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भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए सीएम लाए विश्वास मत: भाजपा
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सदन में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने मांगा मुख्यमंत्री से जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सदन में आप सरकार के विश्वास मत का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केवल भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि विधानसभा में आप के पास पर्याप्त बहुमत है। सच्चाई यह है कि दिल्ली सरकार पर आप विधायकों का तो विश्वास है, लेकिन वह जनता में विश्वास खो चुकी है।
यह हास्यास्पद स्थिति है कि जिस आरोप के बाद विधानसभा में विश्वास मत पेश किया गया है, उस मामले की जांच में मुख्यमंत्री केजरीवाल और मंत्री आतिशी पुलिस से सहयोग नहीं कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और हर मोर्चे पर सरकार की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए विश्वास मत लाया गया है। नई शराब नीति लाकर मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया गया। ठेकेदारों का कमीशन 2 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया। घोटाले में मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत कई नेता जेल में हैं और भ्रष्टाचार की पोल खुलने के बाद इस नीति को वापस लेना पड़ा। जब दिल्ली के मुख्यमंत्री जल बोर्ड के अध्यक्ष थे तो वहां करोड़ों के घोटाले हुए जिनकी जांच हो रही है। बिजली घोटाला करके प्राइवेट कंपनियों को 8 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया। स्वास्थ्य के नाम पर भी दिल्ली सरकार घोटालों से भरी पड़ी है। दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो ने मोहल्ला क्लीनिकों में फर्जी टेस्ट का घोटाला पकड़ा है। क्लास रूम घोटाले में करोड़ों के हेरफेर की भी जांच की जा रही है। डीटीसी घोटाला भी सभी के सामने है। इसकी जांच सीबीआई कर रही है। इसके अलावा पैनिक बटन के नाम पर बस ऑपरेटरों और टैक्सी मालिकों से करोड़ों रुपये वसूल लिए गए जबकि वह केवल खिलौना ही साबित हुआ। मुख्यमंत्री का निवास बनाने के नाम पर बिना टेंडर के ही सारी नियमों को ताक पर रखकर बिना नक्शा पास कराए कुल मिलाकर 179 करोड़ का खर्चा किया गया। आरोपियों को बचाने के लिए सरकार वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। पिछले 18 महीनों में ही वकीलों को 28 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया जिसमें शराब घोटाले के मामले के 21 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सदन में आप सरकार के विश्वास मत का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केवल भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए विधानसभा में विश्वास मत पेश किया। इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि विधानसभा में आप के पास पर्याप्त बहुमत है। सच्चाई यह है कि दिल्ली सरकार पर आप विधायकों का तो विश्वास है, लेकिन वह जनता में विश्वास खो चुकी है।
यह हास्यास्पद स्थिति है कि जिस आरोप के बाद विधानसभा में विश्वास मत पेश किया गया है, उस मामले की जांच में मुख्यमंत्री केजरीवाल और मंत्री आतिशी पुलिस से सहयोग नहीं कर रहे हैं। भ्रष्टाचार और हर मोर्चे पर सरकार की विफलता से ध्यान भटकाने के लिए विश्वास मत लाया गया है। नई शराब नीति लाकर मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया गया। ठेकेदारों का कमीशन 2 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया। घोटाले में मनीष सिसोदिया, संजय सिंह समेत कई नेता जेल में हैं और भ्रष्टाचार की पोल खुलने के बाद इस नीति को वापस लेना पड़ा। जब दिल्ली के मुख्यमंत्री जल बोर्ड के अध्यक्ष थे तो वहां करोड़ों के घोटाले हुए जिनकी जांच हो रही है। बिजली घोटाला करके प्राइवेट कंपनियों को 8 हजार करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया। स्वास्थ्य के नाम पर भी दिल्ली सरकार घोटालों से भरी पड़ी है। दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो ने मोहल्ला क्लीनिकों में फर्जी टेस्ट का घोटाला पकड़ा है। क्लास रूम घोटाले में करोड़ों के हेरफेर की भी जांच की जा रही है। डीटीसी घोटाला भी सभी के सामने है। इसकी जांच सीबीआई कर रही है। इसके अलावा पैनिक बटन के नाम पर बस ऑपरेटरों और टैक्सी मालिकों से करोड़ों रुपये वसूल लिए गए जबकि वह केवल खिलौना ही साबित हुआ। मुख्यमंत्री का निवास बनाने के नाम पर बिना टेंडर के ही सारी नियमों को ताक पर रखकर बिना नक्शा पास कराए कुल मिलाकर 179 करोड़ का खर्चा किया गया। आरोपियों को बचाने के लिए सरकार वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। पिछले 18 महीनों में ही वकीलों को 28 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया जिसमें शराब घोटाले के मामले के 21 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।
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