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Noida News: हत्या के आरोपियों की जमानत खारिज
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(अदालत)
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला अदालत ने दनकौर कोतवाली क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी राहुल, रोहित और अरुण कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले के तथ्य और परिस्थितियां, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फिलहाल जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं है।
मामला थाना दनकौर क्षेत्र का है। जहां 12 मई 2025 को वादी विजय के बेटे विशाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि विशाल जब मंडी श्याम नगर से फल खरीदकर अपनी मोटरसाइकिल से मधुवन एन्क्लेव घर लौट रहा था। तभी गेट के भीतर पहले से मौजूद बदमाशों ने उसे गोली मार दी थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने विशाल को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि मृतक के साथ पुरानी रंजिश को देखते हुए जानबूझकर फंसाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि घटना बदले की भावना से अंजाम दी गई और इसमें आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया साबित होती है। मामले के तथ्य, अपराध की गंभीरता और अभियुक्त की भूमिका को देखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है। इसलिए आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला अदालत ने दनकौर कोतवाली क्षेत्र में हुई हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी राहुल, रोहित और अरुण कुमार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि मामले के तथ्य और परिस्थितियां, उपलब्ध साक्ष्य और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फिलहाल जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं है।
मामला थाना दनकौर क्षेत्र का है। जहां 12 मई 2025 को वादी विजय के बेटे विशाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि विशाल जब मंडी श्याम नगर से फल खरीदकर अपनी मोटरसाइकिल से मधुवन एन्क्लेव घर लौट रहा था। तभी गेट के भीतर पहले से मौजूद बदमाशों ने उसे गोली मार दी थी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने विशाल को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि मृतक के साथ पुरानी रंजिश को देखते हुए जानबूझकर फंसाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि घटना बदले की भावना से अंजाम दी गई और इसमें आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया साबित होती है। मामले के तथ्य, अपराध की गंभीरता और अभियुक्त की भूमिका को देखते हुए जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है। इसलिए आरोपियों की जमानत अर्जी निरस्त कर दी।
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