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गलत चालान की शिकायत पड़ रही महंगी
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गलत चालान की शिकायत पड़ रही महंगी
नोएडा। यातायात नियम तोड़ने वालों की ट्रैफिक पुलिस पोल खोल रही है। गलत चालान की शिकायत करने पहुंच रहे लोगों को जोरदार झटका मिल रहा है। गलत चालान हाथ में लेकर शिकायत करने पहुंच रहे लोगों को फजीहत करा वापस लौटना पड़ रहा है। रोजाना ऐसे 8 से 10 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें वाहन चालकों की लापरवाही की ही पोल खुल रही है। एक की जगह कई चालान लेकर लोग ट्रैफिक कंट्रोल रूम से वापस लौट रहे हैं।
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केस-1
परिवहन विभाग ने 11 सितंबर को एक बस का चालान काटा, लेकिन चालान पर अपराध अंकित करने में गलती कर दी। बस के चालान में बिना हेलमेट वाहन चलाने का अपराध अंकित कर दिया। बस ऑपरेटर शुक्रवार को ट्रैफिक कंट्रोल रूम शिकायत लेकर पहुंचा तो पता चला कि उसकी बस का चालक चार बार पहले ही नियम तोड़ते कैमरे में कैद हो चुका है। पिछले चालान का भुगतान भी अब तक नहीं हुआ है।
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केस-2
चालान पर किसी अन्य वाहन का फोटो छपा होने पर नोएडा निवासी एक शख्स शुक्रवार गुस्से में ट्रैफिक कंट्रोल रूम पहुंचा। नाराजगी जताते हुए गलत चालान को निरस्त करने का दबाव बनाने लगा, लेकिन जब उसके वाहन का रिकॉर्ड देखा गया तो पता चला कि उसकी फॉर्च्यूनर कार के 33 चालान पहले ही कट चुके हैं। 33,400 रुपये के चालान पेंडिंग होने की खबर सुनते ही वाहन मालिक के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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केस-3
बरेली से एक व्यक्ति यह सोचकर नोएडा आया कि उन्होंने नियम तोड़ा ही नहीं तो जुर्माना किस बात का होगा। ऑनलाइन सिस्टम पर चालान का रिकॉर्ड खंगाला गया तो यमुना एक्सप्रेसवे पर 24 बार गति सीमा का उल्लंघन करने पर उसकी स्विफ्ट डिजायर कार का चालान कट चुका है। ट्रैफिक पुलिस ने 23,400 रुपये शमन शुल्क जमा कराने की बात कही तो वाहन मालिक हैरानी में पड़ गया और चुपचाप लौट गया।
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इसलिए बढ़ रही दिक्कतें
ई-चालान प्रणाली की व्यवस्था अचानक से गड़बड़ा गई है। तकनीकी खराबी से ऑनलाइन ऐसे चालान जनरेट हो रहे हैं जिन पर वाहन नंबर और फोटो का मिलान नहीं हो रहा है। कोई ट्विटर पर तो कोई खुद ट्रैफिक कंट्रोल रूम जाकर इसकी शिकायत कर रहा है। कंट्रोल रूम में जांच के दौरान सही जानकारी मिल रही है। गलत चालान होने पर उसे निरस्त कराया जा रहा है।
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ई-चालान प्रणाली की शुरुआत में 15 से 20 फीसदी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं लेकिन अब यह ग्राफ एक फीसदी से कम रह गया है। गलत चालान से संबंधित शिकायतों की जांच कराया निस्तारण किया जा रहा है। - अनिल कुमार झा, एसपी ट्रैफिक
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नोएडा। यातायात नियम तोड़ने वालों की ट्रैफिक पुलिस पोल खोल रही है। गलत चालान की शिकायत करने पहुंच रहे लोगों को जोरदार झटका मिल रहा है। गलत चालान हाथ में लेकर शिकायत करने पहुंच रहे लोगों को फजीहत करा वापस लौटना पड़ रहा है। रोजाना ऐसे 8 से 10 मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें वाहन चालकों की लापरवाही की ही पोल खुल रही है। एक की जगह कई चालान लेकर लोग ट्रैफिक कंट्रोल रूम से वापस लौट रहे हैं।
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केस-1
परिवहन विभाग ने 11 सितंबर को एक बस का चालान काटा, लेकिन चालान पर अपराध अंकित करने में गलती कर दी। बस के चालान में बिना हेलमेट वाहन चलाने का अपराध अंकित कर दिया। बस ऑपरेटर शुक्रवार को ट्रैफिक कंट्रोल रूम शिकायत लेकर पहुंचा तो पता चला कि उसकी बस का चालक चार बार पहले ही नियम तोड़ते कैमरे में कैद हो चुका है। पिछले चालान का भुगतान भी अब तक नहीं हुआ है।
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केस-2
चालान पर किसी अन्य वाहन का फोटो छपा होने पर नोएडा निवासी एक शख्स शुक्रवार गुस्से में ट्रैफिक कंट्रोल रूम पहुंचा। नाराजगी जताते हुए गलत चालान को निरस्त करने का दबाव बनाने लगा, लेकिन जब उसके वाहन का रिकॉर्ड देखा गया तो पता चला कि उसकी फॉर्च्यूनर कार के 33 चालान पहले ही कट चुके हैं। 33,400 रुपये के चालान पेंडिंग होने की खबर सुनते ही वाहन मालिक के पैरों तले जमीन खिसक गई।
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केस-3
बरेली से एक व्यक्ति यह सोचकर नोएडा आया कि उन्होंने नियम तोड़ा ही नहीं तो जुर्माना किस बात का होगा। ऑनलाइन सिस्टम पर चालान का रिकॉर्ड खंगाला गया तो यमुना एक्सप्रेसवे पर 24 बार गति सीमा का उल्लंघन करने पर उसकी स्विफ्ट डिजायर कार का चालान कट चुका है। ट्रैफिक पुलिस ने 23,400 रुपये शमन शुल्क जमा कराने की बात कही तो वाहन मालिक हैरानी में पड़ गया और चुपचाप लौट गया।
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इसलिए बढ़ रही दिक्कतें
ई-चालान प्रणाली की व्यवस्था अचानक से गड़बड़ा गई है। तकनीकी खराबी से ऑनलाइन ऐसे चालान जनरेट हो रहे हैं जिन पर वाहन नंबर और फोटो का मिलान नहीं हो रहा है। कोई ट्विटर पर तो कोई खुद ट्रैफिक कंट्रोल रूम जाकर इसकी शिकायत कर रहा है। कंट्रोल रूम में जांच के दौरान सही जानकारी मिल रही है। गलत चालान होने पर उसे निरस्त कराया जा रहा है।
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ई-चालान प्रणाली की शुरुआत में 15 से 20 फीसदी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं लेकिन अब यह ग्राफ एक फीसदी से कम रह गया है। गलत चालान से संबंधित शिकायतों की जांच कराया निस्तारण किया जा रहा है। - अनिल कुमार झा, एसपी ट्रैफिक