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Noida News: जेपी विशटाउन की परियोजनाओं में जांच को समिति बनी

Mon, 14 Sep 2026 09:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:12 PM IST
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Committee formed to investigate JP Wishtown projects
- शासन ने शिकायतों को संज्ञान में लेकर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी की अगुवाई में समिति बनाई
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माई सिटी रिपोर्टर

नोएडा। जेपी विशटाउन की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में देरी और अनधिकृत निर्माण की शिकायतें मिली हैं। शासन ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच समिति गठित की है। नोएडा प्राधिकरण के के ओएसडी के नेतृत्व में बनी इस पांच सदस्यीय समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। जेपी विशटाउन में सेक्टर-128, 131, 133 व 134 में 16 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं प्रमुख हैं।
जेपी विशटाउन के निवासी आशीष ने 10 अगस्त 2026 को शासन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में समय पर निर्माण न होने और स्वीकृत डीपीआर व मानचित्र के अनुरूप काम न होने का जिक्र था। इसमें स्वीकृत योजना के अतिरिक्त अनधिकृत निर्माण की बात भी कही गई थी। परियोजना का निर्माण जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड ने शुरू किया था। परियोजना पूरी न होने के कारण मामला एनसीएलटी में चला गया था। एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत रिजोल्यूशन प्लान के तहत काम का जिम्मा सुरक्षा रियल्टी एजेंसी को मिला। सुरक्षा रियल्टी पर भी लापरवाही बरतने के आरोप हैं। शासन में औद्योगिक विकास विभाग के संयुक्त सचिव ने जांच समिति गठन का आदेश जारी किया है।
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नोएडा व यमुना प्राधिकरण के अधिकारी जांच समिति में शामिल
शासन ने नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी संतोष कुमार की अध्यक्षता में यह जांच समिति गठित की है। नोएडा के नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता इसके सदस्य हैं। नोएडा के वरिष्ठ एवं वित्त लेखाधिकारी विजय स्वरूप भी समिति में शामिल हैं। यमुना प्राधिकरण के वित्त विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलीम अहमद और नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक मनीष लाल भी सदस्य बनाए गए हैं। यह समिति सात प्रमुख बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट देगी।
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जांच के मुख्य बिंदु
समिति एनसीएलटी रिजोल्यूशन प्लान की शर्तों और स्वीकृत डीपीआर के अनुरूप निर्माण की जांच करेगी। वह देखेगी कि स्वीकृत योजना के अतिरिक्त कोई अनधिकृत टावर, फ्लोर या यूनिट तो नहीं बनी है। अतिरिक्त निर्माण से खरीदारों के खाली क्षेत्र, हरियाली, पार्किंग और अन्य सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जाएगा। एफएआर या मंजूर ग्राउंड कवरेज में अनधिकृत वृद्धि और खरीदारों के अधिकारों पर प्रभाव की भी जांच होगी। निर्माण की वास्तविक प्रगति और खरीदारों से प्राप्त धन के उपयोग की समीक्षा की जाएगी।
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