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Noida News: दुष्कर्म मामले में समझौते का सुझाव देने पर चिंता जताई
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हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के आचरण पर व्यक्त की चिंता
दुष्कर्म मामले की सुनवाई किसी अन्य न्यायाधीश से कराने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अभियोजन साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के दौरान दुष्कर्म का मामला निपटाने के लिए आरोपी व पीड़िता को कथित तौर पर सुझाव देने और सहायता करने के लिए ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के आचरण पर चिंता जताई है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने 7 मार्च को सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे और अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे थे, इसलिए यह समझ में नहीं आ रहा कि न्यायाधीश ने दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध से जुड़े मामले को निपटाने के लिए क्यों कहा होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने उनके समक्ष यह भी कहा है कि उसने ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के कहने पर ही समझौता किया था और इसका उल्लेख समझौते में ही किया गया था जो विधिवत नोटरीकृत है। 6 जनवरी के समझौते के अनुसार अगर एफआईआर रद्द कर दी जाती है तो आरोपी 3.5 लाख रुपये देने पर सहमत हुआ था। इसमें महिला ने सहमति व्यक्त की थी कि उनके बीच जो कुछ भी हुआ वह स्वतंत्र इच्छा से हुआ था। सहमति से संबंध समझौते में यह भी कहा गया है कि महिला इस बात से सहमत थी कि उसने गलतफहमी के कारण ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोपी के खिलाफ गवाही दी थी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणियां करते हुए उस याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दुष्कर्म के लिए दर्ज 2020 की एफआईआर को समझौते के आधार पर रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई किसी अन्य न्यायाधीश की ओर से की जाए।
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दुष्कर्म मामले की सुनवाई किसी अन्य न्यायाधीश से कराने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अभियोजन साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के दौरान दुष्कर्म का मामला निपटाने के लिए आरोपी व पीड़िता को कथित तौर पर सुझाव देने और सहायता करने के लिए ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के आचरण पर चिंता जताई है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने 7 मार्च को सुनवाई के दौरान कहा कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे और अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे थे, इसलिए यह समझ में नहीं आ रहा कि न्यायाधीश ने दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध से जुड़े मामले को निपटाने के लिए क्यों कहा होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला ने उनके समक्ष यह भी कहा है कि उसने ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीश के कहने पर ही समझौता किया था और इसका उल्लेख समझौते में ही किया गया था जो विधिवत नोटरीकृत है। 6 जनवरी के समझौते के अनुसार अगर एफआईआर रद्द कर दी जाती है तो आरोपी 3.5 लाख रुपये देने पर सहमत हुआ था। इसमें महिला ने सहमति व्यक्त की थी कि उनके बीच जो कुछ भी हुआ वह स्वतंत्र इच्छा से हुआ था। सहमति से संबंध समझौते में यह भी कहा गया है कि महिला इस बात से सहमत थी कि उसने गलतफहमी के कारण ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोपी के खिलाफ गवाही दी थी। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणियां करते हुए उस याचिका को खारिज करते हुए की जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दुष्कर्म के लिए दर्ज 2020 की एफआईआर को समझौते के आधार पर रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई किसी अन्य न्यायाधीश की ओर से की जाए।
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