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दिल्ली दंगा: सोशल मीडिया रिपोर्टिंग हमेशा सनसनीखेज रहती है : कोर्ट

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 12:47 AM IST
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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर होने वाली मीडिया रिपोर्टिंग अक्सर सनसनीखेज होती है। यह तल्ख टिप्पणी अदालत ने दिल्ली दंगा आरोपियों की शिकायत पर सुनवाई करते हुए की। आरोपियों ने कहा था कि उनके खिलाफ अभी भी मीडिया ट्रायल जारी है। अदालत ने कहा हालांकि मीडिया को रिपोर्टिंग का अधिकार है लेकिन उसने अपने नजरिये में सतर्क व तार्किक रहना चाहिए। मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच और सुनवाई आरोपियों का मौलिक अधिकार है।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने कहा कि आरोपी व दोषी होने में बुनियादी अंतर है। पुलिस को पूरी तरह पक्षपाती दिखाने या आरोपी को दोषी के रूप में प्रदर्शित करना सही नहीं है। इससे आपराधिक न्याय प्रणाली प्रभावित होती है।

अदालत ने कहा उसका मानना है कि मीडिया कवरेज के लिए गाइडलाइन बनाना संभव नहीं है लेकिन हमारा मानना है कि रिपोर्टिंग करते समय कोर्ट का आदेश लिखने के स्थान पर सदैव घोषणा होनी चाहिए कि समाचार में प्रकाशित या प्रसारित वर्जन आरोपी या अभियोजन में से किसका है।
अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए कि कोर्ट के संज्ञान लेने से पहले या आरोपियों को कॉपी मिलने से पहले आरोपपत्र की सामग्री को हूबहू रिपोर्ट करना भी पक्षपातपूर्ण तथा अनुचित है। यह प्रचलन काफी परेशान करने वाला है। आरोपपत्र के विषय में रिपोर्टिंग करना एक बात है लेकिन उसकी सामग्री हूबहू छाप देना बिल्कुल अलग व दूसरी बात है। यहां पर मीडिया में लीक होने का सवाल खड़ा होता है। यह प्रचलन पूरी तरह पक्षपातपूर्ण तथा अनुचित है। अदालत उम्मीद करती है कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।
मामले की सुनवाई के दौरान दंगा मामले में आरोपी नताशा नरवाल व देवांगना कलिता के वकील अदित पुजारी ने दावा कि कोर्ट के संज्ञान लेने और आरोपियों को मिलने से पहले की मीडिया के पास पूरक आरोपपत्र की कॉपी है। मीडिया ट्रायल चल रहा है जिससे कलिता का निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित हो रहा है।
बचाव पक्ष के वकील ने ये भी कहा कि पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं थी। एक वीडियो में पुलिकर्मी सीसीटीवी तोड़ते दिख रहे हैं लेकिन इस पहलू की कोई जांच नहीं की गई। उन्होंने सभी पहलुओं की पुलिस जांच का निर्देश देने का आग्रह किया।
वहीं इसका विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि पुलिस जांच कैसे होनी चाहिए, आरोपी इसका निर्देश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा ऐसे भी कई संस्थान हैं जो पुलिस तथा जांच के खिलाफ अलग ही रिपोर्टिंग कर रहे हैं। उससे संबंधित साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान उमर खालिद ने कहा कि दंगों के एक साल बाद भी कई मीडिया रिपोर्ट में उन्हें दोषियों के रूप में दिखाया जा रहा है। खालिद ने कहा कि हर बार आरोपपत्र संज्ञान लेने से पहले जानबूझकर लीक किया गया और मीडिया ट्रायल करवाया गया जिससे उनका स्वतंत्र व निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित हुआ है। खालिद सैफी व शरजील इमाम ने भी ऐसे ही आरोप लगाए।
वहीं पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के वकील रिजवान ने कहा कि दंगों की बरसी पर ऐसी कई मीडिया रिपोर्ट छापी गई जिससे आरोपियों के अधिकार प्रभावित हुए और ये न्याय प्रणाली में हस्तक्षेप है। - एजेंसी
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