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57 विदेशी जमातियों को देश वापस भेजने के आदेश
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नूंह/पुन्हाना। 57 विदेशी जमातियों को लेकर सरकार द्वारा सीजेएम अदालत के फैसले के खिलाफ की गई अपील को नूंह सेशन अदालत ने खारिज कर दिया है। जिले के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत राणा की अदालत ने सभी 57 जमातियों को उनके देश भेजने के आदेश सरकार को दिए हैं। सेशन अदालत ने सीजेएम नूंह के फैसले को ही बरकरार रखा है।
बता दें कि कुछ समय पहले ये विदेशी जमाती जिले में आए थे। आरोप है कि इन्होंने जमात में जाने की जानकारी पुलिस और जिला प्रशासन से छिपाई थी। पुलिस ने कुल 58 विदेशी जमातियों के खिलाफ नूंह थाने में एक दर्जन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सरकार ने इन लोगों पर आरोप लगाया था कि इनकी वजह से ही संक्रमण और तेजी से फैला था।
सीजेएम अदालत ने 23 मई को एक बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने सभी 6 देशों के 58 विदेशी जमातियों और एक भारतीय अनुवादक पर सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का दोषी ठहराते हुए सभी पर एक एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। जिसे आरोपियों ने दे दिया था। इसके अलावा अदालत ने फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगाई गई सभी धाराओं को बेबुनियाद मानते हुए इंडोनेशिया, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, बंगला देश, थाईलैंड, नेपाल के कुल 57 जामतियो और एक भारतीय अनुवादक को बरी कर दिया था।
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एडवोकेट ताहिर हुसैन और शौकत अली का कहना है कि सीजेएम अदालत के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने सेशन अदालत में अपील दायर की थी। सरकार की इस अपील को नूंह अदालत ने खारिज करते हुए निचली अदालत के ही फैसले को बरकरार रखा है।
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बता दें कि कुछ समय पहले ये विदेशी जमाती जिले में आए थे। आरोप है कि इन्होंने जमात में जाने की जानकारी पुलिस और जिला प्रशासन से छिपाई थी। पुलिस ने कुल 58 विदेशी जमातियों के खिलाफ नूंह थाने में एक दर्जन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। सरकार ने इन लोगों पर आरोप लगाया था कि इनकी वजह से ही संक्रमण और तेजी से फैला था।
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सीजेएम अदालत ने 23 मई को एक बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने सभी 6 देशों के 58 विदेशी जमातियों और एक भारतीय अनुवादक पर सरकारी आदेशों की अवहेलना करने का दोषी ठहराते हुए सभी पर एक एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। जिसे आरोपियों ने दे दिया था। इसके अलावा अदालत ने फॉरेनर्स एक्ट के तहत लगाई गई सभी धाराओं को बेबुनियाद मानते हुए इंडोनेशिया, श्रीलंका, साउथ अफ्रीका, बंगला देश, थाईलैंड, नेपाल के कुल 57 जामतियो और एक भारतीय अनुवादक को बरी कर दिया था।
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एडवोकेट ताहिर हुसैन और शौकत अली का कहना है कि सीजेएम अदालत के फैसले के खिलाफ हरियाणा सरकार ने सेशन अदालत में अपील दायर की थी। सरकार की इस अपील को नूंह अदालत ने खारिज करते हुए निचली अदालत के ही फैसले को बरकरार रखा है।