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अदालत ने मनी लांड्रिंग मामले में पत्रकार को जमानत देने से किया इनकार
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नई दिल्ली। चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील जानकारियां उपलब्ध कराने से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र पत्रकार राजीव शर्मा को जमानत देने से शनिवार को इनकार कर दिया। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह यकीनन केस के सुरागों व निशानों को मिटाने की कोशिश करेगा।
अदालत ने कहा कि राजीव शर्मा को कई मौकों पर लाखों रुपये नकद कई संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त हुए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी को एक जुलाई को गिरफ्तार किया था। वह उसे धनराशि के संबंध में कोई भी संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहा है।
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी की सालाना आय केवल 8.6 लाख रुपये है लेकिन वह अपने बेटे को विदेश में पढ़ा रहा है। वह कई बार विदेश यात्रा कर चुका है और उसने निवेश करने के लिए अपने दोस्तों व जानकारों को लाखों रुपये उधार दिए हैं।
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अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। मामले की जांच अभी नाजुक दौर में है क्योंकि अभी तक पैसे के स्रोत का पता नहीं लगा है। ऐसे हालात में आरोपी को जमानत पर रिहा करना न्यायिक प्रक्रिया के लिए दुरुस्त नहीं होगा क्योंकि वह केस के तथ्यों एवं साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।
मामले में आरोपी 61 वर्षीय राजीव शर्मा ने दावा किया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और पहली नजर में उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। आरोपी ने ये भी कहा कि उसे साइनस की गंभीर दिक्कत है। वह साइनस के दो ऑपरेशन भी करवा चुका है। इसके मद्देनजर जेल में उसे कोविड संक्रमण होने की प्रबल आशंका है।
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अदालत ने कहा कि राजीव शर्मा को कई मौकों पर लाखों रुपये नकद कई संदिग्ध स्रोतों से प्राप्त हुए। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी को एक जुलाई को गिरफ्तार किया था। वह उसे धनराशि के संबंध में कोई भी संतोषजनक जवाब देने में नाकाम रहा है।
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अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी की सालाना आय केवल 8.6 लाख रुपये है लेकिन वह अपने बेटे को विदेश में पढ़ा रहा है। वह कई बार विदेश यात्रा कर चुका है और उसने निवेश करने के लिए अपने दोस्तों व जानकारों को लाखों रुपये उधार दिए हैं।
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अदालत ने कहा कि आरोपी पर गंभीर आरोप हैं। मामले की जांच अभी नाजुक दौर में है क्योंकि अभी तक पैसे के स्रोत का पता नहीं लगा है। ऐसे हालात में आरोपी को जमानत पर रिहा करना न्यायिक प्रक्रिया के लिए दुरुस्त नहीं होगा क्योंकि वह केस के तथ्यों एवं साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।
मामले में आरोपी 61 वर्षीय राजीव शर्मा ने दावा किया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और पहली नजर में उसके खिलाफ मनी लांड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। आरोपी ने ये भी कहा कि उसे साइनस की गंभीर दिक्कत है। वह साइनस के दो ऑपरेशन भी करवा चुका है। इसके मद्देनजर जेल में उसे कोविड संक्रमण होने की प्रबल आशंका है।