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अदालत ने जीएसटी हेराफेरी मामले में युवक को दी अंतरिम जमानत
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नई दिल्ली। अदालत ने महाराष्ट्र में दर्ज जीएसटी धोखाधड़ी मामले में 18 वर्षीय युवक को अंतरिम जमानत प्रदान की है। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि जब 2019 में ये कथित अपराध हुआ उस समय आरोपी एक नाबालिग था।
रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर आरोपी को सात दिन की अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने न्याय के हित में आरोपी को सशर्त ये राहत प्रदान की है।
अदालत ने 14 जुलाई को रोहिणी इलाके से गिरफ्तार आरोपी को जमानत अवधि में अपने बैंक खाते से लेन-देन नहीं करने, जांच में सहयोग और कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जाने की हिदायत दी है।
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मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपी का तीन दिन का ट्रांजिट रिमांड महाराष्ट्र पुलिस को देते हुए उसे मुंबई की अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। सत्र अदालत ने इस आदेश को खारिज करते हुए आरोपी को अंतरिम जमानत दी है।
सत्र अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मजिस्ट्रेट ने रिमांड प्रदान करते हुए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों पर गौर नहीं किया जबकि आरोपी की ओर से अपराध के समय उसके नाबालिग होने का दावा किया गया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप राणा ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि आरोपी का रिमांड देते हुए निचली अदालत इस तथ्य पर विचार करने में नाकाम रही कि आरोपी कथित अपराध के समय नाबालिग था। इस तरह निचली अदालत का आदेश कानून की नजर में सही नहीं है।
वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध की रोकथाम व उचित जांच के लिए गिरफ्तारी की जरूरी थी क्योंकि इसे अपराध की जानकारी है और उसे वह अब भी कर रहा है।
पेश मामला मुंबई के एक शख्स द्वारा चार करोड़ रुपये की कथित जीएसटी चोरी और उस पैसे को आरोपी के मोबाइल से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर करने से जुड़ा है। -एजेंसी
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रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर आरोपी को सात दिन की अंतरिम जमानत दी है। अदालत ने न्याय के हित में आरोपी को सशर्त ये राहत प्रदान की है।
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अदालत ने 14 जुलाई को रोहिणी इलाके से गिरफ्तार आरोपी को जमानत अवधि में अपने बैंक खाते से लेन-देन नहीं करने, जांच में सहयोग और कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली से बाहर नहीं जाने की हिदायत दी है।
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मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपी का तीन दिन का ट्रांजिट रिमांड महाराष्ट्र पुलिस को देते हुए उसे मुंबई की अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था। सत्र अदालत ने इस आदेश को खारिज करते हुए आरोपी को अंतरिम जमानत दी है।
सत्र अदालत ने इस बात पर गौर किया कि मजिस्ट्रेट ने रिमांड प्रदान करते हुए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों पर गौर नहीं किया जबकि आरोपी की ओर से अपराध के समय उसके नाबालिग होने का दावा किया गया था।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप राणा ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि आरोपी का रिमांड देते हुए निचली अदालत इस तथ्य पर विचार करने में नाकाम रही कि आरोपी कथित अपराध के समय नाबालिग था। इस तरह निचली अदालत का आदेश कानून की नजर में सही नहीं है।
वहीं सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अपराध की रोकथाम व उचित जांच के लिए गिरफ्तारी की जरूरी थी क्योंकि इसे अपराध की जानकारी है और उसे वह अब भी कर रहा है।
पेश मामला मुंबई के एक शख्स द्वारा चार करोड़ रुपये की कथित जीएसटी चोरी और उस पैसे को आरोपी के मोबाइल से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर करने से जुड़ा है। -एजेंसी