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Noida News: दिल्ली में बनेगा देश का पहला हरित ई-कचरा ईको पार्क
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-दिल्ली सरकार ने शुरू किया नॉर्वे-हांगकांग के अंतरराष्ट्रीय मॉडल का अध्ययन
-150 करोड़ की लागत से बनेगा, टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में
-51,000 टन ई-कचरे की रिसाइकिल, 350 करोड़ की कमाई
-हजारों युवाओं को नौकरियां की सौगात देगा यह अनूठा पार्क
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में नॉर्वे और हांगकांग मॉडल से देश का पहला प्रदूषण-मुक्त और नेट-जीरो ई-कचरा ईको पार्क बनेगा। होलंबी कलां में 150 करोड़ रुपये की लागत से इसे 18 महीने में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पार्क हर साल 51,000 टन ई-कचरे को रिसाइकिल करेगा, 350 करोड़ रुपये की कमाई करेगा और हजारों लोगों को नौकरियां देगा। इससे दिल्ली को प्रदूषण से राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उत्तरी दिल्ली के होलंबी कलां में 11.4 एकड़ में बनने वाला यह पार्क पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। पर्यावरण, वन और उद्योग मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 150 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए ग्लोबल टेंडर (आरएफक्यू-कम-आरएफपी) की तैयारी अंतिम दौर में है। दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) जल्द ही इसे जारी करेगा।
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51,000 मीट्रिक टन ई-कचरे का प्रबंधन हर साल
यह ईको पार्क हर साल 51,000 मीट्रिक टन ई-कचरे का प्रबंधन करेगा, जिससे 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होगी। यह हजारों लोगों को नौकरी देगा और ई-वेस्ट रिसाइकल करने वाले लोगों को प्रशिक्षण देकर कानूनी रूप से रिसाइकल उद्योग क्षेत्र में शामिल करेगा। सिरसा ने कहा, हम नॉर्वे और हांगकांग के सफल मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं, जहां बिना प्रदूषण के ई-कचरा रिसाइकिलिंग होती है। सरकार का लक्ष्य दुनिया की सबसे स्वच्छ और सुरक्षित तकनीकों का उपयोग करना है, जो पर्यावरण की रक्षा करे और स्थानीय रोजगार बढ़ाए।
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ईको पार्क में पर्यावरण का विशेष ध्यान
पार्क को हरा-भरा बनाने के लिए 33% हिस्से में घने पेड़ लगाए जाएंगे और 53% हिस्से में खुला क्षेत्र होगा। यह नेट-जीरो उत्सर्जन और जीरो-लैंडफिल के सिद्धांत पर काम करेगा, जो आईएसओ 9000, सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय के मानकों को पूरा करेगा। मंत्री ने बताया कि एक थर्ड पार्टी विशेषज्ञ एजेंसी नॉर्वे और हांगकांग के मॉडलों का अध्ययन कर रही है, ताकि रिसाइकिलिंग, कीमती धातुओं की रिकवरी, प्रदूषण नियंत्रण और आकर्षक डिजाइन में सर्वश्रेष्ठ तकनीकों का उपयोग हो।
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-150 करोड़ की लागत से बनेगा, टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में
-51,000 टन ई-कचरे की रिसाइकिल, 350 करोड़ की कमाई
-हजारों युवाओं को नौकरियां की सौगात देगा यह अनूठा पार्क
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में नॉर्वे और हांगकांग मॉडल से देश का पहला प्रदूषण-मुक्त और नेट-जीरो ई-कचरा ईको पार्क बनेगा। होलंबी कलां में 150 करोड़ रुपये की लागत से इसे 18 महीने में बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह पार्क हर साल 51,000 टन ई-कचरे को रिसाइकिल करेगा, 350 करोड़ रुपये की कमाई करेगा और हजारों लोगों को नौकरियां देगा। इससे दिल्ली को प्रदूषण से राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
उत्तरी दिल्ली के होलंबी कलां में 11.4 एकड़ में बनने वाला यह पार्क पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। पर्यावरण, वन और उद्योग मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि 150 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए ग्लोबल टेंडर (आरएफक्यू-कम-आरएफपी) की तैयारी अंतिम दौर में है। दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीएसआईआईडीसी) जल्द ही इसे जारी करेगा।
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51,000 मीट्रिक टन ई-कचरे का प्रबंधन हर साल
यह ईको पार्क हर साल 51,000 मीट्रिक टन ई-कचरे का प्रबंधन करेगा, जिससे 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई होगी। यह हजारों लोगों को नौकरी देगा और ई-वेस्ट रिसाइकल करने वाले लोगों को प्रशिक्षण देकर कानूनी रूप से रिसाइकल उद्योग क्षेत्र में शामिल करेगा। सिरसा ने कहा, हम नॉर्वे और हांगकांग के सफल मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं, जहां बिना प्रदूषण के ई-कचरा रिसाइकिलिंग होती है। सरकार का लक्ष्य दुनिया की सबसे स्वच्छ और सुरक्षित तकनीकों का उपयोग करना है, जो पर्यावरण की रक्षा करे और स्थानीय रोजगार बढ़ाए।
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ईको पार्क में पर्यावरण का विशेष ध्यान
पार्क को हरा-भरा बनाने के लिए 33% हिस्से में घने पेड़ लगाए जाएंगे और 53% हिस्से में खुला क्षेत्र होगा। यह नेट-जीरो उत्सर्जन और जीरो-लैंडफिल के सिद्धांत पर काम करेगा, जो आईएसओ 9000, सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय के मानकों को पूरा करेगा। मंत्री ने बताया कि एक थर्ड पार्टी विशेषज्ञ एजेंसी नॉर्वे और हांगकांग के मॉडलों का अध्ययन कर रही है, ताकि रिसाइकिलिंग, कीमती धातुओं की रिकवरी, प्रदूषण नियंत्रण और आकर्षक डिजाइन में सर्वश्रेष्ठ तकनीकों का उपयोग हो।