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दादरी बनेगा भविष्य का इंडस्ट्रियल हब

Sat, 10 Jul 2021 01:30 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jul 2021 01:30 AM IST
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Dadri will become the industrial hub of the future
नोएडा। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (डीएनजीआईआर) या नए नोएडा में बुलंदशहर के 60 और ग्रेटर नोएडा के 20 गांव सहित कुल 80 गांवों को विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यह नोएडा से भी बड़ा क्षेत्र होगा।
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209 वर्ग किलोमीटर (20900 हेक्टेयर) में फैले निवेश क्षेत्र का मास्टर प्लान बनाने के लिए शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ नेहा शर्मा और दिल्ली के स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्ट (एसपीए) के निदेशक प्रो. पीएसएन राव ने करार किया है। 10 माह में मास्टर प्लान बनाकर प्रस्ताव देना होगा। प्राधिकरण और एसपीए के मुताबिक इसका सबसे ज्यादा फायदा दादरी को मिलेगा और भविष्य में यह एक इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित होगा। अधिकारियों का तर्क है कि दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर है, जो दादरी से मुंबई तक जाता है। इसी तरह से एक ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी है, जो अमृतसर से कोलकाता तक है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को जोड़ने के लिए खुर्जा से एक लाइन आ रही है जो दादरी से जुड़ेगी। दादरी पहले से ही डीएनजीआईआर का हिस्सा है।
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लिहाजा, यहां औद्योगिक गतिविधियों के लिए काफी संभावनाएं विकसित होंगी और भविष्य में दादरी इंडस्ट्रियल हब बन जाएगा। इसके अलावा नोएडा-ग्रेनो के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी गतिविधियों और उनके उत्पादों को भी वाया दादरी फ्रेट कॉरिडोर से देश के दूसरे हिस्सों में ले जाने में मदद मिलेगी। दादरी के आसपास कृषि योग्य जमीन है। यहां मैनपावर भी मिलेगी जो औद्योगिक कामकाज के लिए बेहतर विकल्प है। यहां संसाधन भी बढ़िया है। ग्रेटर नोएडा की ओर से पहले से ही यहां लॉजिस्टिक हब, बोड़ाकी में मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब और ग्रेटर नोएडा में इंटीग्रेटेड टाउनशिप पर काम चल रहा है। अभी योजना को जमीन पर उतरना बाकी है। यह सब कुछ दादरी को इंडस्ट्रियल हब बनाने में सकारात्मक साबित होगा। सर्वे के मुताबिक डीएनजीआईआर का 80 प्रतिशत क्षेत्र खाली पड़ा है। करार के मौके पर प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी के अलावा एसपीए के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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नया नोएडा 2040 तक देगा12 लाख रोजगार
नोएडा। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र के अंतर्गत नया नोएडा में 2040 तक 12 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। निवेश क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों से इस तरह के रोजगार का सृजन होगा।
दरअसल, निवेश क्षेत्र को विकसित करने का मकसद भारत की मैन्यूफैक्चरिंग व सर्विस इंडस्ट्री के आधार को बढ़ाना है। इसे ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग व ट्रेडिंग हब के रूप में विकसित करना है। इसके सहारे शहरों का विकास होगा। अधिकारियों का कहना है यहां दूसरा शिकागो विकसित करने का प्रयास होगा। यहां फूड इंडस्ट्री लगाई जा सकती है। दो इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हब है। लिहाजा, यहां लॉजिस्टिक के लिए काफी संभावना है। वेयर हाउस होगा व फूड प्रोपेसिंग की अच्छी संभावना है। उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए योजना बनेगा। पर्यावरण को भी ध्यान में रखना होगा। एनसीआर का क्षेत्रीय प्लान पहले ही बना हुआ है। यहां आसपास का एरिया पहले से ही विकसित है। लिहाजा, निवेश क्षेत्र को इस तरह विकसित करना है कि यहां सबसे ज्यादा निवेशक आकर्षित हों।
लैंड पूलिंग से 80 गांव विकसित करने की तलाशी जाएंगी संभावना
नोएडा। प्राधिकरण और स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट एंड प्लानिंग के बीच करार के दौरान लैंड पूलिंग पर नए नोएडा के 80 गांव विकसित करने के संकेत मिले। हालांकि, अंतिम फैसला मास्टर प्लान बनाने के बाद ही होगा।
प्रो. पीएसएन राव ने बताया कि जमीन को विकसित करने के दौरान ‘सबका साथ सबका विकास’ की नीति पर चलना होगा। जमीन किसान की होगी तो उनको भी फायदा मिलना चाहिए। ऐसे में लैंड पूलिंग नीति बेहतर साबित हो सकती है। इससे किसानों को भी फायदा होगा। पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के निवेश पर ध्यान देना होगा। वहीं, प्राधिकरण के महाप्रबंधक नियोजन इश्तियाक अहमद ने कहा कि पीपीपी मॉडल पर भी प्रोजेक्ट को विकसित कराने को लेकर प्रयास किया जाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कितना पैसा खर्च होगा। यह पैसा कहां से आएगा। इन सभी बिंदुओं पर भी मास्टर प्लान बनाते समय सोचा जाएगा। बिल्डरों की ओर से जमीन का अधिग्रहण कर विकसित करने की भी बात चल रही है।

इन प्रमुख बिंदुओं पर तैयार होगा मास्टर प्लान
मास्टर प्लान बनाने के दौरान बाजार का विश्लेषण होगा और जवाब ढूंढे जाएंगे कि अमुक निवेश क्षेत्र को सफल बनाने के लिए क्या करना होगा। यहां लोगों से निवेश कराने को लेकर क्या योजना लाई जाएगी। लोगों को आकर्षित करने के लिए क्या नया होगा, जो दूसरे क्षेत्रों में निवेशकों को नहीं मिल रहा है। अलग-अलग इंडस्ट्री को लेकर भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी कि यहां फार्मा इंडस्ट्री या आईटी इंडस्ट्री या कोई अन्य इंडस्ट्री चल पाएगी या नहीं। नोएडा के अलावा दूसरे स्थानों के भी निवेश क्षेत्र का अध्ययन करेंगे और तुलनात्मक अध्ययन के बाद मास्टर प्लान बनेगा। इसके अलावा इंडस्ट्रियल एरिया को लेकर भी तैयारियां की जाएंगी। जहां-जहां भी इंडस्ट्री फेल साबित हुई है। वहां-वहां उन संभावनाओं का पता लगाएंगे। इसके बाद उनका अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए फिजिकल लेआउट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। योजना में मजदूर आएंगे तो उनके रहने के लिए आवास भी महत्वपूर्ण होगा। यह सब कुछ भी मास्टर प्लान में होगा। इस बारे में देश विदेश की इंडस्ट्री का भी अध्ययन होगा।
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