का कटान होने से रबूपुरा के चंडीगढ़ गांव का संपर्क अभी भी अन्य जिले से कटा हुआ है। यमुना नदी की एक धारा गांव को जोड़ने वाले इस रास्ते पर बह रही है। गांव पहुंचने के रास्ते में बनी पुलिया के करीब आधे फुट ऊपर से अभी भी बाढ़ का पानी बह रहा है। इस रास्ते पर गांव के लोग पैदल और बाइकों से निकल रहे हैं। ऐसे में कभी भी दुर्घटना हो सकती है।
यमुना नदी के नजदीक रबूपुरा क्षेत्र के गांव चंडीगढ़ स्थित है। लगभग 15 से 20 वर्ष पूर्व यमुना नदी इस रास्ते से चंडीगढ़ गांव के नजदीक से होकर गुजरती थी। बाद में बंधा लगने से नदी ने गांव से दो से तीन किलोमीटर दूर रास्ता बना लिया। यमुना में बाढ़ आने पर नदी की एक धारा वापस इसी रास्ते का रुख कर लेती है। हालांकि, प्रशासन ने इस बार रेत की बोरियां लगाकर इस रास्ते को बंद करने का प्रयास किया था। एक सितंबर को हथिनी कुंड बैराज से सवा तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चार सितंबर की सुबह यमुना की धारा ने अवरोध तोड़कर इस ओर रुख कर लिया। इसके बाद से पानी पुलिया के ऊपर से जाने लगा।
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इसके बाद से जिला प्रशासन ने बेरिकेड लगाकर इस रास्ते को बंद करा दिया था। मौके पर पहुंची एनडीआरएफ टीम ने लगभग 350 ग्रामीणों को वहां से निकालकर सुरक्षित स्थान ले जाने की पेशकश की थी लेकिन ग्रामीण नहीं माने। शुरू में दो दिन एनडीआरएफ टीम भी मौजूद रही, बाढ़ का पानी कम हुआ तो एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें भी वहां से चली आईं। पिछले दो दिनों से बाढ़ का पानी थोड़ा कम हुआ तो ग्रामीणों ने इस रास्ते से पैदल और बाइकों से निकलना शुरू कर दिया है।
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