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Noida News: पेड़ों की कटाई पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
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प्रदेश अध्यक्ष ने कहा - झुग्गी तोड़ो, पेड़ काटो, इमारत बनाओ भाजपा की नीति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने रविवार को दिल्ली सरकार को घेरा। उन्होंने कस्तूरबा नगर फेज-2 में सामान्य पूल आवासीय परियोजना के लिए 856 पेड़ों की कटाई/प्रत्यारोपण की अधिसूचना को पर्यावरण और सामाजिक न्याय पर दोहरा हमला करार दिया।
यादव ने कहा कि यह महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में दिल्ली में हजारों पेड़ों की बलि चढ़ेगी, जबकि पहले से ही यह दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। भाजपा अब खुलकर झुग्गी तोड़ो, पेड़ काटो और गगनचुंबी इमारत बनाओ की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री आवास के पास अधिकारियों के लिए आलीशान फ्लैट बन रहे हैं। इसके लिए आसपास की झुग्गियों को उजाड़ा जा रहा है। प्रदूषण के नाम पर जनता पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं, लेकिन पेड़ों की कटाई पर सरकार मौन है। वर्ष 2019 से 2021 के बीच दिल्ली में 1.33 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई। इस तरह हर घंटे औसत पांच पेड़ काटे गए।
उन्होंने मांग की कि हर परियोजना से पहले ट्री सेंसस अनिवार्य हो जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इसके अलावा जब तक स्वतंत्र निगरानी और जनसुनवाई की व्यवस्था नहीं होती, तब तक किसी भी पेड़ की कटाई की अनुमति नहीं दी जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में पेड़ काटने को मानव हत्या जैसा बताया गया था। उन्होंने मांग की कि ट्री सेंसस की जिम्मेदारी फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून को दी जाए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने रविवार को दिल्ली सरकार को घेरा। उन्होंने कस्तूरबा नगर फेज-2 में सामान्य पूल आवासीय परियोजना के लिए 856 पेड़ों की कटाई/प्रत्यारोपण की अधिसूचना को पर्यावरण और सामाजिक न्याय पर दोहरा हमला करार दिया।
यादव ने कहा कि यह महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में दिल्ली में हजारों पेड़ों की बलि चढ़ेगी, जबकि पहले से ही यह दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल है। भाजपा अब खुलकर झुग्गी तोड़ो, पेड़ काटो और गगनचुंबी इमारत बनाओ की नीति पर चल रही है। प्रधानमंत्री आवास के पास अधिकारियों के लिए आलीशान फ्लैट बन रहे हैं। इसके लिए आसपास की झुग्गियों को उजाड़ा जा रहा है। प्रदूषण के नाम पर जनता पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं, लेकिन पेड़ों की कटाई पर सरकार मौन है। वर्ष 2019 से 2021 के बीच दिल्ली में 1.33 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई। इस तरह हर घंटे औसत पांच पेड़ काटे गए।
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उन्होंने मांग की कि हर परियोजना से पहले ट्री सेंसस अनिवार्य हो जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। इसके अलावा जब तक स्वतंत्र निगरानी और जनसुनवाई की व्यवस्था नहीं होती, तब तक किसी भी पेड़ की कटाई की अनुमति नहीं दी जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में पेड़ काटने को मानव हत्या जैसा बताया गया था। उन्होंने मांग की कि ट्री सेंसस की जिम्मेदारी फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून को दी जाए।
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