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मथुरा में 126 करोड़ का जमीन घोटला---जमीन खरीदने की सूचना देने में भी हुई गड़बड़ी
Updated Wed, 04 Jul 2018 01:24 AM IST
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मथुरा में 126 करोड़ का जमीन घोटाला
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के मथुरा क्षेत्र में 126 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में एक और तथ्य सामने आया है। प्राधिकरण में उस समय ओएसडी रहे वीपी सिंह ने खुद से ही दो कम प्रचलित समाचार पत्रों में जमीन खरीदने का विज्ञापन निकलवाया था। इस पर उस समय के सीईओ से अनुमति भी नहीं ली गई।
दरअसल, किसी भी जगह की जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण की तरफ से कम से कम दो प्रचलित समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना के रूप में विज्ञापन निकलवाया जाता है। इस पर सीईओ से अनुमति ली जाती है, लेकिन मथुरा में जमीन खरीदने से पहले जिन दो समाचार पत्रों में यह सूचना प्रकाशित की गई वे बहुत ही कम प्रचलित थे। उनको विज्ञापन देने से पहले सीईओ से अनुमति भी नहीं ली गई। ओएसडी रहे वीपी सिंह ने खुद ही हाथ से लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करके दो अखबारों को विज्ञापन जारी कर दिए। इस घोटाले में पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता के साथ ही पुलिस विवेचना में वीपी सिंह का नाम भी जुड़ चुका है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है। वहीं, यमुना प्राधिकरण ने पुलिस जांच के लिए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को तहसीलदार बीके गुप्ता को नोडल अधिकारी बना दिया है। जांच अधिकारी को जितने भी दस्तावेजों की जरूरत होगी, वे ही उपलब्ध कराएंगे।
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ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण के मथुरा क्षेत्र में 126 करोड़ रुपये के जमीन घोटाले में एक और तथ्य सामने आया है। प्राधिकरण में उस समय ओएसडी रहे वीपी सिंह ने खुद से ही दो कम प्रचलित समाचार पत्रों में जमीन खरीदने का विज्ञापन निकलवाया था। इस पर उस समय के सीईओ से अनुमति भी नहीं ली गई।
दरअसल, किसी भी जगह की जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण की तरफ से कम से कम दो प्रचलित समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना के रूप में विज्ञापन निकलवाया जाता है। इस पर सीईओ से अनुमति ली जाती है, लेकिन मथुरा में जमीन खरीदने से पहले जिन दो समाचार पत्रों में यह सूचना प्रकाशित की गई वे बहुत ही कम प्रचलित थे। उनको विज्ञापन देने से पहले सीईओ से अनुमति भी नहीं ली गई। ओएसडी रहे वीपी सिंह ने खुद ही हाथ से लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करके दो अखबारों को विज्ञापन जारी कर दिए। इस घोटाले में पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता के साथ ही पुलिस विवेचना में वीपी सिंह का नाम भी जुड़ चुका है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है। वहीं, यमुना प्राधिकरण ने पुलिस जांच के लिए संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को तहसीलदार बीके गुप्ता को नोडल अधिकारी बना दिया है। जांच अधिकारी को जितने भी दस्तावेजों की जरूरत होगी, वे ही उपलब्ध कराएंगे।
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